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कोरोना के चलते टाली सर्जरी:अब 4-6 माह में अगर कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी नहीं हुई तो कई बच्चे कभी नहीं सुन पाएंगे

जोधपुर3 महीने पहले
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निजी अस्पतालों में इस पर 7-8 लाख रुपए खर्च आता है। - Dainik Bhaskar
निजी अस्पतालों में इस पर 7-8 लाख रुपए खर्च आता है।

जन्मजात नहीं सुन सकने वाले बच्चों की पांच साल की उम्र तक कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी होती है। कोरोना की वजह से करीब एक साल बीत गया और अभी भी सरकारी अस्पतालों में टालमटोल किया जा रहा है। ऐसे में कई बच्चे सर्जरी के इंतजार में हैं। अगर चार-छह महीने में इन बच्चों की सर्जरी नहीं हुई तो उनकी आयु बढ़ जाएगी और वे फिर कभी सुन नहीं पाएंगे।

भास्कर ने ऐसे पीड़ित कई बच्चों की पीड़ा जानीं। इनके पैरेंट्स का कहना है कि पहले कोरोना की वजह से सर्जरी नहीं हो पाई और अब अस्पताल टालमटोल कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी निशुल्क होती है और निजी अस्पतालों में इस पर 7-8 लाख रुपए खर्च आता है। सर्जरी से पहले पांच प्रकार की जांच जैसे बेरा, ईको, टॉर्च, सीबीसी, एमआरआई कराई जाती है।

इसके बाद यदि सभी रिपोर्ट सही होती है तो बच्चे को निमोकोकल और मैनिंगोकोकल वैक्सीन लगाई जाती है। सरकारी अस्पताल में यह फ्री और निजी में खर्च 12 से 15 हजार आता है। कई पैरेंट्स आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से निजी अस्पताल का खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं हैं।

मुख्यमंत्री प्रकोष्ठ से बच्चों के ऑपरेशन के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। पैसा अस्पताल के पास आ चुका है, लेकिन 12 महीने से बच्चे इंप्लांट लगाने का इंतजार ही कर रहे हैं। इधर विभागाध्यक्ष डॉ. भारती सोलंकी का कहना है कि प्रिंसिपल के आदेश थे कि कोरोना के समय में कोई भी प्लान सर्जरी नहीं की जाएगी। इधर अस्पताल अधीक्षक डॉ. एमके आसेरी का कहना है कि कोरोना के चलते प्लान सर्जरी बंद थी, लेकिन इमरजेंसी और सभी जरूरी सर्जरी चालू थी।

केस-1; दिसंबर में अस्पताल से फोन आया, अचानक रोक दी सर्जरी
सूरसागर लक्ष्मण घाटी निवासी 4 साल की शक्ति के पिता सुरेश ने बताया कि गत दिसंबर में ऑपरेशन के लिए एमडीएमएच से फोन आया। बच्ची को भर्ती कराया, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि अभी प्रिंसिपल ने मना किया है। लॉकडाउन से पहले ही बच्ची के लिए मुख्यमंत्री कोष से राशि स्वीकृत हुई थी। इस साल सर्जरी नहीं हुई तो बच्ची कभी सुन नहीं पाएगी।
केस-2; राशि स्वीकृत हुई, फिर भी नहीं हो रहा इंप्लांट

पीपाड़ हाल बनाड़ निवासी उम्मेदसिंह ने बताया कि उसका बेटा मोहित पांच साल का होने वाला है। 10 दिसंबर को ऑपरेशन होना था, लेकिन डॉक्टरों ने कह दिया कि अभी ऑपरेशन बंद है। जब शुरू करेंगे तब बुला लेंगे। बेटे की कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी के लिए राशि भी स्वीकृत हो गई है। अगर एक-दो महीने में नहीं हुई तो बच्चा भविष्य में शायद ही सुन पाए।
केस-3: दो साल से नागौर से जोधपुर आ रहे, नहीं हुई सर्जरी

नागौर के सियाराम ने बताया कि दो साल से नागौर से जाेधपुर के चक्कर काट रहा हूं। डॉक्टर टालमटोल कर रहे हैं। बेटी करीना साढ़े चार साल की हो गई है। चार छह महीने में सर्जरी नहीं हुई तो फिर कोई मतलब नहीं रहेगा। बार-बार जोधपुर आकर जांचें करवाकर थक चुका हूं।
सर्जरी से पहले चल बसी रक्षा
चार साल की बच्ची रक्षा के लिए भी मुख्यमंत्री प्रकोष्ठ से ऑपरेशन के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी थी। लेकिन लॉकडाउन और विभाग की टालमटोल के बीच बच्ची की एक्सीडेंट में मौत हो गई।

2019 में 100 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग हुई, 4 की ही स्वीकृति
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन चलाए जा रहे आरबीएसके कार्यक्रम के तहत पांच साल से कम उम्र के करीब 100 बच्चों को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनियों की मदद से चिह्नित किया गया था। जांच आदि कराने पर करीब 60 बच्चों में से 12 बच्चों को कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी के लिए योग्य माना गया, लेकिन पूरे साल में केवल चार बच्चों की ही ऑपरेशन के लिए मुख्यमंत्री प्रकोष्ठ से स्वीकृति मिली है।
सर्जरी के बाद रिहेबलिटेशन के लिए डॉक्टर नहीं
सरकारी अस्पतालों में ऐसे बच्चे जिनको जन्म से सुनने में समस्या है। उनकी सर्जरी के लिए सरकार के पास डॉक्टर हैं, लेकिन ऑपरेशन के बाद रिहेबलिटेशन के लिए कोई डाॅक्टर ही नहीं हैं। दरअसल ऑपरेशन के बाद बच्चों को स्पीचटेरिपिस्ट की जरूरत होती है, लेकिन वह जोधपुर में नहीं हैं। इसके चलते बच्चों की अच्छी सर्जरी के बाद भी रिजल्ट अच्छे नहीं आ पाते। हालांकि वर्तमान में एनजीओ की मदद से विभाग द्वारा किए गए ऑपरेशन के बाद स्पीचटेरिपिस्ट की मदद से रिहेबलिटेशन की सुविधा दी जाती है।

2020 में इनका हाेना था काॅकलियर इंप्लांट, राशि भी स्वीकृत हुई

  • रक्षा पुत्री हंसाराम, जालाेर निवासी, 442967 राशि छह अगस्त काे स्वीकृत।
  • करीना पुत्री सियाराम साेनेली नागाैर निवासी, 442967 राशि चार फरवरी को स्वीकृत।
  • शक्ति पुत्री सुरेश कुमार सूरसागर निवासी, 442967 राशि चार फरवरी काे स्वीकृत।
  • मोहित पुत्र उम्मेद सिंह जोधपुर निवासी 442967 राशि चार फरवरी को स्वीकृत।
  • आतिफ खान पुत्र अकरम खान पाल रोड निवासी 442967 राशि दिसंबर 2019 को स्वीकृत।

एम्स में हुई 18 कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी
2020 में एम्स में 18 कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी हुई। इसमें 10 सर्जरी लॉकडाउन से पहले और आठ सर्जरी लॉकडाउन के बाद की गई। एम्स ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित गोयल ने बताया कि एम्स में हर साल 30-35 सर्जरी कॉकलियर इंप्लांट की होती है। इस बार कोरोना के चलते कम ही हो पाई है।

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