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सिंध की आजादी के लिए लड़ने वाली बहनें विस्थापन के द:रिश्ते बिखरे, वीजा खत्म, गारंटर-एजेंट करवाने लगे थे गुलामी एक रास्ता पाक का था, दूसरा समर्पण व तीसरा मौत... तीसरा चुना

जोधपुरएक वर्ष पहले
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इस दर्दनाक घटना में अपने बच्चों को खोने वाली मां और परिवार की बेटी मल्कादेवी इंसाफ मांग रही हैं। - Dainik Bhaskar
इस दर्दनाक घटना में अपने बच्चों को खोने वाली मां और परिवार की बेटी मल्कादेवी इंसाफ मांग रही हैं।
  • पाकिस्तान के सिंध की आजादी के लिए लड़ने वाली बहनें विस्थापन के दर्द से हार गईं और पूरे परिवार के साथ जान दे दी
  • भास्कर INSIGHT में पढ़िए... एक ही परिवार के 11 पाक विस्थापितों की आत्महत्या का सच

सिंधियानी तहरीक, सिंध फ्रीडम मूवमेंट सांगड़ इकाई की सदर लक्ष्मी और सहयोगी बहन प्रिया ने पाकिस्तान में हर जुल्म सहा, परंतु लड़ती रही। परिवार को बचाने के लिए पहले माता-पिता, भाई-भाभी और उनके बच्चों काे भारत भेजा, फिर तीनों बहनें भी यहां आ गईं। पांच साल का स्थाईवास लेकर यह परिवार जोधपुर में रहने लगा था, लेकिन जाेधपुर में कदम रखते ही एजेंटों व गारंटरों के चंगुल में फंस गया।

विजिटर वीजा पर आए परिवार का गारंटर वैसे तो कोई रिश्तेदार बनना चाहिए था, परंतु कोई भारतीय नागरिक नहीं था, इसलिए स्थानीय युवक को गारंटर बनाया जो विस्थापितों की बस्तियों का नेता है। इस गारंटर के बिना फॉरेनर रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (एफआरओ) उन्हें स्थाईवास की अनुमति नहीं देता। ये भी आंगणवा की विस्थापित बस्ती में रहने लगे।

यहां का मुखिया तीनों बहनों को काबू में करना चाहता था, क्योंकि इनकी दोनों भाभियां पहले से काबू में ही थीं वे पतियों के साथ नहीं रहती थीं। भाभियों को घर लाने की लड़ाई शुरू हुई तो मुखिया व गारंटर दुश्मन हो गए। तीनों जवान लड़कियों को बस्ती में रहने और गूंगे-बहरों के साथ शादी करने के लिए मजबूर किया जाने लगा।

इनसे बचने के लिए परिवार देचू के खेत में बस गया, परंतु वहां रहना गैरकानूनी था, क्योंकि स्थाईवास जोधपुर शहर का ही था। लॉकडाउन से पहले फरवरी में माता-पिता और जून में बहनों का भी पांच साल का वीजा खत्म हो गया।

अनलॉक होने पर उन्होंने फिर आवेदन तो कर दिया, परंतु नाराज मुखिया व गारंटर ने दुबारा साथ देने से इनकार कर दिया। परिवार में भी झगड़े चल रहे थे, भाभियों ने बच्चों की कस्टडी को लेकर पुलिस केस कर दिया। विवाद में लक्ष्मी को मंडोर थाने में गिरफ्तार होना पड़ा, जहां पुलिस ने भी प्रताड़ित किया।

यह बात मरने से पहले लक्ष्मी ने अपने वीडियो में भी कही। वीजा नहीं बढ़ता तो उन्हें पाकिस्तान जाना पड़ता, शहर छोड़ा इसलिए भी वीजा नियमों के उल्लंघन में पाकिस्तान धकेला जा सकता था और यहां रहते तो शोषण का शिकार होना पड़ता। पुलिस केस होने से भारत की नागरिकता मिलने में भी अड़चन पैदा हाे गई, इसलिए सभी ने जहर खाकर जान दे दी।

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रिश्तेदार : भाई केवलराम की पत्नी धांधीदेवी और रवि की पत्नी शरीफा पतियों से पहले पिता के साथ जोधपुर आई। ये दोनों मौसी-भानजी हैं। पत्नियां आई तो केवलराम व रवि ने भी वृद्ध परिजन व बच्चों का वीजा लगाकर यहां आ गए, लेकिन पत्नियों ने साथ रहने से इनकार कर दिया। इस पर बच्चों की कस्टडी का विवाद हो गया।

मुखिया: चेतन भील 2012 में धार्मिक जत्थे के साथ जोधपुर आया था। अब आंगणवा विस्थापित बस्ती का नेता है। इस परिवार को भी चेतन ने बस्ती में जगह दी थी, परंतु कुछ महीने बाद लक्ष्मी, प्रिया व सुमन भी आ गईं तो विवाद शुरू हो गया।

एजेंट : गंगाराम व भागचंद जैसे एजेंट जो पाक से आए हैं। भागचंद भी अभी भारतीय नागरिक नहीं है, परंतु विस्थापितों का एजेंट है। वह कहता है कि उसने जोधपुर में 2000 विस्थापितों को लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी) दिलाया है। यह परिवार इनके पास मदद मांगने गया था, परंतु दोनों ने साथ नहीं दिया।

गारंटर : सुनील भाटी, स्थानीय है और एक राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ है। सुनील इस परिवार का गारंटर था। भागचंद के मुताबिक चेतन नाराज हो गया तो सुनील भी गारंटी वापस लेने की धमकी देने लगा था।

एफआरओ : सीआईडी की यह ब्रांच एलटीवी देती है। ब्रांच की अधिकारी सुनीला कहती हैं कि एलटीवी के लिए गारंटर चाहिए और वह परिवार शहर के 40 किमी के दायरे से बाहर नहीं जाना चाहिए। गारंटी वापस लेने और शहर छोड़ने की स्थिति में एलटीवी रद्द हो जाता है। उनका वीजा भी खत्म हाेना ही सबसे बड़ी मजबूरी थी।

पुलिस : परिवार व गारंटर से झगड़ा मंडोर और महिला पुलिस थाने पहुंचा। पुलिस ने पूरे परिवार को पाबंद कर बुलाया ताे लक्ष्मी ने विरोध किया। उसे शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। कांस्टेबल दुर्गा व सवाई ने दुर्व्यवहार किया। लक्ष्मी के वीडियो में आरोप है कि डीएसपी ने भी पाकिस्तान धकेलने की धमकी दी।

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  • अब तक की जांच में कोई संदेह नहीं रह गया कि यह सामूहिक आत्महत्या का संवेदनशील मामला है। मौत से पहले बनाए लक्ष्मी के वीडियो और उसकी डायरी में लिखे हर पहलू की जांच कर रहे हैं। लक्ष्मी के मोबाइल की ऑडियो रिकॉर्डिंग की ट्रांसक्रिप्शन तैयार कर रहे हैं। उसने जिन-जिन लोगों के नाम लिए हैं, उनसे पूछताछ की है। सभी कड़ियों को जोड़ कर देखें तो इस परिवार की पीड़ा के कई एंगल सामने आते हैं। अपराध अपनी जगह है, परंतु ये सभी कारण भी बहुत संगीन है। विस्तृत जांच करेंगे जिम्मेदारियां तय करेंगे। दोषियों का आरोप साबित करेंगे, उसमें समय लगेगा। सिस्टम में सुधार हो जाए ऐसा प्रयास पुलिस भी करेगी। - नवज्योति गोगोई पुलिस महानिरीक्षक, जोधपुर रेंज
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