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  • In The Matter Of Constitutional Validity Of The New Parole Rules Of Prisoners, A Reply Has Been Called From The State Government

नये पैरोल नियमों का मामला:बंदियों के नये पैरोल नियमों की संवैधानिक वैधता के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब, 21 अक्टूबर को होगी सुनवाई

जोधपुर2 दिन पहले
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राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस संदीप मेहता और रामेश्वर व्यास की बेंच ने बुधवार को बंदियों के नये पैरोल नियमों की संवैधानिक वैधता के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया। हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी की पैरोल नए नियमों के तहत अस्वीकार होने पर उसकी ओर से वकील ने नए नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए याचिका दायर की इस याचिका पर सुनवाई के दौरान बेंच ने सरकार से जवाब तलब किया है।

यह है मामला

कुडी हाउसिंग बोर्ड इंदिरा कॉलानी निवासी अर्जुन सिंह हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इस बंदी का पैरोल प्रकरण जिला कलेक्टर, जोधपुर की पैरोल समिति ने अस्वीकार कर दिया। कारण बताया गया कि बंदी ने वर्तमान में पैरोल के लिए प्रभावशील नियम राजस्थान बंदी पैरोल रिहाई नियम, 2021 के अनुसार अपात्र है। बंदी के अधिवक्ता कालू राम भाटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पैरोल के नये नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए बेंच से निवेदन किया कि बंदी के पैरोल प्रकरण पर 1/4 सजा के बाद पैरोल को स्वीकार किया जाना चाहिए।

जबकि नये नियम के अनुसार मूल सजा का आधा भाग पूर्ण होने पर ही पात्र होने की शर्त प्राकृतिक न्याय के विरूद्ध है। अन्य राज्यों में इस तरह के नियम नहीं हैं। इसलिए पूर्व के नियमों अनुसार 1/4 पैरोल नियम के तहत ही पैरोल मंजूर के नए नियम की आधी सजा की शर्त को खारिज किया जाए। जिस पर बेंच ने राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता फर्जंद अली एवं उनके सहायक अधिवक्ता अभिषेक पुरोहित को राज्य सरकार की तरफ से नोटिस जारी कर राज्य सरकार से जवाब तलब कर आगामी सुनवाई 21 अक्टूबर को नियत की है।

यह है नया नियम

पैरोल के नये नियम 16 के तहत आजीवन कारावास के बंदी जिनकी 20 वर्ष की सजा में से आधी सजा 10 वर्ष भुगतने पर प्रथम पैरोल के लिये पात्र होगा एवं वे अपराध जिनकी सजा 7 वर्ष से भी अधिक है उनकी भी मूल सजा में से आधी सजा पूर्ण होने पर पैरोल के लिये योग्य होगा। पैरोल के पुराने नियम 1958 के अनुसार मूल सजा का 1/4 भाग भुगतने पर पैरोल के योग्य माना जाता था जिसमें आजीवन सजा 20 वर्ष का 5 वर्ष की सजा भुगतने पर एवं अन्य अपराध की मूल सजा का 1/4 सजा भुगतने पर पैरोल के लिये पात्र था जिसे नये नियम में बदलकर आधी सजा कर दी गइ।

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