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RAS में 10वीं रैंक, फिर भी अधूरी रह गई खुशी:जिस पिता के सपने को लक्ष्य बनाकर सिद्धार्थ ने मेहनत की, कोरोना ने उसे एक महीने पहले छीन लिया; अब IAS की तैयारी में जुटे

जोधपुर20 दिन पहले
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आएएस परीक्षा में दसवीं रैंक हासिल करने वाले सिद्धार्थ का मुंह मीठा करवाते उसके रिश्तेदार। - Dainik Bhaskar
आएएस परीक्षा में दसवीं रैंक हासिल करने वाले सिद्धार्थ का मुंह मीठा करवाते उसके रिश्तेदार।

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के कल रात जारी हुए परिणाम में जोधपुर में निवास करने वाले सिद्धार्थ सांदू ने दसवीं रैंक हासिल की है। नागौर जिले के गोटन कस्बे के शिव गांव के रहने वाले सुभाष सांदू के पुत्र सिद्धार्थ सांदू के लिए यह गर्व भरी उपलब्धि की खुशी के साथ मन में एक कसक भी है। हमेशा साए की तरह साथ रहकर प्रेरित करने वाले पिता अब इस दुनिया में नहीं है।

सिद्धार्थ ने आईएएस लिखित परीक्षा भी पास कर ली है। उनका इंटरव्यू होना शेष है। इस बीच आरएएस परीक्षा का नतीजा आ गया। सेल्फ स्टडी करके खुद के नोट्स बना कर कड़ी मेहनत करने वाले सिद्धार्थ का कहना है कि जीवन का लक्ष्य पिता का सपना पूरा करना है। उसी के लिए तैयारी करता रहा, लेकिन मन की बातें कभी पूरी नहीं हो पाती है। एक माह पूर्व पूरे परिवार को कोरोना हो गया और पिता चल बसे। पिता को खो देने का सदमा बड़ा था और मैं अभी तक स्वयं को संभाल नहीं पाया हूं।

पिता का सपना किया साकार

पिता हर कदम पर मेरे सपोर्ट सिस्टम बनकर साए की तरह साथ बने रहे। यहां तक कि आएएस परीक्षा का इंटरव्यू देने गया तो वे भी मेरे साथ चले ताकि मुझे किसी प्रकार की परेशानी न हो। मन में अब सबसे बड़ी कसक यहीं है कि मैने अपने पिता के देखे सपने को साकार कर दिया, लेकिन खुशियों के इन पलों में मेरा साथ देने को वो मौजूद नहीं है।

जोधपुर में अपने रिश्तेदार कविराज देवल के निवास पर अस्थाई तौर पर रहने वाले सिद्धार्थ का कहना है कि करंट अफेयर के लिए टेलीविजन देखना और खुद को फ्रेश रखने के लिए कभी मूवी देखना पढ़ाई के साथ जारी रखा। लेकिन किताबों से मोह कभी त्यागा नहीं। फिलहाल वे आईएएस परीक्षा की तैयारी में जुटे है। उन्होंने स्वीकार किया कि आएएस बनने की खुशी तो बहुत है, लेकिन अगला लक्ष्य हासिल करने के लिए फिलहाल मेरा पूरा ध्यान उसी पर केन्द्रित है।

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