किसानों की गुहार / हे सरकार! शुरू करो मंडियां, नहीं तो सड़ जाएंगे हमारे प्याज

Hey government Start mandis, otherwise our onions will rot
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Hey government Start mandis, otherwise our onions will rot

  • मंडियां बंद हैं और लॉकडाउन में बाहर निकल नहीं सकते, इसे बेचे कहां?

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 07:10 AM IST

जोधपुर. टिड्‌डी और कोरोना की मार झेलने वाला किसान अभी तक पैरों पर खड़ा ही नहीं हुआ था कि अब बढ़ती गर्मी ने फिर से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उकेर दीं। प्याज की फसल कट चुकी है और केवल मंडियों में आनी है। कोरोना संकट काल के कारण मंडियों में व्यापार बंद होने से प्याज के खराब होने का अंदेशा है। दरअसल, किसानों की प्याज की फसल पककर तैयार हो गई है और अब वह खेतों में पड़ी-पड़ी सड़ने की स्थिति में आ गई है।

मंडियां बंद होने से बेबस किसान प्याज कहां लाकर बेचेंगे? लॉकडाउन के कारण बाहर भी नहीं निकल सकते हैं। पुलिस जाने नहीं देगी। ऐसे में मंडियां ही एकमात्र सहारा है, जहां पर प्याज बिक सकता है, पर वे बंद हैं। जोधपुर के आसपास बड़ी मात्रा में प्याज की फसल होती है। अधिकतर खेतों में प्याज की फसल कट चुकी है, अब प्याज बिकने नहीं आए तो खराब हो जाएंगे।
किसानों की पीड़ा , प्याज की खरीद नहीं करवाई तो होगा भारी नुकसान
भोपालगढ़ के नदसर गांव के किसान कालूराम मुंडेल व सुनील चौधरी ने कहा कि प्याज बोना एक सट्टे के समान हो गया है जिसमें निश्चित नहीं कि उसको उचित दाम मिलेगा या नहीं। अभी प्याज खून के आंसू रुला रहा है, सरकार ने प्याज की खरीद नहीं करवाई तो किसानों को भारी नुकसान होगा। 
चापला गांव के किसान शिवदान जाखड़ ने कहा कि किसान के हाथ में पैसा नहीं आएगा तो वह कहां से तो खेती के लिए खाद-बीज खरीदेगा और कैसे बिजली बिल व केसीसी का ऋण भरेगा? सरकार शीघ्र प्याज का सरकारी खरीद केंद्र उचित समर्थन मूल्य पर शुरू करे।
रजलानी गांव के किसान दौलताराम गोदारा ने बताया कि ट्रेन, बस व हवाई जहाज शुरू होने जा रहे हैं तो मंडी शुरू करने में क्या दिक्कत है? फसल कट चुकी है। 8-10 दिन में प्याज नहीं उठे तो ये खराब हो जाएंगे। सरकार को प्राथमिकता के साथ समस्या हल करनी चाहिए।
मौसम की मार

पहले टिड्डी से मार पड़ी और उससे बचाव किया। अब किसानों से प्याज की फसल को घास-फूस से ढक कर रखा है, लेकिन तापमान 44 डिग्री के पार जाने लगा है और गर्मी बढ़ने से  फसल चौपट हो जाएंगी तो वहीं मौसम में बदलाव के चलते बारिश का भी डर सता रहा है। चूंकि यहां बड़े-बड़े कोल्ड स्टोरेज नहीं हैं। कुछ है तो वहां बड़े किसान अपनी फसल रख लेते हैं। ऐसे में छोटे किसान की हालात खराब है। 

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