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कोर्ट का फैसला:फाइल के 20 व दवा के 27 पैसे ज्यादा वसूलने का आरोप लगा कोर्ट गया मरीज, कोर्ट ने कहा- आराेप तुच्छ, आप अस्पताल को 25 हजार दो

जोधपुर3 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • मरीज को जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में गलत आधारों पर वाद दायर करना पड़ा भारी

बुखार व पेट दर्द से पीड़ित एक शख्स इलाज के लिए निजी अस्पताल गया, उपचार लिया और ठीक भी हो गया। लेकिन उसे फाइल चार्ज के 20 रुपए लेने व 171.73 रुपए की दवा के 172 रुपए लेना व जिस डॉक्टर के नाम की पर्ची दी उसकी बजाए किसी अन्य द्वारा जांच करना नागवार गुजरा। वह अस्पताल के खिलाफ सीधे जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग पहुंच गया, लेकिन यह कदम उसे उल्टा पड़ गया।

आयोग की अध्यक्ष चंद्रकला जैन, सदस्य राजाराम सर्राफ व अफसाना खान की पीठ ने इन आरोपों के आधार को तुच्छ माना और उपभोक्ता को ही अस्पताल को 25 हजार रुपए अदा करने का आदेश दे दिया। यह राशि दो माह में नहीं चुकाए जाने पर 6 फीसदी ब्याज भी देना पड़ेगा।

मामले के अनुसार लोहावट के ढाका नगर निवासी रमेश विश्नोई ने अपने परिवाद में बताया कि 7 जुलाई 2017 को उसे बुखार, पेट दर्द व दस्त की शिकायत होने पर वह मंडोर रोड स्थित श्रीराम हॉस्पिटल में इलाज के लिए गया। वहां उससे 220 रुपए लेकर फाइल पर डॉ. राजेश अग्रवाल के नाम की पर्ची दी गई। फिर उसे इमरजेंसी रूम में भेजा गया। वहां किसी दूसरे डॉक्टर ने उसकी जांच की।

उस डॉक्टर की योग्यता कम होने से उसका कंसल्टेंसी चार्ज भी कम होना चाहिए था, जबकि मुझसे ट्रेंड डॉक्टर का चार्ज वसूला गया। काउंटर पर लिए गए 220 रुपए में से 20 रुपए फाइल चार्ज थे। जबकि मेरे एक परिचित मांगीलाल ने जब 2 जुलाई 2017 को इसी अस्पताल में दिखाया तो उससे 200 रुपए ही लिए गए। इसके अलावा दवाइयों का बिल 171.73 रुपए था, जबकि मुझसे 172 रुपए वसूल किए गए। इससे मुझे शारीरिक व मानसिक वेदना हुई, अत: मुझे हॉस्पिटल से 32 हजार रुपए दिलाए जाएं, जिसमें परिवाद खर्च भी शामिल है।

प्रार्थी की बात सुनने के बाद आयोग ने पहले आरोप पर कहा, कि परिचित मांगीलाल का न तो कोई शपथपत्र है और न ही कोई दस्तावेज, जिससे यह स्पष्ट हो कि वह कब से इलाज करा रहा था। फाइल चार्ज के रूप में 20 रुपए लिए जाने का नियम अगर अस्पताल का है तो किसी कारण से किसी व्यक्ति से फाइल चार्ज नहीं लिए जाने से प्रार्थी को कोई अतिरिक्त अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।

दूसरे आरोप पर आयोग ने कहा, कि ऐसा प्रतीत होता है, कि डॉ. राजेश अग्रवाल की नेम प्लेट लगी केबिन में भेजे व्यक्ति को ही प्रार्थी डॉ. अग्रवाल मानता क्योंकि प्रार्थी ने न तो यह कथन किया, कि वह डॉ. अग्रवाल को जानता है और जिस डॉक्टर ने उसकी पर्ची पर इलाज लिखा, वह वे नहीं, कोई और थे। वहीं दवा के 27 पैसे अधिक लेने के आरोप पर हॉस्पिटल ने जवाब में कहा, कि 50 पैसे से अधिक राशि होने पर राउंड ऑफ करके 1 रुपया लिया जाता है, जो कि सही है।

आयोग ने कहा- हमारा और अस्पताल का समय खराब किया
सभी पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने कहा, कि प्रार्थी ने गलत आधारों पर परिवाद दायर किया है। इससे अस्पताल के साथ ही आयोग का भी कीमती समय व्यर्थ हुआ है। आयोग ने परिवाद को 25 हजार रुपए की कॉस्ट लगाते हुए खारिज कर दिया गया। साथ ही प्रार्थी को आदेश दिए, कि वह दो महीने में 25 हजार रुपए हॉस्पिटल को अदा करें।

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