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त्योहार:कोरोना के साए के बीच लोगों ने परम्परागत तरीके से किया होलिका दहन

जोधपुर3 महीने पहले
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जोधपुर शहर के घोड़ों का चौक क्षेत्र में होलिका दहन। फोटो एल देव जांगिड़ - Dainik Bhaskar
जोधपुर शहर के घोड़ों का चौक क्षेत्र में होलिका दहन। फोटो एल देव जांगिड़
  • कई स्थान पर होलिका दहन के साथ मास्क लगाने के दिए गए संदेश

सूर्यनगरी में तेजी के साथ एक बार फिर पांव पसार रहे कोरोना से उपज रहे भय के बीच लोगों ने रविवार रात परम्परागत रूप से होलिका दहन किया। होलिका दहन के दौरान कोरोना का खौफ साफ नजर आया। कुछेक स्थान पर होली के साथ ही लगों ने मास्क पहनने की अपील करते चित्र बना लोगों को सजग किया। वहीं सार्वजनिक आयोजन पर सीमित लोगों की अनुमति के कारण इस बार लोगों में पहले जैसा जोश नजर नहीं आया। शहर के प्रत्येक गली-मोहल्ले में होलिका दहन किया गया।

शहर में कुछ स्थान पर होलिका दहन के साथ इस तरह मास्क लगाने के चित्र बना लोगों को जागरूक किया गया।
शहर में कुछ स्थान पर होलिका दहन के साथ इस तरह मास्क लगाने के चित्र बना लोगों को जागरूक किया गया।

जोधपुर में कोरोना एक बार फिर कोरोना बहुत तेजी से फैल रहा है। इस कारम होलिका दहन के आयोजन पर इसका असर साफ नजर आया। होलिका दहन के दौरान हालांकि लोग तो जुटे लेकिन उनकी संख्या पहले की अपेक्षा काफी कम रही। वहीं सभी लोग मास्क लगा कर होलिका दहन देखने के पहुंचे। महिलाओं ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए पूजा अर्चना की। कुछेक स्थान पर भीड़ अधिक होने के कारण आयोजकों की तरफ से लोगों से बार-बार अपील की गई कि वे सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखते हुए खड़े रहे और पूजा के दौरान भी इसका ख्याल रखे। कुछ स्थान पर मास्क लगाए बगैर पहुंची महिलाओं को वापस भी लौटाया गया। आयोजकों ने उनसे मास्क लगाकर आने का आग्रह किया।

होलिका दहन के लिए ग्रामीण क्षेत्र से लकड़ियां व अन्य सामग्री लेकर शहर पहुंचने वाले लोग भी इस बार अपेक्षाकृत कम संख्या में आए। जोधपुर के निकट स्थित एक गांव से ट्रैक्टर लेकर पहुंचे व्यक्ति ने बताया कि हर बार की अपेक्षा वह आधी सामग्री लेकर ही आया है। उसे उम्मीद नहीं थी कि यह भी बिक पाएगी। वहीं एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि उसके गांव से इस बार बहुत कम लोग शहर में सामग्री बेचने आए है।

इस कारण किया जाता है होलिका दहन

पौराणिक कथा के अनुसार, दानवराज हिरण्यकश्यप ने जब देखा कि उसका पुत्र प्रह्लाद सिवाय विष्णु भगवान के किसी अन्य को नहीं भजता, तो वह क्रुद्ध हो उठा और अंततः उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए, क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि नुक़सान नहीं पहुंचा सकती। लेकिन, होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ। इसी घटना की याद में इस दिन होलिका दहन करने का विधान है। होली का पर्व संदेश देता है कि इसी प्रकार ईश्वर अपने अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए सदा उपस्थित रहते हैं। होली की केवल यही नहीं बल्कि और भी कई कहानियां प्रचलित है।

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