जहां देखो, वहीं दिख रहीं मरीं गायें; VIDEO:अफवाह- संक्रमित पशुओं का दूध बीमार करेगा; परेशानी- डेयरी पर सप्लाई बंद

जोधपुर4 महीने पहलेलेखक: पूर्णिमा बाेहरा

'लंपी' का कहर जारी है। हर तरफ गायों की लाशों का ढेर दिख रहा है। पशुपालक भी परेशान हैं। उन्हें जहां जगह मिल रही है, वहीं लाशों को फेंक जा रहे हैं। लाशों के सड़ने के बाद ऐसी बदबू उठ रही है कि रहना मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार को राजस्थान में गायों की मौत का आंकड़ा बढ़कर 7 हजार के करीब पहुंच गया। जोधपुर के आसपास के इलाकों में फैली अफवाह ने तो पशुपालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। संक्रमित गायों का दूध पीने से इंसान को भी बीमारी हो सकती है। ऐसी अफवाह के बाद डेयरी संचालकों ने दूध लेना बंद कर दिया है।

जोधपुर के तिंवरी समेत आस-पास के गांवों में हालात इतने विकट हैं कि लोग यहां से पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। इस इलाके में लोगों को जहां जगह दिख रही थी, मृत गायों को वहीं फेंक रहे थे। अब इन पर मिट्‌टी डालकर गाय के शवों को ढका जा रहा है। उधर, एक्सपट्‌र्स ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इस बीमारी की चपेट में आने वाले पशुओं का दूध उबालकर पीने में कोई खतरा नहीं है। कच्चा दूध पीने से जरूर बचना चाहिए।

जोधपुर के तिंवरी पंचायत में गायों को दफनाने के लिए इस तरह से गड्‌ढा किया गया है। यहां बड़ी संख्या में शवों को दफनाया जा रहा है।
जोधपुर के तिंवरी पंचायत में गायों को दफनाने के लिए इस तरह से गड्‌ढा किया गया है। यहां बड़ी संख्या में शवों को दफनाया जा रहा है।

दैनिक भास्कर ऐप ने राजस्थान के ग्रामीण इलाकों की भयावह स्थिति दिखाई तो अब प्रशासन हालात सामान्य करने में जुट गया है। हालांकि मौतों का सिलसिला अभी तक रुका नहीं है। ट्रॉलियों में भर-भरकर गायों के शव गांव के बाहर जा रहे हैं। शव पर मिट्‌टी डालने के साथ-साथ एक गड्‌ढा कर इनमें एक साथ गायों को दफनाया जा रहा है।

पढ़िए इस संक्रमण के बाद कैसे बढ़ गया पशुपालकों पर संकट

जसाराम और प्रकाश दोनों पशुपालक हैं। इनके घर का खर्च दूध सप्लाई से ही चलता था। लंपी बीमारी फैलने के बाद डेयरी संचालकों ने भी दूध लेना बंद कर दिया है। ऐसे पशुपालकों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
जसाराम और प्रकाश दोनों पशुपालक हैं। इनके घर का खर्च दूध सप्लाई से ही चलता था। लंपी बीमारी फैलने के बाद डेयरी संचालकों ने भी दूध लेना बंद कर दिया है। ऐसे पशुपालकों के सामने संकट खड़ा हो गया है।

रोजाना 2500 रुपए का नुकसान
प्रकाश..जोधपुर के बिलाड़ा तहसील के हरियाड़ा के रहने वाले हैं। 10 गायें हैं। लंपी से पहले सबकुछ ठीक चल रहा था। इस बीमारी ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। प्रकाश बताते हैं उनकी 10 गाय में से एक गाय गंभीर रूप से संक्रमित हो चुकी है। उसे अलग कर दिया है। चिंता इस बात की है कि दूसरी गायों ने अपना चारा-खाना कम कर दिया है।

इनमें लंपी के सिंप्टम्स आने लगे हैं। कुछ लोगों ने अफवाह फैलाना शुरू कर दिया है कि संक्रमित गाय का दूध पीने से नुकसान होगा। हम भी बीमार हो जाएंगे। इसके बाद से रोजाना डेयरी पर जाने वाला 40 से 50 लीटर दूध बंद हो गया है। रोजाना की 2000 से 2500 रुपए का नुकसान हो रहा है। दवा और टीके महंगे होने से अब खर्चा बढ़ने लगा है। ऐसा कुछ दिन चला तो भूखे मरने की नौबत आ सकती है।

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फोटो में दिख रहे इन रेत के टीलों के नीचे लंपी से संक्रमित गायों के शव हैं। इन पर मिट्‌टी डाली जा रही है ताकि आस-पास एरिया में बदबू न फैले।
फोटो में दिख रहे इन रेत के टीलों के नीचे लंपी से संक्रमित गायों के शव हैं। इन पर मिट्‌टी डाली जा रही है ताकि आस-पास एरिया में बदबू न फैले।

दूसरी गायों में फैल रहा है इन्फेक्शन
हरियाड़ा के रहने वाले जसाराम डारा पर भी ऐसा संकट सामने आ गया है। जस्साराम ने बताया उनकी देसी नस्ल की दो गाय थी। 20 दिन पहले एक में इन्फेक्शन हो गया तो दूध देना बंद कर दिया था। 6 दिन पहले मौत हो गई थी।

अब दूसरी गाय संक्रमित है। डेयरी पर दूध जाना बंद हो गया है। मैं प्रतिदिन 20 से 25 लीटर दूध डेयरी पर सप्लाई करता था। लेकिन, लंपी की वजह से सब कुछ बंद हो गया। रोजाना 100 रुपए की आय भी बंद हो गई है। अब इतना दूध देने दूसरी गाय खरीदे तो 30 से 35 हजार रुपए लग रहे हैं।

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गांवों में इस तरह के लड्‌डू बना गायों को दिया जा रहा है। ग्रामीण दावा कर रहे हैं कि इसमें हल्दी, घी, बाजरा और गुड़ होने की वजह से यह इम्युनिटी बढ़ाता है और संक्रमण से दूर रखता है।
गांवों में इस तरह के लड्‌डू बना गायों को दिया जा रहा है। ग्रामीण दावा कर रहे हैं कि इसमें हल्दी, घी, बाजरा और गुड़ होने की वजह से यह इम्युनिटी बढ़ाता है और संक्रमण से दूर रखता है।

गायों को बचाने के लिए इम्युनिटी लड्‌डू
गायों को बचाने के लिए उन्हें इम्युनिटी बूस्टर दिया जा रहा है। देसी तरीके से इलाज किया जा रहा है। इसके लिए घी, बाजरा, गुड, हल्दी से लड्‌डू तैयार कर गौशालाओं और गांवों में बांटे जा रहे हैं। इसके अलावा नीम और फिटकरी के पानी से सैनिटाइजर भी तैयार किया जा रहा है।

क्वारैंटाइन सेंटर तैयार किए, 11 एंबुलेंस तैयार
जोधपुर के पीपाड़ की कृषि मंडी में लगभग 30 संक्रमित गायों का इलाज किया जा रहा है। कृषि मंडी क्षेत्र में करीब 5 बीघा क्षेत्र में चारदीवारी में गायों का क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। वहां वेटरनरी डॉक्टर बीमार गायों का इलाज कर रहे हैं। इसी तरह साथिन में गांव से बाहर सेंटर बनाया गया है।

तिंवरी के उम्मेद ग्राम पंचायत में रामनिवास मंडा ने 11 एंबुलेंस तैयार की है। जो गांवों में जाकर आवारा गायों को सैनिटाइज करने, मेडिसिन और इलाज के लिए काम कर रही हैं। गायों के इलाज व सेवा के लिए 55 लोगों की टीम तैयार की गई है।

घेवड़ा गौशाला में 10 की मौत
घेवड़ा की गौशाला में बीमार 100 गायों में से एक साथ 10 की मौत हो गई। गौशाला परिसर में ही गड्‌ढे खोद कर कर्मचारियों ने गायों को दफनाया। यहां पर भी संक्रमित गायों का इलाज शुरू कर दिया है। वहीं बीमारी से बचाने के लिए गायों पर कई देसी नुस्खे अपनाए जा रहे हैं।

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जोधपुर जिले में शुक्रवार को 7 गायों की मौत हो गई। 4 गौवंश का सर्वे किया गया। इसमें 194 संक्रमित मिली।
जोधपुर जिले में शुक्रवार को 7 गायों की मौत हो गई। 4 गौवंश का सर्वे किया गया। इसमें 194 संक्रमित मिली।

दूध पीने से नहीं होता है असर
एसएमएस हॉस्पिटल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियांशु माथुर ने बताया कि अभी तक की स्टडी में लंपी वायरस से इंफेक्टेड पशु का दूध पीने से इंसान पर असर का मामला सामने नहीं आया है। इसका बड़ा कारण है कि हम दूध को गर्म करके ही पीते हैं।

गर्म करने पर दूध में मौजूद बैक्टीरिया व वायरस नष्ट हो जाते हैं। साथ ही ह्यूमन बॉडी में एक ऐसा एसिड होता है, जोकि खुद ही ऐसे वायरस को खत्म कर देता है। हालांकि बीमार पशु का दूध पीने पर बछड़े जरूर संक्रमित हो सकते हैं।

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