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भारत-फ्रांस डेजर्ट नाइट-21:युद्धाभ्यास के पहले दिन जोधपुर पहुंचे दोनों देशों के फाइटर जेट, डमी मिसाइल से राफेल एक-दूसरे पर करेंगे हमला

जोधपुरएक महीने पहले
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इंडियन एयर फोर्स में पिछले साल शामिल किए गए राफेल फाइटर जेट बुधवार को पहली बार जोधपुर पहुंचे। - Dainik Bhaskar
इंडियन एयर फोर्स में पिछले साल शामिल किए गए राफेल फाइटर जेट बुधवार को पहली बार जोधपुर पहुंचे।
  • पहले दिन आपसी मुलाकात के बाद युद्धाभ्यास की रणनीति पर बातचीत हुई

इंडियन एयरफोर्स का फ्रांस के साथ साल का पहला युद्धाभ्यास बुधवार से जोधपुर में शुरू हो गया। इस युद्धाभ्यास में पिछले साल इंडियन एयर फोर्स के बेड़े में शामिल हुए फाइटर्स जेट राफेल को आजमाया जाएगा। इनका फ्रांस के राफेल के साथ आसमान में रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। अंबाला से भारतीय राफेल आज शाम जोधपुर पहुंच गए हैं। इसके साथ ही फ्रांस के चार राफेल भी पहुंच गए। दोनों सेनाओं के बीच पहले दिन युद्धाभ्यास की रणनीति पर चर्चा हुई। यह युद्धाभ्यास 24 जनवरी तक चलेगा।

आज पहले दिन दोनों देशों की एयर फोर्स के अधिकारियों ने सबसे पहले आपस में मुलाकात की। इसके बाद युद्धाभ्यास की रणनीति तैयार की। इसके तहत तय किया गया कि किस तरह दोनों देशों के विमान उड़ान भरेंगे और इनके बीच में किस तरह और किस स्तर पर मुकाबला होगा। इस दौरान दोनों देश के पायलट्स एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव शेयर करेंगे। साथ ही एक-दूसरे के कौशल से सीखेंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि एक साथ बड़ा अभियान किस तरह संचालित किया जाए। यहीं कारण है कि इंडियन एयर फोर्स के मिराज, राफेल और सुखोई जेट इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

वॉर रूम से विशेषज्ञ रखेंगे नजर
एयर बेस पर वॉर रूम स्थापित किया गया है। इसमें दोनों देशों के विशेषज्ञ बैठकर आसमान में उड़ान भरने वाले प्रत्येक विमान की गतिविधि पर बारीकी से नजर रखेंगे। इनके दिशा-निर्देश पर ही दोनों के बीच युद्धाभ्यास चलेगा। सब कुछ ऑन रिकॉर्ड होगा। पायलट्स के ग्राउड पर लौटते ही उनकी परफॉरमेंस की पूरी रिपोर्ट ये विशेषज्ञ तैयार रखेंगे। वे अभियान के दौरान उजागर होने वाली खामियों के बारे में बताएंगे। ऐसा करने से पायलट्स को अपनी गलतियों में सुधार करने का अवसर मिलेगा।

ऐसे चलेगा युद्धाभ्यास
युद्धाभ्यास के माध्यम से मुख्य रूप से हवा से हवा में मार करने की क्षमता को परखने के साथ ही कई तरह के अभ्यास किए जाते हैं। मसलन फ्रांस और भारत में से एक एयर फोर्स दुश्मन की भूमिका में होगी। दुश्मन देश का दायरा हवा में पहले से तय कर दिया जाता है। इसके बाद दुश्मन के हवाई जहाजों के हमले से स्वयं को बचाते हुए हमले किए जाते हैं। इसके तहत दुश्मन के फाइटर्स को छकाते हुए उनके हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर अपने लक्ष्य भेदने पर फोकस होता है। हवा में दुश्मन के फाइटर्स से आने वाली मिसाइलों से स्वयं के विमान की रक्षा करने के साथ अपनी मिसाइल से उसे उड़ाते हुए आगे बढ़ा जाता है। इस कार्य के लिए डमी मिसाइल का प्रयोग किया जाता है।

डमी मिसाइल के डायरेक्शन के आधार पर पता चल जाता है कि निशाना सही लगा या फिर चूक गए। रात-दिन चलने वाले अभ्यास में अलग-अलग फोरमेशन के साथ युद्धाभ्यास किया जाता है। इस तरह के युद्धाभ्यास में वास्तविक मिसाइल और अन्य हथियार काम में नहीं लिए जाते हैं। लेकिन, डमी के माध्यम से एकदम सटीक जानकारी मिल जाती है कि किसकी कितनी और कैसी तैयारी है। दुश्मन की मिसाइल के निशाने पर आने से लेकर खुद की तरफ से किसी अन्य विमान को हवा में मार गिराए जाने का प्रत्येक डेटा रिकॉर्ड होता है। इसका विमानों के नीचे आने पर अध्ययन किया जाता है। इसके आधार पर कमियों को सुधार फिर से अभ्यास किया जाता है।

सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने आर्मी डी लैयर के मेजर जनरल लॉरेंट लेर्बेट के साथ की मुलाकात

जनरल बिपिन रावत सीडीएस ने आज एयरफ़ोर्स स्टेशन जोधपुर का दौरा किया और आर्मी डी लैयर के मेजर जनरल लॉरेंट लेर्बेट के साथ फ्रेंच एमआरटीटी एसी पर एक उड़ान भरी। सीडीएस ने दोनों कंटेस्टेंट्स के साथ बातचीत की और टिप्पणी की कि वह इंडोफेंचरे को देखने के अवसर से उत्साहित थे।

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