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कैप्टन की मौत की वजह अब भी तखतसागर में:पोस्टमार्टम में फेफड़ों में नहीं मिला पानी, शव भी कम गला, अब विसरा रिपोर्ट का इंतजार

जोधपुर8 दिन पहले
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भारी भीड़ के जयकारों के बीच डिगाड़ी में सैन्य सम्मान से कैप्टन अंकित का अंतिम संस्कार किया गया। - Dainik Bhaskar
भारी भीड़ के जयकारों के बीच डिगाड़ी में सैन्य सम्मान से कैप्टन अंकित का अंतिम संस्कार किया गया।

भारतीय सेना की 10 पैरा स्पेशल फोर्सेज के कमांडो कैप्टन अंकित गुप्ता 7 दिन तक शहर के तखतसागर में डूबे रहने के बाद बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। स्पेशल ऑपरेशन ड्रिल हेलोकास्टिंग ट्रेनिंग करने के दौरान गत 7 जनवरी को तखतसागर में कूदे अंकित की मौत का कारण अब भी पानी से बाहर नहीं निकल सका है।

अंतिम संस्कार से पहले महात्मा गांधी अस्पताल में हुए पोस्टमार्टम का नतीजा तो यही कह रहा है। हालांकि पोस्टमार्टम करने वाले मेडिकल ज्यूरिस्ट ने अपनी अंतिम राय नहीं दी है। प्रथम दृष्टया मौत का कोई कारण नहीं मिला है। ऐसे में विसरा जांच की रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।

घटना कैप्टन के सात दिन तक पानी में डूबे रहने की है तो यही मौत की बड़ी वजह भी मानी जा रही थी, इसकी पुष्टि करने के लिए डायटम टेस्ट किया जाएगा, जिसके लिए सैंपल ले लिया गया है। इधर, सात दिन तक पानी में रहने से शरीर गल जाता है, ऐसा कुछ अंकित के शरीर के साथ नहीं हुआ, जो भी जांच का विषय बन गया है।

हाथ पर मिले स्याही के निशान दिल के दौरे की भी पुष्टि नहीं
बताया जाता है कि जब मेडिकल ज्यूरिस्ट की टीम ने शव का परीक्षण शुरू किया तो उनके हाथ पर स्याही के निशान मिले, मानो उनके पोस्टमार्टम के लिए लाने से पहले फिंगर प्रिंट लिए गए हों। पता चला है कि पोस्टमार्टम के दौरान कई तथ्य मेडिकल ज्यूरिस्ट की टीम के लिए भी उलझाने वाले रहे।

मसलन, सात दिन तक पानी में रहने के बाद भी जितना डीकंपोज बॉडी को होना चाहिए, उतनी नहीं हुई। जिस स्थिति में शव तखतसागर से निकला था, पोस्टमार्टम के लिए उसी स्थिति में नहीं लाया गया। अंकित के सिर और हाथ सहित शरीर पर कहीं भी कोई चोट का निशान नहीं दिखा। दिल का दौरा पड़ने की पुष्टि भी नहीं हो सकी है। आखिर अंकित की मौत की वजह क्या रही, यह पोस्टमार्टम से तो स्पष्ट नहीं हो सका है।

कैप्टन अंकित गुप्ता की मौत का कारण सामने नहीं आने का एक कारण उनके फेफड़ों व श्वास नली में सीधे तौर पर पानी नहीं मिलने से उलझा है। इनके 6 दिन तक पानी रहने के बाद भी शरीर इतना नहीं गला, जितना सामान्यत: इतने दिन पानी में रहने पर गल जाता है। हालांकि सेना का आधिकारिक तर्क नहीं है, लेकिन बताया जा रहा है कि इसके पीछे सेना अंकित के शरीर पहने ड्राइविंग सूट को बेहतर क्वालिटी का बता रही है जिससे शरीर पर पानी का असर नहीं पड़ा।

डूबने वाले की श्वास नली या फेफड़ों में पानी न हो, ऐसे मामले बहुत कम
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के फाेरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. पीसी व्यास की मानें तो 48 घंटे तक पानी में रहने के बाद शरीर गलने लग जाता है। ऐसे मामले कम सामने आते हैं, जिनमें डूबने से मौत तो होती है लेकिन श्वास नली व फेफड़ों तक पानी नहीं पहुंचता। इसे ड्राइ डाइनिंग कहते हैं। व्यक्ति के पानी में जाने पर किसी वजह से श्वास नली के ऊपर का हिस्सा सिकुड़ जाता है और पानी में दम घुटने से मौत हो जाती है।

कै. अंकित नजरों से ओझल हुए, यादों से नहीं; भाई ने मुखाग्नि दी तो सब्र टूटा, गले मिल रोने लगीं मां व पत्नी
भारतीय सेना की 10 पैरा स्पेशल फोर्सेज के कमांडो कैप्टन अंकित गुप्ता की पार्थिव देह बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गई। जोधपुर के सैन्य क्षेत्र से सटे डिगाड़ी में बुधवार दोपहर पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए भारी जनसैलाब उमड़ा।

भारत मां के जयकारों के बीच कैप्टन अंकित के भाई ने जैसे ही मुखाग्नि दी तो परिजनों के सब्र का बांध टूट गया। उनकी मां व पत्नी आपस में गले मिलकर रोने लगी। शहर के तखतसागर में सात दिन पूर्व अभ्यास के दौरान हेलिकॉप्टर से कूदने के बाद तखतसागर में डूबने से कैप्टन अंकित का निधन हो गया था। उनका शव छह दिन पश्चात मंगलवार को तखतसागर से निकाला जा सका। उनके परिजनों ने जोधपुर में ही अंतिम संस्कार की इच्छा व्यक्त की थी। आज सुबह उनके शव का पोस्टमार्टम किया गया।

फिर पार्थिव देह को 10 पैरा के मुख्यालय ले जाया गया। वहां उनके साथी जवानों व अधिकारियों ने उन्हें अंतिम सलामी देकर विदा किया। इस दौरान कैप्टन अंकित के परिजन लगातार साथ रहे। फिर पार्थिव देह को डिगाड़ी ले जाया गया। जहां सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

अंतिम संस्कार में 15 परिजन पहुंचे
गुरुग्राम से बुधवार सुबह कैप्टन अंकित के कुछ और परिजन जोधपुर पहुंचे। अंतिम संस्कार में उनके माता-पिता, पत्नी, भाई, बहन, सास-ससुर व एक साली सहित 15 परिजन मौजूद रहे। अंतिम संस्कार के दौरान सैन्य अधिकारियों ने अंकित के परिजनों को संभाल उन्हें ढांढस बंधाया। अंकित की पत्नी व मां आपस में गले मिल नम आंखों से एकटक दाह संस्कार की प्रक्रिया को निहारती रहीं।

गांव में उमड़ा जनसैलाब
सेना के प्रति लोगों के सम्मान के एक बानगी कैप्टन अंकित के अंतिम संस्कार में देखने को मिली। डिगाड़ी गांव में उनके अंतिम संस्कार से पूर्व बड़ी संख्या में क्षेत्र के युवा एकत्र हो गए। उन्होंने गगनभेदी नारों से जयकारे लगाए। साथ ही शव यात्रा के गांव में प्रवेश करते ही वे उसके साथ काफी दूर तक जयकारे लगाते हुए पैदल चले।

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