चौहाबो में ठप हुई बिजली आपूर्ति:132 केवीए का ट्रांसफार्मर व केबल ब्रस्ट होने से बंद हो गई बिजली

जोधपुरएक महीने पहले
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जोधपुर शहर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड व उससे सटे बड़े क्षेत्र की बिजली गुल हो गई। यहां स्थित 132 केवीए के जीएसएस में एक ट्रांसफार्मर के ब्रस्ट होने के कारण सप्लाई बाधित हुई है। इस कारण सुबह करीब सवा पांच बजे से बिजली बंद है। जोधपुर डिस्कॉम के एमडी प्रमोद टाक का कहना है कि मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। साथ ही कुछ जीएसएस को अन्य लाइन से जोड़ सप्लाई शुरू की जा रही है। उमस भरी भीषम गर्मी में बिजली बंद होने से करीब दो लाख लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

टाक ने बताया कि चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के केस्टर बारह में स्थित जीएसएस पर 132 केवीए का ट्रांसफार्मर व इसकी लाइन आज सुबह ब्रस्ट हो गई। तकनीकी खराबी के कारण पूरे क्षेत्र की बिजली स्पालई ठप हो गई। हाथों हाथ एक टीम मौके पर पहुंची और रिपेयरिंग कार्य शुरू कर दिया है। पूरा प्रयास है कि अतिशीघ्र सप्लाई चालू कर दी जाए। उन्होंने बताया कि दो जीएसएस से सप्लाई पूरी तरह से ठप है। जबकि अन्य जीएसएस को दूसरी लाइन से जोड़ सप्लाई को शुरू किया जा रहा है।

टाक ने बताया कि इन दिनों पूरे देश में कोयला सप्लाई में आई कमी का असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है। इसके बावजूद निर्बाध बिजली आपूर्ति को सुनिश्चित किया जा रहा है। बारिश होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र में मांग घटी है। इस कारण बिजली वितरण पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं अन्य राज्योमें भी अच्छी बारिश के बाद सरप्लस बिजली आसानी से मिल रही है। ऐसे में हमें किसी प्रकार की दिक्कत फिलहाल नहीं हो रही है।

खड़ा हो सकता है बिजली संकट

मानसून सीजन में राजस्थान में एक बार फिर बिजली का संकट खड़ा हो सकता है। छत्तीसगढ़ से कोयले की सप्लाई बाधित होने लग गई है। पावर प्लांट्स के पास केवल 7 दिन का ही कोयला स्टॉक बचा है। कोयले की कमी के कारण 5 पावर प्लांट की 5 यूनिट बंद पड़ी है। जिसके कारण कस्बों-ग्रामीण इलाकों में 2-3 घंटे की अघोषित बिजली कटौती शुरू कर दी गई है। दरअसल, जहां पहले 27 रैक कोयला की रोजाना सप्लाई हो रही थी, अब 18 रैक ही मिल पा रही है। कोयले की कमी के कारण सूरतगढ़ की 250-250 मेगावट की दो यूनिट, सूरतगढ़ की सुपर क्रिटिकल 660 मेगावट की यूनिट, छबड़ा की 250 मेगावाट यूनिट और कोटा थर्मल की 210 मेगावट की एक यूनिट में प्रोडक्शन बंद पड़ा है।

कोयला संकट जारी रहा तो 4340 मेगावाट के प्लांट और ठप हो जाएंगे। इसका मतलब है राजस्थान में केवल इतनी ही बिजली पैदा हो सकेगी जिसकी सप्लाई एक या दो शहरों में ही हो सके। ऐसे में फिर दिन में 5 से 10 घंटे की कटौती करनी पड़ सकती है। इससे कुछ ही दिनों में राजस्थान में ‘ब्लैक आउट’ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

अघोषित बिजली कटौती शुरू

राजस्थान में अन प्लांड शटडाउन, मेंटीनेस, फाल्ट और रोस्टर के आधार पर फीडर से फिर बिजली कटौती की जा रही है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में 2-3 घंटे बिजली गुल हो रही है। शहरी इलाकों में भी अलग-अलग क्षेत्रवार बिजली गुल हो रही है।