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चिकित्सा महकमे में घोटाला:छोटे से गांव में हजारों मरीजों की जांच दर्शा बनाए बिल जांच शुरू हुई तो ओपीडी रजिस्टर ही गायब कर दिया

जोधपुर10 महीने पहले
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  • डिगाड़ी गांव के सरकारी अस्पताल का मामला, अफसर बिल देख हुए हैरान, पुष्टि के बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं
  • प्रसूताओं को दिए जाने वाले भोजन के लिए एनएचएम की स्वीकृत दर के आदेश में भी काट-छांट कर डेढ़ गुना भुगतान

शहर के निकटवर्ती डिगाड़ी गांव स्थित सरकारी हॉस्पिटल में हजारों मरीजों की कथित ओपीडी दर्शाकर पीपीपी मोड पर स्थापित लैब के संचालक व अन्य जिम्मेदारों ने लाखों के बिल बना डाले। जब ये बिल चिकित्सा विभाग पहुंचे तो अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच शुरू हुई तो शातिरों ने ओपीडी रजिस्टर ही गायब कर दिया।

ऐसे में घोटाले को ढूंढ निकालना और उजागर करना विभाग के लिए चुनौती बन गया है। इसी तरह, प्रसूताओं को दिए जाने वाले भोजन के लिए एनएचएम की स्वीकृत दर 99.50 रु. के आदेश को कांट-छांट कर 145 कर संबंधित ठेका फर्म को भुगतान करने के घोटाले की पुष्टि होने के बावजूद सख्त कार्रवाई अब तक नहीं हो पा रही है।

दरअसल, चिकित्सा विभाग ने डिगाड़ी हॉस्पिटल आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए पीपीपी मोड पर निशुल्क 40 तरह की जांचों के लिए कृष्णा डायग्नोसिस को अधिकृत किया था। यहां डॉक्टर द्वारा लिखी गई जांच करने वाली इस लैब ने जांचों की संख्या में भारी घोटाला कर लाखों के बिल बना डाले।

नवंबर में करीब 40 हजार और दिसंबर में करीब 48 हजार जांचें होने के बिल जब जयपुर पहुंचे तो अधिकारी भी चौंक गए, क्योंकि इस हॉस्पिटल में तो कभी इतनी ओपीडी संभव नहीं लगी। जयपुर से जोधपुर जाइंट डायरेक्टर डॉ. युद्धवीरसिंह को इसकी जांच के निर्देश दिए गए। 22 जून को विभाग की टीम जांच के लिए डिंगाड़ी हॉस्पिटल पहुंची, लेकिन तब तक लैब संचालक व उससे साठगांठ करने वाले जिम्मेदारों को इसकी भनक लग चुकी थी और उन्होंने ओपीडी रजिस्टर गायब कर दिए।

उच्च अधिकारियों के निर्देश पर डिंगाड़ी स्थित इस सैटेलाइट हॉस्पिटल के प्रभारी डॉ. भूपत चौधरी ने बनाड़ थाने में रिपोर्ट दी। इसमें विशिष्ट जांचों के बिलों पर डॉ. चौधरी के फर्जी साइन करने और 6 सितंबर 2019 से 23 जनवरी 2020 तक के हॉस्पिटल के दो ओपीडी रजिस्टर चोरी करने का केस दर्ज किया गया। इस रिपोर्ट में कृष्णा डाइग्नोसिस के सुरेंद्र दुग्तावा को निकाले जाने के बावजूद हॉस्पिटल में आकर रिकॉर्ड चुराने की आशंका जताई गई है।
कर्मचारी और संविदाकर्मी के विवाद में खुल रहे घोटाले के राज
बनाड़ थाने में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाड़ में कलेवा योजना में घोटाले से जुड़े मामले भी दर्ज हुए हैं। इनके अलावा हाल ही में डॉ. रवींद्र चौहान की रिपोर्ट पर एक और प्रकरण दर्ज किया गया। इसमें प्रसूताओं को दिए जाने वाले भोजन के लिए एनएचएम द्वारा स्वीकृत राशि 99.50 रुपए के आदेश में कांट-छांट कर 145 रुपए कर संबंधित ठेका फर्म भोमियाजी स्वयं सहायता समूह को डेढ़ गुना भुगतान करने का उल्लेख है।

इसमें हॉस्पिटल की तत्कालीन लेखाकार की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है। मामले में सीएमएचओ जोधपुर ने मार्च 2019 में कूटरचित दस्तावेजों की पुष्टि कर एफआईआर दर्ज कराने का अनुमोदन किया था। गत माह हेल्थ डिपार्टमेंट जयपुर ने लेखाकार को आरोप पत्र भी भेजा था। उल्लेखनीय है कि ये घोटाला भी लेखाकार और एक पूर्व संविदाकर्मी गजेंद्रसिंह के बीच हुए आपसी विवाद के बाद उजागर हुआ था।

इन दोनों के बीच का विवाद इतना बढ़ चुका है कि एक के बाद तीन-चार केस भी दर्ज हो चुके हैं। इनमें दो मामलों में तो गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस ने उसके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल की थी। जबकि, दो मामले अभी लंबित है, लेकिन घोटालों में संलिप्त कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देशों के बावजूद अब तक कोई कदम नहीं उठाए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जाता है कि इन घोटालों की अवधि में वर्तमान सीएमएचओ उस दौरान आरसीएचओ के रूप में पदस्थापित थे। ऐसे में उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

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