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अमेरिका का रिसर्च जोधपुर बनाएगा गजेल डिवाइस:15 मिनट में पता चल जाएगा कि कोरोना है या नहीं, इसके सहित 3 बीमारियों का टेस्ट 100% एक्युरेसी के साथ होगा

जोधपुर8 महीने पहलेलेखक: शाना
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एक बार फिर कोविड पूरी दुनिया में बढ़ रहा है। इसका एक कारण यह भी है कि कोविड टेस्ट की रिपोर्ट 6 से 8 घंटे में मिल रही है और कई बार यह रिपोर्ट एक्यूरेट नहीं होती। अमेरिकी लैब के साथ मिलकर जोधपुर की कंपनी ने ऐसा डिवाइस तैयार किया है, जिससे 15 मिनट में कोविड टेस्ट की जांच रिपोर्ट मिल जाएगी। जोधपुर की जौहरी डिजिटल ने ऐसे सैंपल उपकरण बनाकर अमेरिका भिजवाए थे जिनकी जांच एक्युरेट और सही समय में मिली। अमेरिका में पोर्टलैंड की हैमेक्स कंपनी ने जौहरी डिजिटल कंपनी के साथ डिवाइस उत्पादन के लिए एमओयू साइन किया है।

जौहरी डिजीटल की सीईओ निशा जौहरी अमेरिकी लैब से एमओयू साइन करके जोधपुर लौटी हैं। उन्होंने बताया, यह हाई टेक्नोलॉजी है और चीन भी बना सकता था, लेकिन इसे कम कीमत में तैयार करना सबसे बड़ा चैलेंज है ताकि ज्यादातर लैब तक यह डिवाइस पहुंचाया जा सके। मीटिंग में इन चैलेेंज पर डिस्कस करने के बाद हमें इसके प्रोडक्शन का जिम्मा सौंपा गया। हमने इंजीनियर्स की टीम इस उपकरण की कीमत 40 फीसदी तक ले आए हैं।

जोधपुर का यह डिवाइस दो महीने में बाजार में आ जाएगा
आईएएस आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस डिवाइस गैज़ेल (Gazelle) को टेबल पर भी रख सकते हैं। यह डिवाइस डाइग्नोस्टिक लैब के लिए बनाया जा रहा है। यह डिवाइस कोविड, मलेरिया और बच्चों में तेजी से फैल रही सी सिकल बीमारी का पता लगा लेगा। इस मशीन के कैफेट में सैंपल डाला जाएगा और 15 मिनट में रिजल्ट मिल जाएगा। प्रोडक्शन कर रही जौहरी डिजीटल की सीईओ निशा जौहरी ने बताया- दो महीने में यह मशीन बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।

इसलिए जरूरी है डिवाइस- सिकल सेल एनीमिया से बढ़ रही है डेथ रेट
भारत और अफ्रीका सहित दुनिया के ट्राइबल एरिया में बच्चों में सिकल सेल एनीमिया तेजी से फैल रहा है। इस बीमारी में बच्चों के खून में सीकल सेल डवलप हो जाते हैं। दुनिया की जनसंख्या का 5% इस बीमारी से प्रभावित हो रहा है। हर साल 3 लाख बच्चे इस बीमारी से प्रभावित हैं और हजारों बच्चों की जान जा रही है। अधिकतर बीमारियां ट्राईबल और रूरल एरिया से शहरों में फैल जाती है, इसलिए इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह बीमारी भी धीरे-धीरे शहरों की ओर रुख नहीं करेगी। सैंपल की जांच रिपोर्ट जल्द मिलने से इलाज भी तुरंत शुरू हो सकेगा और बच्चों की जान बचाई जा सकेगी।

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