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हौसलों को बनाया श्रवण शक्ति:जन्म से सिर्फ 30% सुनाई देता तो हौसलों को बनाया श्रवण शक्ति, 17वीं बार में परीक्षा पास कर आरएएस बने

जोधपुरएक महीने पहलेलेखक: मनीष बोहरा
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हिमांशु कच्छवाहा। - Dainik Bhaskar
हिमांशु कच्छवाहा।

कलेक्ट्रेट में नायब तहसीलदार हिमांशु कच्छवाहा (43)। इस पद पर पहुंचने के सफर में कम सुनाई देने की जन्मजात बीमारी और 16 बार परीक्षाा में असफलता को कभी आड़े नहीं आने दिया। कई परेशानियां आईं, रीजेक्शन झेला, पर हिम्मत नहीं टूटने दी। कम सुनाई देने की समस्या से उबरने को कानों में मशीन लगा ली। इसके बावजूद भी दिक्कत आती है तो सोशल मीडिया के जरिए समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते हैं। जन्म से ही हिमांशु के दोनों कान में सुनने की क्षमता बहुत कम थी जो अब बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई है। क्लास में जब सुनकर समझ नहीं आता तो कभी दोस्तों की कॉपी लेकर तो कभी नोट्स पढ़कर तैयारी करते। कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं। आरएएस और आईएएस की परीक्षा भी 16 बार दी, लेकिन इंटरव्यू में रह जाते थे। काफी संघर्ष के बाद इसमें भी सफलता मिली। अब दोनों कान में मशीन लगाकर सरकारी काम तो दस्तावेज से हो जाते हैं।

अगर कोई आमजन या फरियादी अपनी बात लेकर आता है तो उससे सोशल मीडिया के माध्यम से बातचीत करते हैं। इसी माध्यम से जवाब देना, पूछना और अन्य संवाद पूरा करते हैं। इस तरीके से आमजन को बिना चक्कर कटवाए उनके काम को पूरा कर लेते हैं। हिमांशु को बचपन से ही कई दिक्कतें आईं। बचपन में स्कूल में बोर्ड पर लिखा तो पढ़ लेते, लेकिन टीचर कुछ बोलते तो समझने में समस्या आती। इस पर वे पास बैठे या पीछे बैठे दोस्तों की कॉपी में देखकर लिखते। ऐसा करते कई बार गर्दन और कमर में दर्द होता, लेकिन इसकी वे परवाह नहीं करते। कॉलेज में ज्यादा परेशानी नहीं आई। 2016 में उनसे आरएएस एग्जाम के इंटरव्यू में सवाल पूछा गया कि ऐसा कौन सा शासक था, जो भारत पर बार-बार आक्रमण करता रहा, जब तक उसे सफलता मिली? इस पर मैंने कहा कि मोहम्मद गजनवी, जिन्होंने 17 बार आक्रमण कर सफलता प्राप्त की थी। इसके आगे भी हिमांशु रुके नहीं। वे बोले कि मैं भी अब तक 8 बार आईएएस और 8 बार आरएएस की परीक्षा दि थी। जवाब सुनकर आरपीएससी बोर्ड के सदस्य भी हैरान रह गए। हालांकि इस इंटरव्यू में वे सफल होकर आरएएस बने।

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