मदद की दरकार:5 साल की बच्ची में अतिरिक्त आंत बड़ी हो फेफड़ों तक पहुंची, ऑपरेशन कर निकाली

जोधपुर3 महीने पहले
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एमडीएमएच में जटिल सर्जरी के बाद बच्ची स्वस्थ। - Dainik Bhaskar
एमडीएमएच में जटिल सर्जरी के बाद बच्ची स्वस्थ।

एमडीएम अस्पताल में ओसियां निवासी पांच साल की बच्ची के पेट में अतिरिक्त आंत और फेफड़ों में गांठ का जटिल ऑपरेशन कर राहत दी। बच्ची सांस में तकलीफ के चलते एमडीएमएच में दिखाने आई थी। जांच में सामने आया कि बच्ची के पेट में सामान्य आंत से पांच गुणा लंबी अतिरिक्त आंत बन गई है, जो छाती के ऊपर तक चली गई है। ऐसे में इसे ऑपरेशन कर अलग नहीं किया गया तो इसके कैंसर बनने की संभावना है।

ऑपरेशन करने वाले कार्डियोथोरेसिक विभाग के सर्जन डॉ. सुभाष बलारा ने बताया कि मरीज को हमारे विभाग में एक पीडियाट्रिशियन ने रेफर किया था। एक्सरे में पता चला कि दायीं तरफ न्यूसोथोरेकस है और दायां फेफड़ा सिकुड़ गया है। इस पर छाती के दांयीं तरफ से केविटी में आईसीटीडी डालकर हवा निकालने का प्रयास किया, लेकिन ब्लड आना शुरू हो गया।

फिर चेस्ट ट्यूब डालकर फेफड़ों का सीटी स्कैन कराया, जिसमें पता चला कि फेफड़ों के एक भाग में गांठ है, जिसने दायीं छाती का आधे से ज्यादा हिस्सा घेरा हुआ है। यह गंभीर इसलिए था कि उसमें पेट से आंत निकलकर डायफ्राम के रास्ते छाती में जगह बनाई हुई है। इसे मेडिकल भाषा में डायफ्राम हर्निया कहते हैं। फिर ऑपरेशन कर करीब 15 सेमी की गांठ को अलग किया। अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और खाना-पीना आदि सामान्य तरीके से कर रही है।

इसलिए जटिल था ऑपरेशन

बच्चे के जन्म से डायफ्राम हर्निया के मामले एक लाख में 20 केस में होता है और उसमें भी बायीं तरफ 85 प्रतिशत और दायीं तरफ 15 प्रतिशत ही होते हैं। वहीं आंतों की अतिरिक्त सिस्ट 25 हजार में एक में ही होती है। अतिरिक्त आंत के बड़ी होकर फेफड़ों तक पहुंचने का यह संभवत: पहला मामला है।

इन्होंने किया ऑपरेशन

कार्डियोथोरेसिक विभाग के सर्जन डॉ. बलारा, सर्जरी विभाग के डॉ. अवधेश शर्मा और डॉ. विवेक राजदान ने ऑपरेशन किया। इसमें निश्चेतना विभाग के डॉ. राकेश कर्नावट, डाॅ. चंद्रा खत्री व डॉ. शिल्पी राडा और नर्सिंग स्टाफ संगीता व लीला ने सहयोग किया।

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