बॉर्डर के निकट बफर जोन:हाईकोर्ट ने कहा- केन्द्र सरकार से जुड़ा बेहद संवेदनशील पॉलिसी मैटर, हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते

जोधपुर9 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

राजस्थान हाईकोर्ट में भारत-पाक सीमा के सटे दस किलोमीटर क्षेत्र में खनन, इंडस्ट्रीज व व्यावसायिक उपयोग लेने पर रोक लगाने को लेकर सुनवाई हुई। यहां बफर जोन बनाने के लिए केन्द्र सरकार को निर्देश देने की मांग को लेकर दायर एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी व न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने कहा कि यह बहुत संवेदनशील पॉलिसी मैटर है। इस मामले में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप उचित नहीं रहेगा।

सीमा जन कल्याण समिति की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई थी कि भारत-पाक सीमा से सटा दस किलोमीटर का क्षेत्र बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी तरह की खनन व औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति प्रदान नहीं की जानी चाहिए। साथ ही इस क्षेत्र का उपयोग व्यावसायिक तौर पर भी नहीं किया जाना चाहिये। साथ ही याचिका में कहा गया कि बॉर्डर पर इंटेलीजेंस के लिए स्थापित चौकियों को भी हटा दिया गया है।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि सीमा चौकियों को हटाने या इन्हें बरकरार रखने का फैसला जिम्मेदार लोगों ने सोच-समझ कर किया होगा। यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने देश व लोगों को किस तरह सुरक्षा प्रदान करते है। यह भी पॉलिसी मैटर है।

याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि बॉर्डर क्षेत्र में खनन बहुत गंभीर मसला है. इससे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। साथ ही कहा गया कि खनन की अनुमति देने का मसला राज्य सरकार से जुड़ा है। इस बारे में केन्द्र सरकार भी नहीं चाहती है कि संवेदनशील क्षेत्र में खनन कार्य किया जाए। ऐसे में इन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।

मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी व न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ ने कहा कि बॉर्डर के दस किलोमीटर क्षेत्र को बफर जोन बनाने का फैसला एक याचिका पर हाईकोर्ट नहीं ले सकता। यह केन्द्र सरकार की पॉलिसी से जुड़ा बहुत संवेदनशील मसला है। इस मामले में हाईकोर्ट किसी प्रकार का हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझता।