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जोधपुर:250 करोड़ की संपत्ति को महज 7.50 करोड़ में बेचे जाने के सवाल पर उखड़े शौरी बोले कोई गड़बड़ी नहीं की गई

जोधपुर8 महीने पहले
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जोधपुर में बुधवार को कोर्ट से बाहर निकलते पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण शौरी। - Dainik Bhaskar
जोधपुर में बुधवार को कोर्ट से बाहर निकलते पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण शौरी।
  • पहले भी जांच में सब कुछ सामान्य पाया गया अब और जांच हो जाएगी

पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण शौरी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय किए गए किसी भी विनिवेश में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। बहुत कड़ी प्रक्रिया अपनाई गई थी। उसी की पालना में विनिवेश किया गया। 250 करोड़ की संपत्ति को महज 7.50 करोड़ में बेचे जाने के सवाल पर शौरी उखड़ गए। उन्होंने कहा कि इस तरीके से वैल्यूशन नहीं होता है। होटल लक्ष्मी विलास पैलेस विनिवेश मामले में सीबीआई दो बार क्लोजर रिपोर्ट दे चुकी है। राजस्थान हाईकोर्ट भी इस प्रक्रिया को एकदम सही मान चुका है। इसके बावजूद यदि सीबीआई कोर्ट को लगता है कि कुछ गलत हुआ तो एक बार फिर जांच हो जाएगी और सच्चाई सामने आ जाएगी।
जोधपुर की सीबीआई कोर्ट में जमानत मुचलका पेश करने के बाद शौरी ने कहा कि मैं कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। यह उनका अधिकार क्षेत्र है। जांच होने पर सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में बाकायदा 14 पाइंट के साथ इसे उचित ठहराया था। बाद में राजस्थान हाईकोर्ट के दो जजों की खंडपीठ ने भी इसे सही माना। वर्ष 2014 में किसी की शिकायत पर फिर जांच शुरू कर दी गई।
शौरी से पूछा गया कि 250 करोड़ की होटल को सिर्फ 7.50 करोड़ में कैसे बेचा जा सकता है? इस पर वे थोड़ा नाराज हो गए और कहा कि पहले कहा गया कि इसका वैल्यूशन 50 करोड़ रुपए है। बाद में हुई जांच में इसे 150 करोड़ बता दिया गया और अब इसे बढ़ाकर 250 करोड़ रुपए बता दिया गया। ऐसे वैल्यूशन पर कैसे विश्वास किया जा सकता है।
कोई एक व्यक्ति नहीं कर सकता था विनिवेश का फैसला
शौरी ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी के स्पष्ट निर्देश थे कि नियमों की कड़ाई से पालना हो। कोई एक व्यक्ति अपने स्तर पर फैसला नहीं ले सकता था। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी में लालकृष्णआडवाणी, यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह, अरुण जेटली और मैं शामिल था। विनिवेश से जुड़े मामलों की फाइल पहले सचिवों की कमेटी से पास होकर इस समूह के पास आती। इसके बाद विनिवेश पर फैसला लिया जाता। इसके बाद इसे कैबिनेट कमेटी में भेजा जाता। ऐसे में कोई एक व्यक्ति विनिवेश का फैसला नहीं कर सकता था।
पत्नी व बेटा बीमार है
शौरी ने कहा कि उनकी पत्नी कई बरस से बिस्तर पर है। मेरे खुद के पेस मेकर लगा हुआ है। मेरा 44 साल का बेटा न तो खड़ा हो सकता है और न ही देख व बोल सकता है। ऐसे में इन दोनों को खाना तक मैं खिलाता हूं। इन दोनों को छोड़कर मैं आज कोर्ट में पेश होने आया हूं।

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