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डर को भगा मरीजों की जान बचाने की मुहिम:अस्पताल पहुंचते ही मरीजों को सबसे पहले डॉक्टर नहीं, टीम 21 की महिलाओं के हाथों से मिलती है ऑक्सीजन

जोधपुर2 महीने पहले
जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में पहुंचे मरीज को ऑक्सीजन देती एक महिला।
  • एमडीएम अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले मरीज को संभालती है ये महिलाएं

कोरोना संक्रमित लोगों की सांसें जब उखड़ना शुरू होती हैं तो परिजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले उनका सामना होता है टीम-21 की महिलाओं से। एमडीएम अस्पताल में ट्राली स्ट्रेचर संभालने वाली ये महिलाएं अपना जीवन खतरे में डाल वहां पहुंचे मरीजों को सबसे पहले ऑक्सीजन उपलब्ध कराती है।

जल्दबाजी दिखाने पर कई बार मरीज के परिजनों को इनकी झिड़की भी सुनने को मिल जाती है, लेकिन आखिरकार सबसे पहले मदद इन्हीं से मिलती है। भीड़ अधिक होने पर डॉक्टर की जांच शुरू होने में कई बार समय लग जाता है, लेकिन तब तक ये मरीज को मास्क पहना ऑक्सीजन देना शुरू कर देती है।

अस्पताल पहुंचते ही जब तैयार मिलती है स्ट्रैचर तो...

एमडीएम अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों के पहुंचते ही उन्हें ट्राली पर लेटा अंदर लाने का जिम्मा महिलाओं को सौंपा हुआ है। इस टीम की 21 महिलाएं अनवरत लोगों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं। एम्बुलेंस के पहुंचते ही ये महिलाएं स्ट्रेचर लेकर पहुंच जाती हैं। मरीजों को तुरंत मास्क लगा ये महिलाएं ऑक्सीजन देना शुरू कर देती है। इससे मिली राहत के बाद ही परिजन डॉक्टर की तलाश में जुटते हैं। बिना डॉक्टर के यह राहत मरीज को किसी गंभीर परिस्थिति तक पहुंचने नहीं देता।

जज्बे से भागा डर

टीम की एक सदस्य ने बताया कि गत वर्ष और इस बार के कोरोना में रात-दिन का अंतर है। अब वास्तव में अहसास हो रहा है कि ये कोरोना है। हालात बहुत विकट है। उखड़ती सांसों के साथ यहां पहुंचे मरीजों को सबसे पहले ऑक्सीजन देना हमारा मुख्य कार्य है। ताकि उन्हें कुछ राहत मिले और जान बच सके। लगातार कोरोना संक्रमितों के बीच रहने से अब इसे लेकर हमारा डर समाप्त हो चुका है।

ऑक्सीजन लगाते-लगाते उड़ गई थी सांसें

एक अन्य सदस्य ने बताया कि हालात बहुत खराब हो चले हैं। कई बार आंखों के सामने मरीज दम तोड़ देते है। कल भी एक युवक को ऑक्सीजन लगा रही थी, इस दौरान उसकी सांसें थम गई। देख कर मन खराब हो गया, लेकिन थोड़ी देर में यहां पहुंचे अन्य मरीजों के लिए हमें फिर से जुटना पड़ा। हमारी प्राथमिकता भी यही हैं कि यहां पहुंचे लोगों को जल्दी से जल्दी ऑक्सीजन उपलब्ध करवा सकें। कई बार बहुत डर लगता है। हमारे भी बच्चे हैं, लेकिन क्या करें। सावधानी बरत रहे हैं और घर जाने के बावजूद बच्चों से दूर रहना पड़ता है।