राजस्थान में बिजली उत्पादन, फिर भी संकट:इस समय 7,223 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित, 4,310 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्र से

जोधपुर3 महीने पहले
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बड़ी संख्या में लगी सौलर प्लेट। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
बड़ी संख्या में लगी सौलर प्लेट। (फाइल फोटो)

राजस्थान सौर ऊर्जा आधारित बिजली उत्पादन के मामले में राजस्थान देश में नंबर वन है, लेकिन यहां उत्पादित होने वाली अधिकांश बिजली अन्य राज्यों को भेजी जा रही है। ऐसे में भरपूर बिजली उत्पादन करने के बावजूद प्रदेश के लोगों को बिजली कटौती की मार झेलनी पड़ रही है। सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने वाली कंपनियां अपने यहां उत्पादित होने वाली बिजली को किसी भी राज्य के साथ बेचने के लिए स्वतंत्र होती है। वे बिजली बेचने का सौदा प्लांट लगाने के साथ ही कर लेती है। ऐसे में राजस्थान को यहां उत्पादित होने वाली सारी बिजली नहीं मिल पाती है।

राजस्थान में इस समय 7,223 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित है। वहीं 4,310 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित है। हवा की गति मंदिम पड़ने के कारण पवन भर्जा से बिजली उत्पादन घटकर महज पांच से सात फीसदी ही रह गया है। वहीं सौर ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता का करीब 70 फीसदी बिजली उत्पादन होता है। सौर व पवन ऊर्जा के अधिकांश संयंत्र पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर व जोधपुर में स्थापित है। जोधपुर डिस्कॉम को को 2200 से लेकर 2800 मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा के माध्यम से ही मिल पाई। शेष उत्पादित बिजली को अन्य प्रदेश में भेजा गया।

ऐसे तय होते है सौदे

कंपनियां सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करने के साथ ही विभिन्न राज्यों के डिस्कॉम या प्राइवेट कंपनियों के साथ बिजली खरीद का करार करती है। गत कुछ वर्ष में सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली के दाम औंधे मुंह नीचे गिरे है। ऐसे में प्लांट लगाने वाली कंपनियां अन्य राज्यों में संभावनाएं तलाश करती है। राजस्थान में बिजली खरीद दर काफी कम होने के कारण ये कंपनियां अपनी बिजली अन्य राज्यों को बेच देती है। ऐसे में राजस्थान को यहां बिजली उत्पादित होने के बावजूद उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

बिजली दर ने बिगाड़ा खेल

तीन वर्ष पूर्व भड़ला सोलर पार्क में बिजली की नीलामी के लिए 2.44 रुपए प्रति यूनिट दर की गई। यह शुल्क व्यवहार्य नहीं था। यही वजह थी कि 2018-19 में 8000 मेगावाट क्षमता के टेंडर रद्द कर दिए गए थे। इसके बाद वर्ष 2019-20 में की गई नीलामियों में प्रति यूनिट 2.55 से 2.71 रुपए का आकर्षक टैरिफ रखा गया था। जबकि उत्तर प्रदेश में प्रति यूनिट 3.02 से 3.38 रुपए शुल्क रखा गया था। ऐसे में जिस राज्य से प्रति यूनिट ज्यादा भुगतान मिलता है कंपनियां उसके साथ करार कर लेती है। इस कारण राजस्थान में सौर ऊर्जा के भरपूर प्लांट होने के बावजूद पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है।

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