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लक्ष्मी विलास पैलेस:252 करोड़ की होटल 7.50 करोड़ में बेची, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी सहित पांच लोगों के खिलाफ धाेखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करने के आदेश

जोधपुर4 दिन पहले
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उदयपुर का लक्ष्मी विलास पैलेस होटल।
  • होटल को कुर्क कर कलेक्टर को रिसीवर नियुक्त किया गया

(नरेश आर्य). उदयपुर की प्रसिद्ध लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को 2002 में औने-पौने दामों में बेचकर सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाने के मामले में सीबीआई की विशेष कोर्ट जोधपुर के जज पूरण कुमार शर्मा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, पूर्व व अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने होटल को उदयपुर कलेक्टर को कुर्क करने के भी आदेश दिए हैं, यह होटल कोर्ट का फैसला आने तक कुर्क रहेगी।

विनिवेशन मंत्रालय के तत्कालीन सचिव प्रदीप बेजल के लोक सेवक के रूप में कार्यरत रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर लाजार्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली के तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष गुहा, मैसर्स कांतिलाल कर्मसे कंपनी मुंबई और भारत होटल लिमिटेड नई दिल्ली के अधिकृत प्रतिनिधि व भारत सरकार के अज्ञात अधिकारियों व निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर मेसर्स लक्ष्मी विलास पैलेस होटल उदयपुर, जो कि आईटीडीसी नई दिल्ली की इकाई थी, के विनिवेशन के संबंध में आपराधिक षडयंत्र रचकर भारत सरकार को 143.48 करोड़ रुपए की हानि पहुंचाई। सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी तथा सीबीआई ने जांच कर अंतिम रिपोर्ट पेश की।

सीबीआई ने पहले नहीं माना था कोई अपराध
कोर्ट ने 13 अगस्त 19 को आदेश पारित कर जांच के लिए यह मामला सीबीआई को लौटाया था। सीबीआई की ओर से पुराने तथ्यों को दोहराते हुए अंतिम रिपोर्ट दी। कोर्ट ने तीन सालों से घाटे में चल रही लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को विनेवशन मंत्रालय द्वारा कम से कम 6 करोड़ 32 लाख रुपए निर्धारित कर मैसर्स भारत होटल लिमिटेड को 7 करोड़ 52 लाख रुपए में बेचने का निर्णय कर दिया गया। सीबीआई ने पहले इस निर्णय व बेचने को गलत मानकर मामला दर्ज किया और फिर जांच के बाद किसी प्रकार का कोई अपराध न मानकर अंतिम रिपोर्ट पेश कर दी।

कोर्ट ने कहा कि जिन तथ्यों के आधार पर सीबीआई द्वारा अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, वे मानने योग्य नहीं है। क्योंकि सीबीआई ने भूमि की डीएलसी रेट प्राप्त की, जो पांच सौ रुपए से एक हजार रुपए के मध्य थी। इस डीएलसी रेट के अनुसार भूमि करीब 150 करोड़ रुपए कीमत की होना साबित होता है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई द्वारा अंतिम रिपोर्ट में कम वेल्यूशन आंकना माना है, लेकिन वेल्यूवर का आशय अपराध करने का नहीं मानकर अंतिम रिपोर्ट दी।
मर्जी से ही मूल्यांकनकर्ता नियुक्त किया
प्रकरण में संपत्ति का मूल्यांकनकर्ता नियुक्त किया गया है, वह पहले आईटीडीसी द्वारा नियुक्त करने का निर्णय किया गया था, लेकिन बाद में मूल्यांकनकर्ता की नियुक्ति का निर्णय विनिवेश मंत्रालय के अधिकारी प्रदीप बैजल व मंत्री अरुण शौरी ने अपने हाथ में ले लिया। अपनी मर्जी से ही मैसर्स कांति कर्मसे को मूल्यांकनकर्ता नियुक्त कर दिया, जो कि सरकारी मान्यता प्राप्त संपत्ति मूल्यांकनकर्ता की सूची में नहीं था। उसने संपत्ति का मूल्यांकन अपनी मर्जी से कर दिया और होटल की जमीन को केवल 45 रुपए वर्ग फीट का माना।
आरोपियों को गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के आदेश
कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की जांच के दौरान 193 करोड़ 28 लाख रुपए तथा संपत्ति की कीमत 58 करोड़ आ गई थी। इस प्रकार होटल की कुल कीमत 252 करोड़ रुपए थी। उसका केवल 7 करोड़ 52 लाख रुपए में ही बेचा गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी व सचिव प्रदीप बैजिल ने अपने पदों का दुरुपयोग किया है तथा केंद्र सरकार को 244 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने पूर्व मंत्री शौरी, बैजिल, आशीष गुहा, कांतिलाल कर्मसे व ज्योत्सना शूरी के विरूद्ध धारा 120 बी आईपीसी की धारा 12 (1) (डी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 का अपराध बनना पाया जाता है। कोर्ट ने इनके खिलाफ फौजदारी प्रकरण दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने होटल को कुर्क कर राज्य सरकार के अधीन करने के भी आदेश दिए हैं। कुर्क संपत्ति की व्यवस्था के लिए कलेक्टर उदयपुर को रिसीवर नियुक्त किया गया।

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