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कृषि विवि का नया शोध:क्विनोआ बनेगी भविष्य की फसल अपनी खूबियों के कारण यह पाले और सूखे में रह सकती है जिंदा

जोधपुर2 दिन पहले
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क्विनोआ का उपयोग दलिया बनाने, शोरबे को गाढ़ा करने तथा उबाल कर सलाद में मिलाने में रूप में किया जाता है
  • यह एक वर्षीय, गहरी जड़ों वाली 1 से 2 मीटर लंबे पौधे वाली फसल है। इसकी खेती समुद्र तल से 3800 मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में की जा सकती है
  • क्विनोआ में कैलोरी अंडे, चीज, गाय के दूध और मां के दूध से ज्यादा होती है। कैल्शियम, फास्फोरस, तांबा, पोटाश, फोलेट भी अधिक होता है

पश्चिमी राजस्थान की विपरीत जलवायु परिस्थितियों में ऐसी फसल तैयार करने की चुनौती है जो कम संसाधनों में ज्यादा से ज्यादा खाद्यान्न दे। इसके लिए जोधपुर के कृषि विश्वविद्यालय में कई फसलों, बीज पर शोध कार्य चल रहा है। इसमें कम से कम समय में सबसे ज्यादा फसल देने के तौर पर क्विनोआ विकल्प बना है। कृषि वैज्ञानिक क्विनोआ को भविष्य की फसल कह रहे हैं। आने वाले समय में जब जनसंख्या बढ़ जाएगी। तब यह फसल ही ना केवल किसानों के जीवन स्तर को सुधारने के काम आएगी बल्कि हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति भी करेंगी।

क्विनोआ की फसल पश्चिमी राजस्थान की वर्षा की अनियमितता, अनुपजाऊ जमीन, क्षारीयता, तापमान विभिन्नता और पाले के प्रभाव के बीच में अच्छी पैदावार दे रही है। वैज्ञानिकों के शोध से पता चला कि यह फसल आसानी से नष्ट नहीं होती है और सबसे अहम कम पानी में भी मरती नहीं हैं। ऐसे में क्विनोआ एक नए विकल्प के तौर पर किसानों के सामने आ चुकी है। इस फसल में अम्लीय गुण तो हैं ही, साथ ही साथ कई पोषक तत्व भी शामिल हैं।
समुद्र तल से 3800 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ली जा सकती है
यह एक वर्षीय, गहरी जड़ों वाली 1 से 2 मीटर लंबे पौधे वाली फसल है। इसकी खेती समुद्र तल से 3800 मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में की जा सकती है। इसकी लवणता, पाला तथा सूखा सहने की असीम क्षमता है। इसकी खेती कम उपजाऊ मृदा में आसानी से की जा सकती है। क्विनोआ का बीज छोटा, चपटा व अंडाकार आकार का हल्का पीले, गुलाबी, लाल व काले का रंग का होता है।
क्विनोआ में होते हैं 20 अम्लीय गुण
क्विनोआ में ट्रिप्टोफेन, वेलिन, थिरिओनिन, आइसोल्यूसिन, ल्यूसिन, लायसिन, मेथेओनिनन, प्रोलीन, सेरीन एलाानिन सहित 20 अम्लीय गुण होते हैं। इस फसल में चावल के बराबर कैलोरी, ज्वार, गेहूं और जौ से ज्यादा कैलोरी होती है। इसके अलावा प्रोटीन भी इन सब से ज्यादा है। यहीं नहीं क्विनोआ में कैलोरी अंडे, चीज, गाय के दूध और मां के दूध से ज्यादा होती है। कैल्शियम, फास्फोरस, तांबा, पोटाश, फोलेट भी अधिक होता है।

दलिया बनाने, आटा बनाने व पॉपकोर्न में उपयोग होता है : क्विनोआ का उपयोग दलिया बनाने, शोरबे को गाढ़ा करने तथा उबाल कर सलाद में मिलाने में रूप में किया जाता है। इसका उपयोग अंकुरित बीजों के रूप में आटा बनाने, पॉपकोर्न के रूप में भी होता है। बच्चों के लिए यह पौष्टिक आहार है।
शोध में सकारात्मक परिणाम आए हैं : कृषि अनुसंधान केंद्र मंडोर और कृषि विवि में क्विनोआ पर शोध कार्य चल रहा है। शोध में यह सामने आया कि यह यहां की जटिल परिस्थिति में भी उग सकती है। इसके अलावा इसमें जो गुण पाए गए हैं वो दूसरी फसलों में बेहद कम हैं। -डॉ. एमएल मेहरिया, जनसंपर्क अधिकारी, कृषि विवि जोधपुर

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