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रेमेडेसिविर की कालाबाजारी:नर्सिंगकर्मी व एमआर अजमेर से रेमेडेसिविर इंजेक्शन मंगाते, फिर शिवगंज भेजते, अब तक 5 जने गिरफ्तार

जोधपुर15 दिन पहले
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आदित्य और ऋषभ - Dainik Bhaskar
आदित्य और ऋषभ
  • शिवगंज में एसओजी ने 2 को पकड़ा, जिनके तार अजमेर व जोधपुर से भी जुड़े

कोरोना महामारी में रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर एसओजी टीम ने रविवार को कार्रवाई की। एक ओर आमजन को रेमेडेसिविर इंजेक्शन मिल नहीं रहे हैं, वहीं कोरोना का उपचार कर रहे निजी अस्पताल के नर्सिंगकर्मी रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहे हैं। इसमें शहर के एक निजी अस्पताल का एक नर्सिंगकर्मी व एक एमआर शामिल है।

दोनों को एसओजी टीम ने गिरफ्तार किया। दरअसल, शनिवार को शिवगंज में एक निजी अस्पताल के वीनस मेडिकल काउंटर पर दबिश देकर उसके मालिक क्षितिज मेवाड़ा व उसके सहयोगी प्रवीण मीना को 50 से 60 हजार रुपए में रेमेडेसिविर इंजेक्शन बेचते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था, जहां मौके से 8 रेमेडेसिविर इंजेक्शन जब्त किए गए थे।

शिवगंज में जोधपुर एसओजी निरीक्षक जब्बर सिंह की कार्रवाई के बाद टीम को पता चला कि इसके तार जोधपुर के एक निजी अस्पताल के नर्सिंगकर्मी कुड़ी हाउसिंग बोर्ड निवासी आदित्य पुत्र परमानंद वैष्णव व मसूरिया निवासी एमआर रिषभ पुत्र अनिल दाधीच से जुड़े हैं।

इस पर एडिशनल एसपी कमल सिंह ने आदित्य और रिषभ को गिरफ्तार किया। रिषभ के कमरे में ही जब आदित्य बैठा था, तो एसओजी टीम ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं मामले में गुजरात के गांधीधाम में नर्सिंग स्टाफ पद पर कार्यरत राहुल को अजमेर में वहां की एसओजी टीम ने धर दबोचा। रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

पेट्रोल पंप व माेबाइल टॉवर के कार्मिकों की ड्रेस पहन पहुंची एसओजी टीम, रेमेडेसिविर के साथ पकड़ा

1. एसओजी एडीजी को सबसे पहले चला पता
रेमेडेसिविर की कालाबाजारी को लेकर प्रदेशभर की एसओजी टीम की तलाश तब खत्म हुई, जब एसओजी के एडीजी अशोक राठौड़ के वाट्सएप पर एक मैसेज आया। इसमें साफ तौर पर लिखा था कि रेमेडेसिविर इंजेक्शन 50 से 60 हजार रुपए में मिल रहा है। तब एडीजी राठौड़ ने तुरंत जोधपुर एसओजी को निर्देश दिए।
2. टीम ने पेट्रोल पंप व टॉवर कार्मिकों की ड्रेस पहनी, 2 दिन तक इंतजार किया
एसओजी निरीक्षक सिंह ने बताया कि जैसे ही एडीजी राठौड़ से निर्देश मिले तो तुरंत टीम शिवगंज के लिए रवाना हो गई। वहां एक दिन पूरा रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों तक पहुंचने में जुटी रही। टीम के सभी लोग अलग-अलग गेटअप में थे। पेट्रोल पंप के कार्मिक तो कोई मोबाइल टॉवर के कार्मिक के कपड़े पहनकर शिवगंज में घूमता रहा।
3. ग्राहक बन इंजेक्शन मांगा, फिर मेडिकल के मालिक तक पहुंचे
एसओजी निरीक्षक सिंह ने बताया कि एक दिन गुजरने के बाद आखिरकार एक फोन नंबर मिला, जो प्रवीण मीना का था। इस पर निरीक्षक ने किसी और के नंबर से कॉल किया और रेमेडेसिविर इंजेक्शन की मांग की। कहा कि मरीज भीनमाल में है, इंजेक्शन नहीं मिला तो मर जाएगा। इस पर उसने अपने मालिक क्षितिज मेवाड़ा को वाट्सएप कॉल करने को कहा। जब उससे बात की तो वो मिल तो जाएगा, लेकिन एक दिन इंतजार करना पड़ेगा, कहकर फोन काट दिया।
4. रोडवेज बस में पार्सल उतरा, 10 हजार रुपए दिए तो दुकान तक ले गया
अगले दिन रोडवेज में पार्सल आने का क्षितिज ने कहा। उसने कहा कि जोधपुर से जो रोडवेज बस आएगी उसी में रेमेडेसिविर आएगा। इस पर टीम ने चारों तरफ नजर रखी। प्रवीण आया और पार्सल ले गया। इसके कुछ ही देर बाद निरीक्षक सिंह ने क्षितिज को कॉल किया। उसने कहा कि रुपए तैयार रखो, एक जना आएगा और एक इंजेक्शन देगा। प्रवीण आया, तो सिपाही धर्मेंद्र ने 10 हजार दिए, लेकिन उसने कहा दुकान चलो, रुपए कम हैं। सिपाही ने सिर पर हाथ रखा, तो निरीक्षक व टीम समझ गई, पीछा करने लगी। वह सीधा क्षितिज के पास वीनस मेडिकल पर ही ले गया। क्षितिज ने सिपाही के सामने दराज खोला तो रेमेडेसिविर मिले। इस पर टीम ने दोनों को इंजेक्शन के साथ धर दबोचा। दोनों अजमेर के राहुल से भी संपर्क में थे।

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