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शिक्षक तबादले:गहलोत के परिपाटी बदलने से गच्चा खा गए शहर में आने के इच्छुक कई शिक्षक, विधायकों को मिली पूरी छूट

जोधपुर3 महीने पहले
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गत वर्ष शिक्षक तबादलों के बाद गहलोत की जोधपुर यात्रा के दौरान लोगों ने इस तरह शिकायतों का अंबार लगाया था। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
गत वर्ष शिक्षक तबादलों के बाद गहलोत की जोधपुर यात्रा के दौरान लोगों ने इस तरह शिकायतों का अंबार लगाया था। (फाइल फोटो)
  • विधानसभा क्षेत्र के तबादलों में विधायकों की सिफारिश ही हुई मान्य

शिक्षकों के तबादलों का पिटारा आखिरकार खुल ही गया। जोधपुर शहर में व्यापक स्तर पर स्कूल प्रिंसिपल, हैड मास्टर व व्याख्याताओं के तबादले हुए। वहीं सैकंड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों की सूची अभी आनी है। जोधपुर शहर में होने वाले तबादलों में हमेशा नजर आने वाली मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की छाप इस बार कम नजर आई। गहलोत ने इस बार जोधपुर जिले के विधायकों को खास तव्वजों प्रदान की। यहीं कारण रहा कि अधिकांश तबादले उनकी अनुशंषा पर ही हुए। ऐसे में गहलोत के खास लोगों के माध्यम से तबादला कराने के इच्छुक कई लोग गच्चा खा गए।

राज्य सरकार के कर्मचारियों में करीब 55 फीसदी हिस्सा शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का है। ऐसे में इनके तबादलों को लेकर सबसे अधिक मशक्कत चलती है। ग्रामीण क्षेत्र में बैठे शिक्षक शहर में अपने इच्छित स्थान पर तबादला करवाने के लिए नेताओं के चक्कर लगाते रहते है।

जोधपुर में बरसों से यह परिपाटी रही है कि गहलोत ही अपने चुनीन्दा लोगों से अनुशंषा सूची ले लेते थे। इसके आधार पर ही शिक्षकों के तबादले होते थे। इस सूची में शामिल कुछ नाम अवश्य विधायकों की तरफ से की गई सिफारिश वाले होते थे। तबादला सूची में शामिल अधिकांश नाम गहलोत के खास लोगों की तरफ से सूची में सौंपे गए ही होते थे। यही कारण है कि तबादलों के इच्छुक लोग गहलोत के खास लोगों को हमेशा घेरे रहते।

इस बार गहलोत ने परिपाटी को बदल दिया। गहलोत ने जिले के विधायकों व चुनाव हार चुके पार्टी प्रत्याशियों की राय को भरपूर तव्वजो प्रदान की। इसी के चलते इस बार तबादला सूची में शहर विधायक मनीषा पंवार अपने समर्थकों के बड़ी संख्या में तबादला करवाने में सफल रही। इसके अलावा सूरसागर से चुनाव हार चुके प्रो. अयूब खान व लूणी विधायक महेन्द्र विश्नोई भी अपने कई लोगों को शहर में लाने में सफल रहे। हालांकि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र सरदारपुरा की स्कूलों में जेडीए के पूर्व चेयरमैन राजेन्द्र सोलंकी की तरफ से सौंपी गई सूची पर ही अंतिम मुहर लगी।

कई लोग खा गए गच्चा

गहलोत के परिपाटी बदल देने से तबादले के इच्छुक कई लोग गच्चा खा गए। वे गहलोत के खास लोगों के भरोसे ही रहे। लेकिन अन्य विधानसभा क्षेत्रों की स्कूलों में विधायकों को तव्वजों दिए जाने से उनके काम अटक गए। ऐसे लोग अब नए सिरे से नेताओं की घेराबंदी करने में जुटे है। तबादला सूची से निराश लोग बड़ी संख्या में आज सुबह से ही नेताओं के घर पहुंच गए।

पिछली बार से लिया सबक

गत वर्ष शिक्षक तबादलों के लेकर जोधपुर में गहलोत की जोरदार किरकिरी हुई थी। इसमें जाति विशेष के शिक्षकों को टारगेट कर तबादले किए गए। इसको लेकर विरोध बढ़ गया। उसी दौरान गहलोत की जोधपुर यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने उनसे मुलाकात कर अपनी पीड़ा सुनाई। बढ़ती शिकायतों को देख गहलोत ने इस बारे में फीडबैक लिया। इसके बाद उन्होंने अपना मानस बदला। बाद में उन्होंने तबादलों पर रोक ही लगा दी।

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