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सिविल सेवा:युवा बड़े सपने देख आत्मविश्वास बनाए रखें तो सफलता जरूर मिलेगी: मूमल

जोधपुर2 महीने पहले
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  • आईएफएस की बेटी मूमल की 171वीं रैंक, पहली बार में सफल नहीं होने पर भी जुनून नहीं छोड़ा, जोधपुर से 3 युवा चयनित

भारतीय प्रशासनिक सेवा के परिणाम मंगलवार को घोषित किए गए। इसमें जोधपुर के तीन युवाओं ने जगह बनाई। जोधपुर की मूमल राजपुरोहित ने आईएएस में 171वीं, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. राजेंद्रराज ने 340वीं और आईआईटीयन रेहान खत्री ने 573वीं रैंक हासिल की। आईएएस में 171वीं रैंक हासिल करने वाली मूमल आईएफएस अधिकारी जब्बरसिंह की पुत्री हैं। मूमल का कहना है कि सफलता के लिए लगातार मेहनत जरूरी है।

यदि असफलता हासिल करने के बाद हिम्मत हार जाएं तो कभी सफलता हाथ नहीं लगती। युवा बड़े सपने देखें और आत्मविश्वास बनाएं रखें तो सफलता जरूर मिलेगी। मूमल ने वर्ष 2015 में आईएएस की तैयारी शुरू की थी। पहले प्रयास में वे असफल रहीं, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं छोड़ा और परिजनों ने भी उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। यही कारण है कि उन्होंने सफलता हासिल की। मूमल मूल रूप से पाली जिले के आउवा गांव की रहने वाली हैं।

स्कूली शिक्षा जोधपुर की राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स स्कूल और डीपीएस से पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के इंद्रप्रस्थ महिला कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। वे ग्रेजुएशन में राजनीति विज्ञान में गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। मूमल ने जेएनयू से पीजी की।

वे पिता जब्बरसिंह राजपुरोहित, मां रेखा के अलावा चाचा डीटीओ सुरेंद्रसिंह राजपुरोहित को अपनी सफलता का श्रेय देती हैं। उनकी बचपन से आईएएस अधिकारी बनने की तमन्ना थी, जो अब पूरी होगी। उनका लक्ष्य है कि वे महिला शिक्षा के लिए कार्य करें, ताकि उनकी तरह अन्य बेटियां भी पढ़-लिखकर देश का नाम रोशन कर सकें।

राजेंद्रराज ने दोस्त के साथ एमबीबीएस एमडी की, दोनों एकसाथ आईएएस बने
बालोतरा के पास बुड़ीवाडा गांव निवासी डॉ. राजेंद्रराज ने आईएएस परीक्षा में 340वीं रैंक हासिल की। स्कूली शिक्षा बालोतरा के नवोदय स्कूल व बनारस हिंदू विवि से एमबीबीएस व रेडियोलॉजी में एमडी की। वर्तमान में वे डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के एमडीएमएच में रेडियोलॉजी विभाग में सीनियर रेजिडेंट हैं।

उनका कहना है कि एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान दोस्त धीरज कुमार सिंह व उन्हाेंने तय किया था कि वे आईएएस बनेंगे। एमबीबीएस में पहली रैंक धीरज की तो दूसरी राजेंद्रराज की थी। एमडी की पढ़ाई भी साथ-साथ की। दोनों का आईएएस में सलेक्शन भी इस बार एकसाथ हुआ है। डॉ. राजेंद्रराज के पिता गहराराम टीचर और मां प्रमिला देवी किसान हैं। युवाओं के लिए उनका संदेश है कि आप जो भी कार्य करें, दिल से करें।

रिलायंस की जॉब छोड़ आईएएस तैयारी में जुटे रेहान, 573वीं रैंक
दिल्ली आईआईटीयन रेहान खत्री ने आईएएस परीक्षा में 573वीं रैंक हासिल की। रिलायंस कंपनी में बड़े पैकेज पर काम करने के बाद रेहान ने तय किया कि वे आईएएस की तैयारी करेंगे। दिल्ली में रहकर ऑनलाइन सेल्फ स्टडी की। रेहान का कहना है कि आप मेहनती हैं तो पढ़ने के लिए किसी इंस्टीट्यूट की जरूरत नहीं।

ऑनलाइन और लाइब्रेरी की मदद से अाप सफलता हासिल कर सकते हैं। आईआईटी दिल्ली से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और स्नातकोत्तर करने के बाद रेहान ने रिलायंस में जॉब किया। फिर आईएएस का निर्णय लिया तो दिल्ली में एक लाइब्रेरी में सुबह 8 से रात 8 बजे तक पढ़ाई की। रेहान के पिता डॉ. पवन खत्री एमडीएम अस्पताल में उप अधीक्षक हैं और माता संतोष डाकघर में पोस्टल असिस्टेंट हैं।

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