भदवासिया फल सब्जी मंडी:मंडी की अध्यक्ष अनु कटारिया और सदस्यों ने मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री को पत्र लिख चालू करने की मांग की

जोधपुर3 महीने पहले
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मंडी में विश्रामगृह खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। - Dainik Bhaskar
मंडी में विश्रामगृह खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
  • लोकार्पण के 8 माह बाद भी किसान विश्रामगृह बंद

सावित्री बाई फुले फल सब्जी उपज मंडी भदवासिया में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लोकार्पण करने के 8 महीने बाद में भी श्रमिक विश्रामगृह, किसान विश्रामगृह के ताले नहीं खोले जा रहे हैं। इसके चलते मंडी में सब्जी, फ्रूट लेकर आने वाले किसानों व श्रमिकों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। श्रमिकों और किसानों को मजबूरी में महंगे दामों में दूसरी जगह पर रुकना पड़ रहा है। खास बात यह है कि लाखों रुपए की लागत से किसानों व श्रमिकों के लिए बनाई कैंटीन को भी मंडी प्रशासन ने शुरू नहीं किया है।

मंडी में आने वाले किसानों और श्रमिकों को सस्ते दरों पर सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर मंडी की अध्यक्ष अनु कटारिया व निर्वाचित सदस्यों ने मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री को पत्र लिखा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन से भी आग्रह किया गया है कि श्रमिक व किसान विश्रामगृह के ताले किसानों के हित में खोले जाए। वहीं कैंटीन की सुविधा भी शुरू की जाए। इससे मंडी में आने वालों को जलपान गृह के लिए बाहर नहीं जाना पड़े।

सुविधा नहीं दे रहे हैं तो क्यों बनाए भवन?

सावित्री बाई फुले फल सब्जी मंडी की अध्यक्ष अनु बालीराम कटारिया, मजदूर यूनियन के प्रतिनिधि किसनाराम, भवानी चौधरी, धर्माराम, जगदीश, मोती, प्रेम चौधरी, महिपाल विश्नोई, रामस्वरूप, सुनील, पतराम, नरपत चौधरी, खुमाराम चौधरी, मनोहर चौधरी, गेनाराम, सचिन भाटी ने बताया कि लाखों रुपए खर्च करके मंडी में किसानों व मजदूरोें के लिए भवन तो बना दिए, लेकिन लोकार्पण के बाद भी इन पर ताला लगा दिया गया है। सुविधा नहीं दे सकते हैं तो भवन बनाए ही क्यों है?

लंबी दूरी तय कर सब्जियां लाते हैं किसान

भदवासिया फल सब्जी मंडी में रोजाना सैकड़ों किसान वाहन लेकर रात्रि में आते हैं। बाहर से फ्रूट व अन्य सब्जियों के ट्रकों का आना लगा रहता है। मंडी में सुविधा नहीं होने से इनको बाहर जाकर होटलों और विश्राम गृहों में रुकना पड़ रहा है। 34-34 लाख रुपए लागत से किसान विश्राम गृह और श्रमिक विश्राम गृह 3 फरवरी 2020 को बनकर तैयार हो गए। मुख्यमंत्री गहलोत ने 18 दिसंबर 2020 को लोकार्पण भी किया, पर अब तक इसके ताले नहीं खुल पाए हैं।

फर्नीचर के लिए बजट नहीं है

मंडी सचिव मनोज ढेनवाल ने बताया कि विश्रामगृह, मजदूर गृह के लिए 20 लाख के बजट की मांग मुख्यालय से की गई है। भवन तैयार है, लेकिन इसमें फर्नीचर नहीं होने से इसे शुरू नहीं किया जा रहा है। बजट आते ही फर्नीचर लगाकर शुरू कर दिया जाएगा।

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