पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

म्यूजिक:जा रहा हूं मैं अलविदा, तुम मिलकर रहाे...

जोधपुर3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • रवींद्र म्यूजिक की यह रचना हाल ही में जोधपुर में हुई कंपोज

हरी-भरी वादियों में पक्षियों का कलरव, बहते झरनों का प्रवाह और खिलते फूलों में भंवरों की गुंजन का अहसास है रविंद्रनाथ टैगोर का रविंद्र संगीत। कंपोजर और संगीतकार सिद्धार्थ दीक्षित ने अपनी परदादी से गुरुदेव टैगोर की अंतिम रचना को सुना और लाइब्रेरी में स्टडी किया। उसके बाद टैगोर के प्रसिद्ध संगीत का सपोर्ट लेकर बेसिक सुरों में इसे कंपोज किया।

विकास चांडक ने बताया, राजस्थान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए जब इस वर्ष के टैलेंट को तलाशा जा रहा था तो मैं इंदौर के सिद्धार्थ दीक्षित से मिला। मैंने इन्हें जोधपुर बुलाकर इस नई रचना को हाल ही में लॉन्च कराया है। यह गीत रविंद्रनाथ टैगोर की अंतिम रचना के रूप में सामने आया और इसे रविंद्र म्यूजिक के अंदाज में सिर्फ हल्के मंजीरों और की बोर्ड के सपोर्ट से तैयार किया गया।

गीत के शब्द अनूठे हैं इसलिए हल्का म्यूजिक दिया

सिंगर-कंपोजर दीक्षित ने बताया, यह रविंद्र म्यूजिक के अंदाज का गीत है जिसे बॉलीवुड भी पसंद कर रहा है। रविंद्र म्यूजिक कम सुरों और प्रकृति की गहराई से लबरेज होता था इसलिए इसे भी इसी तरह कंपोज किया गया है। रविंद्रनाथ टैगोर का कहना था कि म्यूजिक वह है जो सुकून दे और दिल को सहलाए।

आज के म्यूजिक में शोर से दूरी बनाने और युवाओं को बुरी लत से दूर करने के लिए इस दौर में इसे हल्के म्यूजिक के साथ कंपोज किया गया। दूसरी वजह यह भी थी कि इस म्यूजिक से कोराना के निराशाजनक माहौल से परेशान युवाओं को कुछ सुकून मिल सके। रविंद्र नाथ टैगोर ने इस गीत के जरिए प्रकृति के नजदीक रहने, मीठा बोलने और मिलकर रहने का संदेश दिया जो आज के कोरोना काल में सही साबित हो रहा है।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज व्यक्तिगत तथा पारिवारिक गतिविधियों के प्रति ज्यादा ध्यान केंद्रित रहेगा। इस समय ग्रह स्थितियां आपके लिए बेहतरीन परिस्थितियां बना रही हैं। आपको अपनी प्रतिभा व योग्यता को साबित करने का अवसर ...

और पढ़ें