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ऑक्सीजन सप्लाई:सर्वाधिक मौतें जोधपुर में, फिर भी हमें एक भी ऑक्सीजन प्लांट नहीं मिला

जोधपुरएक महीने पहले
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स्पेशल टैंकर की कमी है, इसलिए कुछ टैंकर में फेरबदल किए जा रहे हैं, ऐसे में वाल्व की साइज अलग होने से आ रही परेशानी । - Dainik Bhaskar
स्पेशल टैंकर की कमी है, इसलिए कुछ टैंकर में फेरबदल किए जा रहे हैं, ऐसे में वाल्व की साइज अलग होने से आ रही परेशानी ।
  • केंद्र के 581 ऑक्सीजन प्लांट में से राजस्थान को मिले सिर्फ 12

कोरोना संक्रमण से लोगों की जान बचाने के लिए अब ऑक्सीजन का जुगाड़ एक बड़ी जरूरत बन गया है। स्थानीय स्तर से लेकर केंद्र सरकार तक लोगों की सांसें थामने के लिए ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट लगाने में जुट गई हैं। ऐसी ही मदद प्रधानमंत्री केयर फंड से होने जा रही है, जिसमें देश में 581 प्लांट लगाए जा रहे हैं।

राजस्थान को 12 प्लांट मिले हैं, लेकिन इनमें जोधपुर को एक भी नहीं है। वह भी तब, जब प्रदेश में इन दिनों सर्वाधिक मौत का आंकड़ा जोधपुर में सामने आ रहा है तो संक्रमित मरीजों के लिहाज से राजस्थान में जयपुर के बाद जोधपुर ही सबसे बड़ा जिला बना हुआ है।

दरअसल, पीएम केयर फंड से देशभर में स्थापित होने वाले 581 ऑक्सीजन प्लांट के लिए एनएचएआई को नोडल एजेंसी बनाया गया है। अगले 7 से 8 दिन में देशभर में ये प्लांट खड़े भी कर दिए जाएंगे। इनमें से 400 डीआरडीओ व 181 एचएलएल इंफाटेक सर्विस के सहयोग से लगाए जाएंगे। जरूरत जल्दी की है तो प्लांट लगाने से पहले और उसके दौरान के कार्य भी त्वरित गति से करवाने के लिए एनएचएआई को जिम्मा सौंपा गया है।

केंद्र सरकार के प्लांट की सूची में जोधपुर का नाम नहीं आया तो भाजपा नेता व पूर्व जिला प्रमुख पूनाराम चौधरी ने जिले के भाजपा नेताओं की ओर से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से गुहार की है कि पश्चिमी राजस्थान में जोधपुर के ही अस्पताल लोगों की जिंदगी बचाने की मशक्कत में जुटे हैं। ऑक्सीजन की कमी यहां भी है, ऐसे में पांच प्लांट जोधपुर और एक प्लांट फलोदी के लिए सरकार की ओर से लगाया ही जाना चाहिए।

पिछले साल मिले थे तीन प्लांट, अभी लगने का इंतजार
केंद्र सरकार की योजना के तहत जोधपुर समेत बीकानेर, जयपुर और अलवर में ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट मेडिकल कॉलेज के संबद्ध अस्पतालों में लगाए जाने थे, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के चलते डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के तीनों प्रमुख अस्पतालों में अभी तक ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट का प्लेटफार्म तक तैयार नहीं हुआ है। इधर 3200 लीटर प्रति मिनट क्षमता के प्लांट की मशीन कब तक आएगी, वह भी तय नहीं है। यदि यह बनकर तैयार होता तो 700 डी टाइप सिलेंडर प्रतिदिन की आपूर्ति अस्पताल को मिलती रहती।

जामनगर से ‘संजीवनी’ लेकर एम्स पहुंचे टैंकर के वाल्व की साइज थी बड़ी, जुगाड़ कर 6 घंटे बाद ऑक्सीजन खाली की गई
जामनगर से ‘संजीवनी’ लेकर गुरुवार को जोधपुर पहुंचे एक टैंकर में तकनीकी खामी ने प्रशासन की एक्सरसाइज करवाई। पांच-छह घंटे तक अफसर जुटे रहे। आखिर “जुगाड़’ से लिक्विड ऑक्सीजन को एम्स के ऑक्सीजन प्लांट में खाली करवाया गया। शहर में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच हर दिन एक या दो टैंकर लिक्विड ऑक्सीजन के आ रहे हैं।

लिक्विड ऑक्सीजन लेकर आने वाले टैंकर की कमी होने के कारण दूसरे टैंकर में तकनीकी फेरबदल किए जा रहे हैं, ताकि शहरों में ऑक्सीजन की सप्लाई की जा सकें। गुरुवार को सुबह 10 बजे लिक्विड ऑक्सीजन लेकर एक टैंकर एम्स पहुंचा। टैंकर के वाल्व को जब प्लांट के वॉल्व से जोड़ने का प्रयास किया तो पता चला कि दोनों वाल्व की साइज में फर्क है।

एम्स के कपलिंग प्लांट के वाल्व की साइज सवा इंच थी और टैंकर के वाल्व की साइज 2 इंच। ऐसे में वाल्व लग नहीं पा रहा था और ऑक्सीजन के लीक होने की आशंका थी। मौके पर मौजूद अफसरों की टीम ने काफी मशक्कत की और एक्सपर्ट को बुलाया। लिक्विड ऑक्सीजन खाली करवाने के लिए एक जुगाड़ तैयार करवाया गया।

उसके बाद इस जुगाड़ से वाल्व फिट कर लगाया गया। शाम करीब 4 बजे के बाद टैंकर खाली होना शुरू हुआ। इस पूरी मशक्कत में आरटीओ, जेडीए, प्रशासन और मेडिकल की टीम ने 5-6 घंटे तक अथक प्रयास किए। इस प्रक्रिया में श्रीराम गैस के संदीप भाटी, झालाराम पटेल, आरटीओ रामनारायण बड़गुर्जर, अमरदान रतनू, प्रवीण गहलोत, पुष्पेंद्र शर्मा और भारत जांगिड़ का सहयोग रहा।

गौरतलब है कि लिक्विड ऑक्सीजन लेकर आने वाले स्पेशल टैंकर की कमी है। इसलिए कुछ टैंकर में फेरबदल किए जा रहे हैं ताकि अधिक टैंकर सप्लाई में लगाए जा सकें। जोधपुर पहुंचे ऐसे ही टैंकर के वाल्व की साइज अलग थी। इसलिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

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