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  • Raju Has Never Been In The Army, Yet He Is Called A Soldier, A Criminal Who Has Become A Criminal In The Craze Of Earning Money.

फौजी कहलाता है कुख्यात तस्कर:पैसा कमाने की सनक में CRPF की नौकरी छोड़ी, नशे की तस्करी में खूब रुपए कमाए; 2 कॉन्स्टेबल को मारकर हुआ फरार

जोधपुर4 महीने पहले
एक लाख रुपए का इनामी है राजू फौजी।

भीलवाड़ा में 2 कॉन्स्टेबल की हत्या के बाद तस्कर राजू फौजी सुर्खियों में है। उसे पकड़ने को पुलिस ने पूरा दम लगा रखा है। उसपर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया जा चुका है। फिर भी पुलिस के हाथ नहीं लग रहा है। गांव से निकला राजूराम फौजी अपराध के दलदल में ऐसा धंसा कि निकल नहीं पाया। कम समय में अधिक पैसा कमाने की चाह में वह तस्कर बन गया। अफीम व डोडा की तस्करी से शुरू हुआ अपराध का सफर अब भी जारी है। इस दौरान उसने ताबड़तोड़ अपराध किए, पर उसके हाथ नहीं कांपे।

राजू सीआरपीएफ में नौकरी करता था।
राजू सीआरपीएफ में नौकरी करता था।

पैसा कमाने की सनक

राजू विश्नोई उर्फ राजूराम फौजी जोधपुर से सटे बाड़मेर जिले के डोली गांव का है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करते ही राजू CRPF (सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स) में भर्ती हो गया। उसकी नौकरी अच्छी चल रही थी। नौकरी लगने के बाद घरवालों ने शादी भी कर दी। उसे नजदीक से जानने वाले लोगों का कहना है कि उसमें पैसा कमाने की सनक थी। यही कारण रहा कि वर्ष 2005 में छुट्‌टी लेकर आया राजू वापस लौटा ही नहीं। यहां छोटे-छोटे अपराध करने लगा। CRPF में भर्ती होने के बाद से ही वह गांव में फौजी के नाम से प्रसिद्ध हो गया, जबकि उसने कभी फौज की नौकरी ही नहीं की।

राजू फौजी डोली गांव का निवासी है।
राजू फौजी डोली गांव का निवासी है।

अपराध की दुनिया में रखा कदम

उसके खिलाफ पहला मामला वर्ष 2005 में जोधपुर के शास्त्री नगर थाने में दर्ज हुआ। अब तक उसके खिलाफ 15 मामले दर्ज हो चुके हैं। छोटे स्तर पर तस्करी करने वाले राजू को कुछ बड़े तस्करों का साथ मिला। उनके साथ काम करते हुए राजू ने वर्ष 2013 से स्वयं के स्तर पर तस्करी शुरू कर दी। इसके बाद उसने अफीम व डोडा पोस्त की तस्करी में जमकर पैसा कमाया। राजू ने तस्करी में सहयोग के लिए कई लोगों को अपने साथ जोड़ लिया। बेखौफ तस्करी करने वाले राजू ने कई हथियार भी एकत्र कर लिए।

सुपारी भी ली

हार्डकोर अपराधी कैलाश मांजू को अपने रास्ते से हटाने के लिए उसने हाल ही में लाखों रुपए में सुपारी ली थी। वह उसे मार पाता उससे पहले मामला खुल गया और उसके कुछ साथी पुलिस की पकड़ में आ गए। इस बीच उसने अफीम की बड़ी खेप लाने के दौरान भीलवाड़ा में पुलिस के 2 कांस्टेबल की हत्या कर दी। तब से लेकर अब तक वह सुर्खियों में है। पुलिस लंबे अरसे से उसकी तलाश में है।

भरा पूरा है परिवार

राजू फौजी के परिचितों का कहना है कि उसके परिवार में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। परिवार खेती पर निर्भर रहा है। राजू के दो भाई व तीन बहन थीं। एक बहन की मौत हो गई है। साथ ही उसके खुद के तीन बच्चे हैं। अपने बच्चों को राजू ने हमेशा लाइम लाइट से दूर ही रखा।

पकड़े जा रहे हैं साथी

पुलिस ने राजू फौजी को पकड़ना अपनी नाक का सवाल बना रखा है। यही कारण है कि उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार के इनाम को बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दिया। दो कांस्टेबल की हत्या के मामले में उसके एक सहयोगी ने पुलिस के दबाव में चित्तौड़गढ़ कोर्ट में सरेंडर कर दिया। दूसरे साथी की शनिवार तड़के जालोर जिले में पुलिस के साथ मुठभेड़ हो गई। बाद में उसे पुलिस ने पकड़ लिया। इस तरह एक-एक कर राजू फौजी के साथ पुलिस की गिरफ्त में आते जा रहे हैं।