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हाईकोर्ट से नोटिस जारी:जिस मामले में सीएमएचओ डॉ. मंडा निजी पक्षकार, उसी में चिकित्सा विभाग ने बनाया ओआईसी

जोधपुर24 दिन पहले
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यूटीबी के आधार पर नर्सिंगकर्मियों की भर्ती में गड़बड़ी को लेकर सीएमएचओ डॉ. बलवंत मंडा को हाईकोर्ट ने निजी पक्षकार में नोटिस जारी किए, चिकित्सा विभाग ने राजकीय अधिवक्ता को असिस्ट करने व कोर्ट में पक्ष रखने के लिए उन्हें ही ओआईसी बना दिया। जानकारों का कहना है कि यह नैतिकता के आधार पर ठीक नहीं है। वे कुछ पक्ष या तथ्य छिपा सकते हैं।

याचिकाकर्ता मनीष कुमार परमार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट के ध्यान में लाया कि विज्ञापन में नर्सिंगकर्मी के 50 पद विज्ञापित किए गए थे, लेकिन सीएमएचओ डॉ. मंडा ने 100 जनों की चयन सूची तैयार कर दी। इसमें मेरिट की भी अनदेखी हुई। याचिका में डॉ. मंडा को निजी पक्षकार भी बनाया गया।

कोर्ट ने अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ बतौर निजी पक्षकार नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया। साथ ही कहा कि तब तक चयन सूची में से कोई नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए जाएं। नियुक्ति आदेश जारी कर दिए हैं तो नियुक्त अभ्यर्थियों को जॉइन नहीं करवाएं।

इस मामले में बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई है, उसमें राजकीय अधिवक्ता को सहयोग करने तथा इस मामले से जुड़े तथ्य व पत्रावली आदि मुहैया कराने के लिए डॉ. मंडा को ओआईसी बनाया गया है, जबकि वे खुद इसमें निजी पक्षकार हैं। ऐसे में चिकित्सा विभाग की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि वैसे तो ओआईसी बनाने में कोई रूल नहीं है, लेकिन कोई अफसर किसी मामले में निजी पक्षकार है तो नैतिकता के आधार पर उसे ओआईसी नहीं बनाया जाना चाहिए।

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