पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

होली का त्योहार:कोरोना के कारण फीके पड़े माहौल में जोश से लबरेज लोगों ने भरा खुशियों का रंग

जोधपुर3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
अधिकांश लोग रंगों के बजाय सिर्फ गुलाल से ही होली खेलने को तवज्जो प्रदान कर रहे हैं। - Dainik Bhaskar
अधिकांश लोग रंगों के बजाय सिर्फ गुलाल से ही होली खेलने को तवज्जो प्रदान कर रहे हैं।
  • जोधपुर में हर तरफ नजर आ रहा है होली का माहौल

जोधपुर क्षेत्र में रंगों का पर्व होली हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मौसम भी इस बार लोगों की खुशियों में सहयोग प्रदान कर रहा है। इस बार होली पर गर्मी रहने के कारण लोग आराम से होली खेल रहे हैं। वहीं कोरोना के कारण फीके पड़े माहौल में जोश से लबरेज लोगों ने भरा खुशियों का रंग भरना शुरू कर दिया है। अलबत्ता कोरोना के कारण पुलिस की सख्ती के चलते सड़कों पर माहौल फीका नजर आ रहा है, लेकिन गली-मोहल्लों में लोग जोश से लबरेज होकर एक-दूसरे के रंग लगा खुशी मना रहे हैं।

शहर में आज सुबह से हर तरफ रंगों से सराबोर लोग नजर आ रहे हैं। कुछ स्थान पर लोग छोटे-छोटे समूह में होली के परम्परागत गीत गाते हुए चंग की थाप पर थिरक रहे हैं। वहीं एक-दूसरे के रंग लगा गले मिल होली की शुभकामनाएं दे रहे हैं। हर तरफ खुशियों के रंग नजर आ रहे हैं। हालांकि कोरोना ने इन खुशियों को ग्रहण लगाने का प्रयास अवश्य किया, लेकिन लोगों का जोश कोरोना पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। चारों तरफ रंगों की फुहारें नजर आ रही है। अधिकांश लोग रंगों के बजाय सिर्फ गुलाल से ही होली खेलने को तवज्जो प्रदान कर रहे हैं।

इस कारण मनाते हैं होली

राग-रंग का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है। राग अर्थात संगीत और रंग तो इसके प्रमुख अंग हैं ही पर इनको उत्कर्ष तक पहुंचाने वाली प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे यौवन के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। होली का त्यौहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूं की बालियां इठलाने लगती हैं। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियां भूलकर ढोलक-चंग-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। चारों तरफ़ रंगों की फुहार फूट पड़ती है।