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  • If The CM Could Not Meet The People During The Period, Asked To Write The Problems, Out Of 201 Complaints From Jodhpur, 65 Percent Pending

राइट टू सीएम:काेराेनाकाल में सीएम लोगों से मिल नहीं पाए ताे समस्याएं लिखने को कहा, जोधपुर से गई 201 फरियाद में से 65 फीसदी पेंडिंग

जोधपुर9 दिन पहलेलेखक: प्रवीण धींगरा
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जोधपुर के 201 लोगों ने इस जरिए से अपनी बात, परिवेदना, जरूरत व विकास की दरकार मुख्यमंत्री तक पहुंचाई। - Dainik Bhaskar
जोधपुर के 201 लोगों ने इस जरिए से अपनी बात, परिवेदना, जरूरत व विकास की दरकार मुख्यमंत्री तक पहुंचाई।
  • अब प्रशासन ने अफसरों को लिखा- सीएम की भेजी समस्याएं तो सुलझा दो

कोरोना संक्रमण ने सरकार के आमजन से रूबरू होने के रास्ते बंद कर दिए तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोगों के लिए ई-प्लेटफार्म के द्वार खोले। उन्होंने संपर्क पोर्टल पर ‘राइट टू सीएम’ की विंडो की सुविधा देकर कहा कि, कोई समस्या व शिकायत हो तो समाधान के लिए सीधे मुझे लिखें। जोधपुर के 201 लोगों ने इस जरिए से अपनी बात, परिवेदना, जरूरत व विकास की दरकार मुख्यमंत्री तक पहुंचाई। फिर मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने गृह जिले के अधिकारियों को इस आस के साथ भेजी कि वे लोगों को राहत देंगे, लेकिन हुआ इसका उल्टा।

जिले से गई परिवेदनाओं में से 65 फीसदी अभी तक पेंडिंग हैं। इनमें से 92 तो ऐसी हैं, जिन पर अधिकारियों ने पिछले 6 माह से ध्यान तक नहीं दिया। अब जिला प्रशासन विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों को स्मरण पत्र भेज याद दिलाया है कि इन समस्याओं समाधान की दरकार है।

दरअसल, बीते साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ज्यादा भयावह रही तो मुख्यमंत्री गहलोत ने भी जनसुनवाई और लोगों से मुलाकात जैसी गतिविधियां बंद कर दी। वैसे तो प्रशासन और सरकार तक अपनी बात व समस्या पहुंचाने के कई रास्ते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने कोरोना काल में लोगों की बात सुनने, उनकी पीड़ा जानने और उनके काम करवाने के लिए नई सुविधा शुरू की।

मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि वे उन्हें लिखे, इसके लिए संपर्क पोर्टल पर राइट टू सीएम की विंडो दी गई। वहां लिखी गई हर बात मेल के माध्यम से सीधे सीएम के पास पहुंची भी। फिर आमजन की जो भी बात जिस विभाग से जुड़ी थी, वह उस विभाग को भेज दी गई।

सबसे नाकारा जेडीए, 29 में से 26 काम नहीं किए

सर्वाधिक लंबित मामले जेडीए में हैं। इनसे जुड़े 29 मामले भेजे गए थे, जिनमें से 26 अब भी लंबित हैं और 16 को तो 6 माह से ज्यादा हो गए। केवल जेएनवीयू ही एकमात्र ऐसी संस्था है, जिसका केवल एक मामला लंबित है। अब प्रभारी अधिकारी संपर्क पोर्टल व अपर जिला कलेक्टर द्वितीय मुकेश कुमार इन विभागों को स्मरण पत्र भेज कर याद दिला रहे हैं कि इन्हें गंभीरता से लिया जाए।

भास्कर पड़ताल : जेडीए ने ताे एकल खिड़की की 2,328 में से 1,380 गुहार भी अनसुनी की

जेडीए की एकल खिड़की प्रकरणों की बैलेंसशीट
जेडीए की एकल खिड़की प्रकरणों की बैलेंसशीट

‘राइट टू सीएम’ व्यवस्था में फिसड्डी साबित हुआ जेडीए अपनी एकल खिड़की पर आने वाली समस्याएं भी नहीं सुन रहा। वहां पिछले साढ़े सात माह में आए 2,328 आवेदनों में से 1,380 प्रकरण अब तक लंबित हैं। इनमें से 1091 प्रकरण तो समय सीमा केे बाद भी पेंडिंग हैं। जेडीए अनलॉक-4 के बाद भी आमलोगों के लिए सिर्फ दो घंटे सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक ही खुल रहा है। जिसे लेकर भास्कर ने 14 जुलाई के अंक में ही ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

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