कोरोनाकाल में जोधपुर के लिए उपलब्धि:कोरोना टेस्टिंग के मामले में जोधपुर राजस्थान में टॉप पर, अकेले मेडिकल कॉलेज ने ही जांच दिए 2 लाख सैंपल

जोधपुरएक वर्ष पहले
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जोधपुर का डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज। - Dainik Bhaskar
जोधपुर का डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज।
  • अब तक जोधपुर में दो लाख 75 हजार कोरोना सैंपल जांचे जा चुके है

जोधपुर जिला राजस्थान में सबसे ज्यादा कोरोना टेस्ट करने वाला जिला बन गया है। जोधपुर में अब तक 2 लाख 75 हजार टेस्ट किए जा चुके हैं। अकेले डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज की लैब में ही अब तक 2 लाख सैंपल जांचे जा चुके हैं।

जोधपुर में मेडिकल कॉलेज, एम्स और डीएमआरसी में कोरोना जांच की सुविधा है। मेडिकल कॉलेज के दो लाख सैंपल में जोधपुर के अलावा अन्य जिलों के सैंपल भी शामिल हैं। एम्स और डीएमआरसी में भी अब तक एक लाख से ज्यादा सैंपल जांचे जा चुके हैं।

हमेशा क्षमता से ज्यादा सैंपल की टेस्टिंग की गई

मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॅाजी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. पीके खत्री के नेतृत्व में टीम ने 9 मार्च से कोविड जांच शुरू की थी। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जीएल मीणा ने बताया कि शुरुआत में प्रतिदिन 250 सैम्पल की जांच होनी थी, लेकिन 750 सैंपल की जांच की गई। बाद में रोजाना 1500 से 2000 सैंपल की जांच करने का लक्ष्य रखा गया।

अब 4 हजार सैंपल की हो रही टेस्टिंग

इसके बाद राज्य सरकार ने नए उपकरणों की स्थापना की मंजूरी दी। अब प्रतिदिन 4000 सैंपल की जांच करने की क्षमता विकसित हो गई है। डॉ. खत्री ने बताया कि उनकी टीम के सदस्यों ने दिन-रात काम करते हुए 2 लाख सैंपल की जांच की। टीम में डॉ. अर्चना बोडा, डॉ. सरोज मीना, डॉ. लक्ष्मी राठौड, सुनील भूषण, डॉ. वरूण कोठारी, डॉ. मर्शरत अफराज, प्रगति, महिला, रंजना सांखला, रामदेव, दीप शिखर, प्रवीण राठौड, डॉ. रविन्द्र सिंह, शिवानी खुल्लर, कुसुमलता, चन्द्र प्रकाश, मोहित पंवार शामिल हैं।

इसके साथ ही डॉ. स्वाती दुग्गकल, डॉ. ज्योति, डॉ. आशा, डॉ. दुर्गा प्रसाद, डॉ. सारांश, डॉ. श्रेया प्रधान, डॉ. शाहबाज, डॉ. पूजा, सुबोध, शैलेन्द्र, शर्मिला, प्रियंका, नितिश, राहुल, अमित, रीतु, सुधीप, तेजन्द्र, ओमप्रकाश पंवार, घनश्याम टाक, शैलेन्द्र, महिपाल, जितेन्द्र, राजन, निर्मला एवं गजेन्द्र ने भी योगदान देकर वायरल रिसर्च डायग्नोस्टिक लैब के जरिए 2 लाख टेस्ट किए।

विभागाध्यक्ष का नाम ही भूले

डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में कोरोना के टेस्टिंग के दो लाख सैंपल पूरे होने पर माइक्रोबाॅयोलॉजी विभागाध्यक्ष काे जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज ने पूरी तरह से भूला दिया। जिला प्रशासन की ओर से विभागाध्यक्ष का नाम ही नहीं लिखा गया। यहां तक की प्राचार्य ने भी विभागाध्यक्ष का नाम नहीं लिया।

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