खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज की:हाईकोर्ट बोले - प्रसव से 15 दिन पूर्व या तीन माह बाद ड्यूटी जॉइन की तो भी मातृत्व अवकाश का हक

जोधपुर3 महीने पहले
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सरकार ऐसी महिलाओं को मातृत्व अवकाश नहीं देना चाहती। - Dainik Bhaskar
सरकार ऐसी महिलाओं को मातृत्व अवकाश नहीं देना चाहती।

एक सरकारी महिला कर्मचारी मातृत्व अवकाश लेने की तब भी हकदार है, अगर वह प्रसव होने के 15 दिन पूर्व व बच्चा होने के तीन महीने तक ड्यूटी ज्वॉइन करती है। राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने यह निर्धारित किया था। हालांकि राज्य सरकार एकलपीठ के इस फैसले से सहमत नहीं थी और इसे खंडपीठ में चुनौती दे दी। अब हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इंद्रजीत महांति व जस्टिस विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ ने भी एकलपीठ के फैसले को उचित बताते हुए सरकार की अपील को खारिज कर दिया है।

यह था मामला

मामले के अनुसार नागौर के सिंधपुरा की नीरज ने 15 मई 2016 को एक बच्चे को जन्म दिया। उन्हें 4 जून 16 को पीटीआई ग्रेड थर्ड पद पर नियुक्ति दी गई। वे ड्यूटी ज्वॉइन करने के लिए फिट नहीं थी। नॉन जॉइनिंग से कुछ नुकसान होने के चलते दो दिन बाद ही 6 जून को ड्यूटी ज्वॉइन की। इसके बाद 21 जून 16 को मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया।

26 जून से 10 नवंबर 16 तक कुल 142 दिनों तक वे ऑफिस नहीं आईं। विभाग ने 13 अगस्त 18 को उनकी 90 दिन की छुट्‌टी बिना वेतन के मंजूर की। 17 जुलाई 19 को बचे हुए 52 दिन का अवकाश एक्स्ट्रा ऑर्डिनेरी अवकाश के रूप बिना वेतन के स्वीकृत किया। उनकी परिवीक्षा अवधि को 112 दिन बढ़ाते हुए 26 सितंबर 19 को स्थायी किया गया। इसके बाद महिला ने एकलपीठ में याचिका दायर की।

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