सोना चढ़ा महल:मेहरानगढ़ का फूल महल : 10 किलो सोने से जड़ा, दो सदी बाद भी वही चमक, राजस्थान का सबसे खूबसूरत महल

जोधपुरएक महीने पहले
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मेहरानगढ़ के फूल महल की दीवारों और छत पर फूलों की आकृतियां बनी हैं। इसके चलते ही इसे फूल महल कहा जाता है। 		  {फोटो : शिवलाल वर्मा - Dainik Bhaskar
मेहरानगढ़ के फूल महल की दीवारों और छत पर फूलों की आकृतियां बनी हैं। इसके चलते ही इसे फूल महल कहा जाता है। {फोटो : शिवलाल वर्मा

स्वर्णिम आभा से दमकती दीवारें और छत, उन पर नायाब नक्काशी, सजीव चित्रकारी और रंग-बिरंगे कांचों का संगम। ये है जोधपुर के मेहरानगढ़ का फूल महल। यह मेहरानगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान का सबसे खूबसूरत महल कहा जाता है। इस अद्भुत खूबसूरती को उभारने के लिए इसमें 10 किलो सोने का इस्तेमाल किया गया था।

18वीं शताब्दी के मध्य में कलाकारों ने 4 साल तक राजसी शानो-शौकत के नए आयाम गढ़े। यहां दीवारों पर राग-रागिनियों की 36 सजीव-सी पेंटिंग्स, महाराजा तख्तसिंह और उनके 9 राजकुमारों की चित्र, देवी-देवताओं के चित्र एवं भगवान श्रीनाथ व शिव-पार्वती की पेंटिंग हैं। छत पर लकड़ी पर फूलों की महीन नक्काशी और गोल्ड वर्क का काम, इसके पीछे से झिलमिलाता दर्पण मनमोहक छटा बिखेरते हैं। 10 से अधिक स्तंभों पर भी फूलों की आकृतियों को सोने से मढ़ा गया है।

एक सदी बाद सोने से सजा, बेल्जियम से रंग-बिरंगे कांच मंगवाए थे
फूलमहल का निर्माण महाराजा अभयसिंह ने 1724-49 के बीच करवाया था। उस वक्त चित्रकारी नीले रंग में थी। 100 साल बाद महाराजा तख्तसिंह ने फूल महल का जीर्णोद्धार करवाया। तभी गोल्ड प्लेटिंग हुई। इसके लिए पूनमचंद एवं फतेह खां के नाम का उल्लेख है। दीवारों पर बेल्जियम से मंगवाए रंग-बिरंगे कांच भी लगाए हैं।

कमठा बही में सोने का जिक्र
मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के डॉ. महेंद्रसिंह तंवर बताते हैं कि पुरानी कमठा बहियों में सोने के वर्क की खरीद का जिक्र है। उस वक्त किए गए भुगतान के अनुसार करीब 10 किलो स्वर्ण खरीद की गई थी।

रुका काम आज भी अधूरा
किंवदंती है कि चित्रकारी करते हुए कलाकार का निधन हो गया था। महाराजा ने श्रद्धांजलि स्वरूप दूसरे कलाकार से कार्य नहीं करवाया। कुछ लोग मानते हैं महाराजा की मौत के चलते काम रुका था।