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कार्य बाधित / रेलवे ने बारिश के पानी से बाधित होने वाले आरयूबी में पंप लगाने के लिए दस करोड़ के टेंडर तो किए, पर फंड नहीं होने से रोके कार्यादेश

Railways had made ten million tenders for installation of pumps in RUB, which was affected by rain water, but stopped the work order from not having funds
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Railways had made ten million tenders for installation of pumps in RUB, which was affected by rain water, but stopped the work order from not having funds

  • आरयूबी के रास्ते पर पानी भरने से ग्रामीण क्षेत्रों में बंद हो जाता है आवागमन, जोधपुर मंडल में 266 आरयूबी पर लगने हैं पंप
  • इस साल कोरोना महामारी के चलते फंड नहीं मिला तो बारिश के दौरान रास्ते बंद होने से बढ़ जाएगी लोगों की परेशानी

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 07:53 AM IST

जोधपुर. ट्रेनों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए रेलवे ने मानव रहित क्रॉसिंग पर सीमित उंचाई के पुल (आरयूबी) तो बना दिए, लेकिन बारिश आते ही ये रास्ते बंद हो जाते हैं। करोड़ों की लागत से बने इन आरयूबी में पानी भरने की दिक्कत के सामने रेलवे की इंजीनियरिंग फेल हो चुकी है। अब हर साल करोड़ों  खर्च कर पंप लगाने का ठेका देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

इस बार भी मानसून आ चुका है, लेकिन रेलवे जोधपुर मंडल के अधीन आने वाले ऐसे 266 आरयूबी पर पंप लगाने का ठेका नहीं दे सका है। टेंडर करने के बाद जब कार्यादेश देने की बात आई तो फंड नहीं होने का पता चला और कार्यादेश रोक दिए गए। बारिश के दिनों में इन आरयूबी से पानी नहीं निकला तो लोगों की आफत बढ़ जाएगी।
दरअसल, जोधपुर मंडल के लूणी, समदड़ी-भीलड़ी व जैसलमेर रेल खंड में मिट्टी के कटाव के साथ बारिश का पानी इन आरयूबी तक पहुंच जाता है। रेल लाइन के दोनों ओर जमीन की सतह ऊपर होने और आरयूबी का रास्ता नीचे होने के कारण पानी इनमें भरा रहता है। यहां तक कि ट्रैक्टर तक डूब जाते हैं। बसें फंस जाती हैं तो दुपहिया व छोटे वाहन चालक तो यहां से निकल ही नहीं पाते।

खासकर, ग्रामीण क्षेत्रों में पैदल चलने वाले लोगों के लिए तो ये रास्ते बंद ही हो जाते हैं। आरयूबी बनाते समय पानी निकलने के लिए जो भी जुगाड़ किया था, वह कामयाब नहीं हो सका। ऐसे में अब रेलवे के पास हर साल यहां पंप लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। इसके लिए रेलवे ऐसे आरयूबी पर मोबाइल नंबर भी लिख देता है, ताकि कोई व्यक्ति फंस जाए तो कॉल कर सहायता मांग सके।

इस बार 10 करोड़ रुपए खर्च करने की थी तैयारी, पर जेब में एक रुपया भी नहीं है
रेलवे के जोधपुर मंडल में इस मानसून के लिए भी तैयारी तो पहले से कर ली, लेकिन टेंडर प्रक्रिया फंड में उलझ कर रह गई। मंडल के लूणी, समदड़ी व भीलड़ी खंड में ऐसे 90 पुल हैं, जिनसे दो साल तक पानी निकालने के लिए 3 करोड़ रुपए से ज्यादा का टेंडर किया गया है।

इसी तरह मेड़तारोड व डेगाना खंड में 85 आरयूबी के लिए 3, वरिष्ठ मंडल अभियंता सेंट्रल के इलाके में 56 आरयूबी के लिए सवा दो करोड़ तो जैसलमेर खंड में 41 आरयूबी के लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपए का टेंडर किया गया है। कायदे से ये मानसून शुरू होने के साथ ही पूरे हो जाने थे, लेकिन अभी तक इनके लिए वर्कऑर्डर तक जारी नहीं हो सके हैं।

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