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  • Karenna Will Stop By Making Masks, Sanitize And Distance, But Oxygen Level Must Be More Than 90 Percent To Prevent Death, So You Have To Keep An Eye

भास्कर एनालिसिस:मास्क, सेनेटाइज और दूरी बनाने से काेराेना रुकेगा, लेकिन मौत रोकने के लिए ऑक्सीजन लेवल 90 फीसदी से ज्यादा होना जरूरी, इसलिए रखनी होगी नजर

जोधपुरएक महीने पहले
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  • कोरोना के साथ छुपा है हैप्पी हाइपोक्सिया, खड़े खड़े हो सकती है मौत, जोधपुर में 22% माैत इसी कारण हुई
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कोरोना का संक्रमण शहर में बढ़ता ही जा रहा है और मौतें भी थम नहीं रही हैं। जिला प्रशासन ज्यादा से ज्यादा सैंपलिंग कर संक्रमिताें की पहचान में जुटा है तो आम आदमी साेशल डिस्टेंसिंग, मॉस्क, सेनेटाइजर और हाथ धोने जैसेे उपायों से खुद को बचाने में जुटा है, लेकिन कोरोना के एक मेडिकल टर्म हैप्पी हाइपोक्सिया से सावधानी भी जरूरी है।

इससे शरीर में ऑक्सीजन का लेवल अचानक कम हो जाता है और मरीज को अस्पताल ले जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। कई बार ताे ऑक्सीजन लेवल इतना कम हाे जाता है कि व्यक्ति की खड़े-खड़े माैत हाे सकती है।

इसी कारण जहां प्रशासन और चिकित्सा विभाग गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के ऑक्सीजन लेवल की जांच में जुटा है, वहीं आम आदमी भी ऑक्सीमीटर से जांच कर इस खतरे को टाल सकता है। जोधपुर में हुई 65 मौत में से 14 केस ऐसे ही हैं।

अमेरिका में लोयोला विश्वविद्यालय शिकागो स्ट्रिच स्कूल ऑफ मेडिसिन में वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में पता चला है कि हैपी हाईपोक्सिया वाले मरीजों में कोरोना के लक्षण या तो बहुत ही कम महसूस होते हैं या शरीर में ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है। हालांकि सांस लेने में कठिनाई के कोई संकेत नहीं मिलते।

ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाने में ऑक्सीमीटर से नजर रखना ही सबसे बेहतर उपाय है। उसी तरह जैसे लोग शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को जांचने के लिए घर पर मीटर रखते हैं, वैसे ही ऑक्सीमीटर भी कोरोना से लड़ने के लिए जरूरी हो गया है। शहर में प्रशासन की ओर से किए गए सर्वे के मुताबिक करीब सवा लाख लोग हाई रिस्क की श्रेणी में चिह्नित हैं।

दिन में 2 बार ऑक्सीजन लेवल की जांच करें
इस मीटर को घर में रखकर दिन में दो बार स्वयं जांच की जा सकती है। चिकित्सकों के मुताबिक शरीर में 90 प्रतिशत से अधिक ऑक्सीजन लेवल होना चाहिए। जब यह इससे कम होने लगता है तो जान का जोखिम बन आता है। इसकी जांच स्वयं ऑक्सीमीटर से दिन में दो बार की जा सकती है। नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र, बीएलओ अाैर एएनएम से कहकर भी हाई रिस्क के मरीजों की जांच समय-समय पर करवाई जा सकती है।

जानलेवा...क्योंकि साइलेंट जान लेता है

सामान्य मरीज में ऑक्सीजन का स्तर 97-99 तक होता है। कोरोना वायरस के इंफेक्शन के कारण व्यक्ति के फेफड़ों में सूजन और खून की सबसे छोटी नसों में ब्लॉकेज होने लगता है, जिसके चलते मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इसके चलते शरीर के विभिन्न भागों में ऑक्सीजन कम हाेने से अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते है।

यदि मरीज को कोरोना के साथ दूसरी बीमारी है तो ज्यादा परेशानी होती है। सामान्य की तुलना में यह कोविड मरीज में साइलेंट अटैक भी करता है। तय मानक से कम स्तर पर ऑक्सीजन होने के बावजूद उसे परेशानी नहीं होती, लेकिन वह जानलेवा हो जाता है। वह इसलिए कि ऑक्सीजन का लेवल 60 फीसदी होने के बाद मृत्यु की संभावना ज्यादा रहती है, साधारण रूप से 70 फीसदी की स्थिति में तुरंत वेंटिलेटर के सपोर्ट की जरूरत होती है।

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