परमिशन / भीतरी शहर की दुकानें संभालने आए 500 से ज्यादा आवेदन, पहले दिन 48 को अनुमति

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  • वाट्सएप पर मांगे थे आवेदन, स्टेट टैक्स डिपार्टमेंट ने क्षेत्रवार प्राथमिकता के आधार पर दी इजाजत
  • पुलिस प्रशासन ने भी व्यापारियों की सुविधा के लिए नई सड़क पर बनाया नया एंट्री-एग्जिट पाॅइंट

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

जोधपुर. भीतरी शहर के कंटेनमेंट जोन या कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्र में लंबे समय से बंद दुकानों में माल खराब होने की चिंता कर रहे व्यापारियों के लिए स्टेट टैक्स डिपार्टमेंट और पुलिस प्रशासन के संयुक्त प्रयास का असर पहले ही दिन नजर आया। व्यापारियों की सुविधा के लिए दैनिक भास्कर में प्रकाशित आवेदन के प्रारूप में ही लोगों ने सूचनाएं भरीं और स्टेट टैक्स डिपार्टमेंट को भेज दीं।

पहले दिन 500 से ज्यादा आवेदन आए और इनमें सर्वाधिक इसी फॉर्मेट पर थे। इनमें पहले से तय प्राथमिकताओं के आधार पर 48 को अनुमति जारी की गई। इनमें से सोजती गेट की तरफ से भीतर जाने वालों के लिए पुलिस प्रशासन ने नई सड़क पर अलग से एंट्री-एग्जिट पाॅइंट बनाया, ताकि भीड़ की गुंजाइश नहीं रहे।

स्टेट टैक्स डिपार्टमेंट के जाॅइंट कमिश्नर केके व्यास ने बताया कि शनिवार सुबह से ही व्यापारियों के आवेदन वाट्सएप पर मिलने शुरू हो गए। इनमें से सर्वाधिक टेक्सटाइल से जुड़े प्रतिष्ठानों के मिले। इनके अलावा किराणा, गोली-बिस्किट, मणिहारी, हार्डवेयर सहित कई अन्य ट्रेड के हैं।

इन तमाम आवेदन के डाटा को विभाग की टीम कंप्यूटरीकृत करने में जुट गई। बाद में क्षेत्रवार कुछ-कुछ व्यापारियों को अनुमति देनी शुरू की, ताकि एक इलाके में ही ज्यादा लोग नहीं पहुंच सकें। शनिवार को त्रिपोलिया बाजार, मेहता मार्केट, गुलाब सागर, नई सड़क, घंटाघर, मोती चौक, घोड़ों का चौक सहित अन्य इलाकों के लिए पास जारी किए गए।

इन व्यापारियों के लिए पुलिस प्रशासन ने नई सड़क पर नया पाॅइंट बनाया है। रोजाना जारी होने वाले पास की विस्तृत जानकारी भी पुलिस प्रशासन को उपलब्ध करवाई जा रही है। इन व्यापारियों की जानकारी पुलिस को दुबारा रजिस्टर में नोट नहीं करनी पड़े, इसके लिए उसी शीट में दो कॉलम जोड़ दिए हैं। ताकि, नाके पर खड़ी पुलिस टीम व्यापारी के भीतर जाने और बाहर निकलने का टाइम नोट कर सके। 
विनम्र अपील :

कॉल नहीं करें, फाॅर्म में पूरी जानकारी जरूर दें, जो पढ़ने में स्पष्ट हो
स्टेट टैक्स डिपार्टमेंट जाॅइंट कमिश्नर विनोद मेहता ने बताया कि शनिवार को मिले आवेदन में बहुत से ऐसे थे, जिनमें किसी पर मोबाइल नंबर नहीं, तो किसी पर अधूरा पता, बिना हस्ताक्षर, गाड़ी के नंबर नहीं लिखे थे। इसी तरह फाॅर्म में हैसियत पूछे जाने पर दुकान मालिक, मैनेजर, कर्मचारी या गाड़ी चालक इत्यादि लिखना था, लेकिन कई लोग इसके स्थान पर मध्यमवर्गीय या अन्य शब्द लिख रहे हैं।

हालांकि, इनसे भी विभाग की टीम व्यक्तिगत रूप से फोन करके जानकारी ले रही है। यानी उन्हें दुबारा फाॅर्म भरने की जरूरत नहीं है। दैनिक भास्कर ने व्यापारियों से कॉल नहीं करने की अपील की थी, उसकी ज्यादातर ने पालना भी की, लेकिन कई लोग अब भी बार-बार कॉल कर रहे हैं।

इससे टीम को काम करने में बाधा उत्पन्न होती है। मेहता के अनुसार फिलहाल रोजाना 40-50 लोगों को ही परमिशन दी जाएगी और वो भी अलग-अलग इलाकों के लिए, ताकि एक ही क्षेत्र में भीड़ नहीं हो।

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