राजनीति:एक साल पहले खेला गया मास्टर स्ट्रोक कांग्रेस काे दिला सकता है ‘पॉलिटिकल माइलेज’

जोधपुरएक वर्ष पहले
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  • परिसीमन की अंक गणित से पहले उत्तर निगम भाजपा से फिसला, दक्षिण निगम टिकट वितरण से उपजी नाराजगी व कम वोटिंग से खिसकता दिख रहा

निगम उत्तर व दक्षिण के लिए हुए चुनाव की मतगणना मंगलवार को होगी। 80-80 वार्डों के दोनों निगम में किसका बोर्ड बनेगा, इसकी तस्वीर भी दोपहर तक साफ हो जाएगी। लेकिन संभावना इस बात की भी है कि जोधपुर में ‘दो निगम-दो मेयर’ का एक साल पहले कांग्रेस का खेला गया मास्टर स्ट्रोक मंगलवार को पॉलिटिकल माइलेज दिला सकता है।

हालांकि परिसीमन में कांग्रेस ने माली, मुस्लिम, एससी और ओबीसी वर्ग को एक साथ रख उत्तर निगम में अंक गणित के लिहाज से खुद काे पहले ही मजबूत कर लिया था। इसकी तस्वीर कांग्रेस के प्रत्याशियों की सूची और बाद में हुए मतदान के बाद साफ नजर आने लगी। इसी का नतीजा था कि खुद के अधिकृत प्रत्याशियों की सूची में भाजपा मेयर के चेहरे तक नहीं दिखा पाई।

वहीं, दक्षिण निगम में भी भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध मारते हुए कांग्रेस उसके मजबूत गढ़ को ध्वस्त करने की जद्दोजहद में है, क्योंकि भाजपा सूरसागर विधानसभा में अपनी परंपरागत वोट बैंक वाली जातियों को या तो टिकट ही नहीं दे पाई और अगर टिकट दिए भी तो उस वार्ड में जाति के वोटों का गणित नहीं बिठा पाई।

यही स्थिति शहर और सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्राें के वार्डों की रही। हालांकि कांग्रेस आपसी खींचतान के चलते परिणाम आने के कुछ घंटे पहले तक यह दावा नहीं कर पाई कि उत्तर व दक्षिण निगम में उसका बोर्ड बनता नजर आ रहा है या नहीं?

उत्तर में नहीं ढूंढ़ सकी माली-मुस्लिम व एससी के गठजोड़ का तोड़
सरदारपुरा मुख्यमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र है। यहां से वे लगातार चुनाव जीत रहे हैं। इस बार शहर विधानसभा सीट भी कांग्रेस ने जीती है। ऐसे में निगम चुनाव में कांग्रेस के मास्टर स्ट्रोक को उत्तर में नई संजीवनी के रूप में देखा गया था। उत्तर निगम में मुस्लिम, माली व ओबीसी के साथ-साथ अन्य जातियों को टिकट थमा मैदान में उतारा था।

80 वार्ड में दोनों ही दलों ने मुस्लिम व माली गठजोड़ करते हुए कुल 80 टिकट दिए, जबकि ब्राह्मण व राजपूत को सिर्फ 24 टिकट। उत्तर में मुस्लिम-माली गठजोड़ ने ही वोटिंग प्रतिशत बढ़ाया। मुस्लिम बाहुल्य वार्डों में वोटिंग 60 से 70% रहा तो माली बाहुल्य वार्डों में 60 से 72% रहा। ब्राह्मण-राजपूत बाहुल्य वार्डों में 60% के भीतर ही वाेटिंग हुई।

दक्षिण में कम वोटिंग और अंदरूनी लड़ाई से भाजपा परेशानी में: भाजपा में भारी विरोध के बावजूद विधायक सूर्यकांता व्यास को गत विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने वाली हाउसिंग बोर्ड में परिसीमन के बाद छह से बढ़कर 11 से 12 वार्ड हो गए। ये सभी वार्ड दक्षिण निगम में हैं। कांग्रेस हाउसिंग बोर्ड के अलावा सभी वार्डों में मतगणना के दौरान हार के करीब रहती है, लेकिन जैसे ही इन वार्डों की गणना होती है तो हार-जीत में बदल जाती है और भाजपा का ग्राफ तेजी से चढ़ता है।

ब्राह्मण, राजपूत, रावणा राजपूत, सिंधी, स्वर्णकार, घांची, कुम्हार सहित अन्य ओबीसी जातियों के कारण दक्षिण निगम को भाजपा के पक्ष वाला माना जाता है। इसके चलते ही दोनों ही दलों ने मुस्लिम-माली को 80 वार्डों में सिर्फ 24 टिकट ही दिए हैं, जबकि ब्राह्मण-राजपूत-रावणा राजपूत को 45 टिकट दिए। लेकिन वोटिंग 60% से कम रहने से भाजपा की सांसें अटकी हुई हैं।

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