दीपक बनाने वालों पर कमाई का संकट:बोले- कोरोना के डेढ़ साल में कुछ भी नहीं कमाया, इस दीपावली दीपक बिकने की उम्मीद

जोधपुर2 महीने पहले
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चाक पर दीपक बनाता कुम्हार भैरुलाल। - Dainik Bhaskar
चाक पर दीपक बनाता कुम्हार भैरुलाल।

दीपावली जैसे-जैसे नजदीक आ रही है मिट्‌टी के दीपक बनाने वालों के चेहरे पर भी उम्मीदें गहराती नजर आ रही है। इन कारीगरों का कहना है कि कोरोना के चलते पिछले डेढ वर्ष से बिल्कुल भी आमदनी नहीं हुई। इस बार की दीवाली शायद अच्छी निकले। नवरात्री से ही दीपक बनाने में जुटे इन परिवारों का कहना है कि पिछली दिवाली काली ही थी इस बार की दीवाली इनके घरों को रोशन कर दे।

दिन रात मेहनत कर चाक पर एक-एक दीपक बना रहे इन परिवारों का दर्द उनके चेहरे पर साफ झलकता नजर आया। पीढीयों से इसी काम में जुटे यह परिवार मिट्‌टी के सिकोरे भी बनाते है। लेकिन इसकी डिमांड भी शादियों के सीजन में ही रहती है। कोरोना ने इस काम को भी चोपट कर रखा है।

मिट्‌टी के दीपक तैयार करता कुम्हार।
मिट्‌टी के दीपक तैयार करता कुम्हार।

65 वर्षों से इस काम में जुटे

बनाड के भैरुलाल प्रजापत का कहना है कि पिछले 65 वर्षो से मिट्‌टी के दीपक व सिकोरे बनाने का काम कर रहे है। डेढ वर्ष में बिल्कुल भी कमाई नहीं हुई। कोरोना के चलते पिछली दिपावली काली ही निकली। इस बार उम्मीद है कुछ दिपक बिक जाए। हालांकि नवरात्री से दिपक बनाने के काम में जुट गए है। बहुत ही मेहनत से यह काम कर रहे है।

चाक पर ऐसे बनते है मिट्‌टी के दीपक।
चाक पर ऐसे बनते है मिट्‌टी के दीपक।

सिकोरे भी नहीं बिक रहे

कुम्हार भैरुलाल ने बताया कि शादी के सीजन में सिकोरे बिकते है। लेकिन शादी समारोह पर रोक होने से साधारण शादी के आयोजनों में लोग ज्यादा खर्च भी नहीं कर रहे है। ऐसे में दूध के लिए खरीदे जाने वाले सिकोरो की मांग भी घट गई है। इस सीजन उम्मीद है कि फिर से विवाह समारोह में भव्यता आए और सिकोरो की डिमांड बढे।

दीपक को आकार देता कुम्हार।
दीपक को आकार देता कुम्हार।

मिट्‌टी मोकलसर से

मिट्‌टी के दीपक बनाने वाले कुम्हारों का कहना है कि दीपक के लिए खास मिट्‌टी की जरुरत होती है। यह मिट्‌टी मोकलसर से मंगवाने है। मिट्‌टी मंगवाने में भी काफी पैसा खर्च हो जाता है। जितनी लागत लगती है उतना पैसा मिलता नहीं। हाथ की मेहनत से धूप में बैठ कर एक-एक दीपक बनाते है लेकिन लोग मिट्‌टी के दीपक के प्रति कम रुचि दिखाते है।

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