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जीएसटी का पेच:बकाया से ज्यादा जमा है इनपुट टैक्स क्रेडिट, पर प्रावधान ऐसे कि व्यापारियों को भरना होगा पूरा टैक्स

जोधपुर2 महीने पहले
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  • असली करदाताओं को माफी का लाभ मिलने की जगह नुकसान की गुंजाइश ज्यादा

जीएसटी में सरकार ने व्यापारियों को लेट फीस माफ करते हुए बड़ी राहत तो दे दी है, लेकिन जीएसटी कानून के एक सेक्शन के प्रावधान के कारण वे इसका फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। बकाया टैक्स की तुलना में ज्यादा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पड़ी होने और लेट फीस में माफी के बावजूद उसे क्लेम नहीं कर पा रहे हैं। सरकार द्वारा हाल में जुलाई 2017 से जनवरी 2020 तक जीएसटीआर-3बी नहीं भरने वाले व्यापारियों को 30 सितंबर तक बाकी रिटर्न भरने पर लेट फीस में राहत दी थी।

इसमें शून्य टैक्स वालों पर कोई लेट फीस नहीं और अन्य के लिए भी लेट फीस की राशि अधिकतम 500 रुपए की गई है। इस राहत का फायदा ज्यादातर नील रिटर्न वाले व्यापारियों को ही होने की संभावना है। यानी ऐसे व्यापारी, जो बकाया टैक्स को पुरानी आईटीसी के क्लेम से समायोजित करना चाहते हैं, उसमें जीएसटी के सेक्शन 16(4) के प्रावधानों में कोई राहत नहीं दी गई है।

जीएसटी के एक्सपर्ट सीए डॉ. अर्पित हल्दिया के अनुसार जीएसटी के इस सेक्शन के तहत व्यापारी वर्ष 2017-18 के लिए आईटीसी 23 अप्रैल 2019 तक और 2018-19 की क्रेडिट 20 अक्टूबर 2019 तक भरे हुए जीएसटीआर-3बी में क्लेम कर सकते थे। इसके बाद रिटर्न भरने वाले उस आईटीसी का क्लेम नहीं कर सकते।

जाे पुराने रिटर्न भरने से चूके, उन पर दोहरी मार
सीए हल्दिया के अनुसार यदि कोई व्यापारी 2017-18 या 2018-19 का रिटर्न अभी तक नहीं भर पाए हैं, उन पर लगने वाली लेट फीस को तो सरकार ने माफ कर दिया है, लेकिन वे व्यापारी उन संबंधित वित्तीय वर्ष की आईटीसी क्लेम नहीं कर सकता, क्योंकि उस आईटीसी को क्लेम करने की अंतिम तिथि निकल चुकी है।

उदाहरण के लिए यदि किसी व्यापारी के वर्ष 2017-18 की आउटपुट टैक्स लाइबिलिटी 9 लाख रुपए है और उस वर्ष की आईटीसी 10 लाख रुपए है। सामान्य परिस्थितियों में तो उस व्यापारी के पास बकाया टैक्स का समायोजन करने के बाद भी एक लाख की अतिरिक्त आईटीसी बचती है।

यदि यही व्यापारी वर्ष 2017-18 का रिटर्न अब यानी जुलाई 2020 में भरता है, तो सरकार द्वारा हाल में दी गई छूट के तहत 500 रुपए से ऊपर की लेट फीस माफ होगी, लेकिन सेक्टर 16(4) के प्रावधान में किसी तरह की राहत नहीं मिलेगी।

यानी बकाया टैक्स राशि नाै लाख रुपए जमा कराने ही होंगे, चाहे उस वर्ष की आईटीसी बैलेंस कितना भी क्यों न हो। इतना ही नहीं, सामान्य परिस्थितियों में रिटर्न भरने पर अतिरिक्त आईटीसी बैलेंस से बकाया टैक्स राशि पर ब्याज भी नहीं भरना पड़ता, लेकिन अब ब्याज भी पूरे नाै लाख पर भरना पड़ेगा। करीब हर व्यापारी का कोई न कोई आईटीसी क्लेम होता है, जो अभी रिटर्न भरने वालों को नहीं मिल पाएगा।

रिटर्न भरने से पहले आईटीसी क्लेम का मौका दे सरकार

जीएसटी के विशेषज्ञ डॉ. हल्दिया के अनुसार सरकार चाहे, तो इस बड़ी परेशानी का समाधान संभव है। लेट फीस माफ करके व्यापारियों को जिस तरह मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया गया है, उसी तरह, सेक्शन 16(4) के प्रावधान में एक उपयुक्त सुझाव यह भी हो सकता है कि सालाना रिटर्न भरने की तिथि तक आईटीसी क्लेम करने का मौका दे दिया जाए।

इसके बाद भी यदि कोई इससे चूकता है, तो वो आईटीसी लैप्स की जा सकती है। इसी तरह, सरकार ने गत दिनों लेट फीस में छूट का निर्णय किया, उसी तरह सालाना रिटर्न की लेट फीस को भी छूट के दायरे में लेकर टैक्स पेयर्स को अंतिम अवसर देना चाहिए।

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