बेजुबान से हैवानियत:श्वान को कार से बांधकर घसीटने के मामले में नेपाल से मेनका गांधी ने फोन किया तब पुलिस ने दर्ज किया केस

जोधपुर15 दिन पहले
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कार से घसीटने से श्वान लहूलुहान हो गया और शरीर कई जगह से छिल गया। - Dainik Bhaskar
कार से घसीटने से श्वान लहूलुहान हो गया और शरीर कई जगह से छिल गया।

शहर में रविवार दोपहर को एक डॉक्टर द्वारा श्वान को कार से बांधकर घसीटने के मामले में नेपाल से मेनका गांधी का फोन आने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया। वहीं डाॅ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिलीप कच्छवाह ने आरोपी डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस देकर 24 घंटे में तथ्यात्मक टिप्पणी मांगी है।

घटना का वीडियो वायरल हुआ।सूचना पर डॉग होम के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और श्वान को इलाज के लिए भेजा। मामले में कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर की कार रोकने की कोशिश की तो उन्होंने उन पर कार चढ़ाने का प्रयास किया।। मामले में पुकार एनीमल एनजीओ ने शास्त्रीनगर थाने में केस दर्ज कराया। पुलिस ने डॉक्टर की कार जब्त कर जांच शुरू की।

एनजीओ की अपर्णा बिस्सा ने बताया कि शास्त्रीनगर में रहने वाले डॉ. रजनीश गालवा एमजीएच में प्लास्टिक सर्जरी के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। कार से श्वान को घसीटते वक्त कुछ बाइक सवार लोगों ने कार रोकनी चाही तो वे उनसे उलझने लगे। वहीं डॉक्टर ने कहा कि श्वान अक्सर घर में घुस जाता है और घर के बाहर भोंकता रहता है, इसलिए उसे निगम के बाड़े में छोड़ने जा रहे हैं।

डॉग होम फाउंडेशन के सदस्यों ने घायल श्वान के लिए अपनी एंबुलेंस बुलाई तो डॉक्टर ने हंगामा किया और शास्त्रीनगर थाने से पुलिस बुला ली।

फाउंडेशन सदस्य कुलदीप ने बताया कि पुलिस ने भी एंबुलेंस रोककर रखी। फिर नेपाल में कार्यक्रम में गई मेनका गांधी को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने वहां से एसएचओ ओमकरण को फोन किया तब एंबुलेंस को छोड़ा और डॉक्टर के खिलाफ धारा 428 के तहत केस दर्ज किया, लेकिन मेनका गांधी ने हत्या का प्रयास और धारा 429 लगाने की बात कही, जिसके बाद पुलिस ने कहा कि धाराओं को बाद में बढ़ाया जाएगा।

पत्नी ने ले-दे कर मामला खत्म करने को कहा अपर्णा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने डॉक्टर की रसूख के चलते एंबुलेंस को भी रोका। मामला दर्ज कराया तो डॉक्टर की पत्नी सुमन भी थाने पहुंच गई। उसने कुछ पैसे देकर मामला खत्म करने के लिए भी कहा, लेकिन एनजीओ सदस्यों ने साफ मना कर दिया।

स्ट्रीट डॉग काे प्रताड़ित करना दंडनीय अपराध

आईपीसी की धारा 428, 429 और पीसीए एक्ट की धारा 11 के तहत स्ट्रीट डॉग को मारना-पीटना, प्रताड़ित करना दंडनीय अपराध है। सरकार की नीति और एनिमल बर्थ कंट्रोल 2011 के तहत जिस क्षेत्र में इन स्ट्रीट डॉग का आतंक है, वहां इनकी नसबंदी की जा सकती है, लेकिन मारा नहीं जा सकता। यदि कोई इन स्ट्रीट डॉग या मवेशियों को परेशान करता है या मारने की कोशिश करता है तो पशु क्रूरता का केस पुलिस में दर्ज किया जा सकता है।

परिवारजनों पर हिंसक होता था, इरादा केवल दूर छोड़ने का था : डॉ. गालवा
एमजीएच के प्लास्टिक सर्जन डॉ. रजनीश गालवा का कहना है कि यह आवारा श्वान है जो घर के बाहर निकलने पर परिवार के बच्चों और बुजुर्गों पर हिंसक होता था। कई बार घर में घुस आता था। इसने मेरी बच्ची को भी काटा तब एमजीएच जाकर उसका इलाज कराया।

मेरा इरादा किसी को नुकसान पहुंचाने का नहीं था, फिर भी किसी की भावना आहत हुई है तो मैं माफी चाहता हूं। आज छुट्‌टी का दिन था तो मैं इसे दूसरी जगह छोड़ने जा रहा था। गाड़ी में इसलिए नहीं बैठाया कि अंदर काटने का डर था। इसलिए साइड से बांधकर फर्स्ट गियर में गाड़ी चलाते हुए दूसरी जगह छोड़ने जा रहा था।

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