जोधपुर पोलो टूर्नामेंट का सबसे कम उम्र का खिलाड़ी:महाराणा प्रताप और उनके घोड़े के किस्से सुनकर घुड़सवारी की ठानी, 7वीं क्लास में थामी लगाम

जोधपुरएक महीने पहलेलेखक: पूर्णिमा बोहरा

जोधपुर में 22वें पोलो सीजन का रोमांच शुरू हो चुका है। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा चर्चा है 16 साल के पोलो खिलाड़ी भंवर कीर्ति देव चंदेल की। वे जोधपुर पोलो में खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। मेयो कॉलेज अजमेर में 11वीं क्लास में पढ़ाई कर रहे चंदेल उत्तर प्रदेश के पूर्व माहोबा राजघराने से ताल्लुक रखते हैं।

कीर्ति के पिता कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से भाजपा सांसद हैं और मां दिपाली चंदेल सामाजिक कार्यों में रुची रखती हैं। महाराजा गजसिंह स्पोर्ट्स फाउंडेशन पोलो मैदान में मेयो टीम से खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी कीर्ति चंदेल ने भास्कर से बातचीत की। कीर्ति बताते हैं बचपन से महाराणा प्रताप व उनके घोड़े चेतक के किस्से सुने थे, तभी से घुड़सवारी की ठान ली थी। उन्होंने बताया कि सातवीं कक्षा से घुड़सवारी सीखी। फिर कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और 50 से अधिक मेडल जीते हैं।

मेयो कॉलेज में ट्रॉफी लेते कीर्ति चंदेल।
मेयो कॉलेज में ट्रॉफी लेते कीर्ति चंदेल।

पोलो की ट्रेनिंग कीर्ति ने मेयो कॉलेज में ही ली। जोधपुर पोलो टूर्नामेंट खेलने के लिए उन्होंने 6 महीने तैयारी की। उन्होंने बताया कि कोच बजरंग सर ने काफी ट्रेंड किया है। यहां उन्हें बशीर अली जैसे बड़े खिलाड़ियों के साथ खेलेने का मौका मिला है। यह अनुभव बहुत ही अच्छा रहा। चंदेल ने बताया कि वह जोधपुर पोलो से काफी प्रभावित हैं। जिस तरह पूर्व महाराजा गजसिंह पोलो के लिए समर्पित थे, वह उनके लिए प्रेरणा है।

घोड़ा भी बन जाता है प्लेयर
चंदेल बताते हैं कि खेल के समय एक पल ऐसा आता है कि घोड़ा दौड रहा होता है और स्पीड में होता है, उस समय यह पता चलता नहीं कि घोड़ा कहां है और खिलाड़ी कहां। दोनों मिलकर प्लेयर बन जाते हैं। प्लेयर नम्बर वन, प्लेयर नम्बर 2 के नाम से जाने जाते हैं। इस रोमांच की अलग ही बात होती है। यह रोमांच मिलने के बाद पोलो छोड़ने का कोई सोचता नहीं।

कीर्ति 7वीं में थे, जब उन्होंने घुड़सवारी करना सीखा।
कीर्ति 7वीं में थे, जब उन्होंने घुड़सवारी करना सीखा।

कोच बजरंग सिंह बताते हैं कीर्ति के टेलेंट को आगे बढ़ाने के लिए रोजाना पढ़ाई के साथ-साथ सुबह-शाम मिलाकर एक घंटा घुड़सवारी के लिए मिलता है। थेरो ब्रीड के घोड़े से कीर्ति की अच्छी दोस्ती है।

बेटे का मैच देखने आई मां दीपाली सिंह चंदेल ने बताया कि पहली बार बड़े टूर्नामेंट में बेटे को खेलते देखा है। उन्होंने बताया कि कीर्ति बचपन से ही घोड़ों के प्रति ज्यादा रुचि रखता था। उन्होंने कहा कि बेटे को खेलता देख गर्व महसूस करती हूं।

अपने दादा और भाई के साथ कीर्ति देव चंदेल।
अपने दादा और भाई के साथ कीर्ति देव चंदेल।

टूर्नामेंट में पहले दिन 6 नवंबर को कीर्ति ने मेयो टीम की तरफ से एरिना पोलो (इंडोर पोलो) खेला। उनकी टीम ने 2 गोल के मैच में शानदार जीत हासिल की है। अब उनका फाइनल ऐरिना मैच बुधवार को उम्मेद भवन टीम से है।