मारवाड़ में अकाल की आहट:सावण पेली पंचमी, मेह न मांडै आळ, पिव पधारों माळवे, मैं जाऊं मौसाळ

जोधपुरएक वर्ष पहले
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मारवाड़ में एक बार फिर अकाल की आहट सुनाई दे रही है। सदियों से अकाल की पीड़ा भोगने को अभिशप्त मारवाड़ में इस बार मानसून पूरी तरह से रूठा हुआ नजर आ रहा है. पश्चिमी राजस्थान के लोग बारिश को तरस रहे है और प्रदेश के अन्य हिस्सों में झमाझम बारिश हो रही है। साथ ही कुछ स्थान पर बाढ़ के हालात पैदा हो गए। दूसरी तरफ मारवाड़ के किसान एक अदद जोरदार बारिश के इंतजार में नजरें गढ़ाए बैठे है। वहीं मारवाड़ में प्रचलित कहावतें भी अकाल का इशारा कर रही है।

सावन माह आधा बीतने को है, लेकिन जोधपुर, बाड़मेर, जालोर व जैसलमेर के लोगों को अभी तक मानसून के मेहबान होने का इंतजार है। दूसरी तरफ मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने लोगों का दिल तोड़ कर रख दिया। पूर्वानुमान में कहा गया है कि अगले दो दिन में कुछ स्थान पर हल्की बारिश हो गई तो ठीक नहीं तो फिर बीस अगस्त तक बारिश के कोई आसार नहीं है।

जोधपुर में एक जून से 6 अगस्त तक सामान्यतया 167.8 एमएम बारिश हो जाती है। इस बार अब तक इससे पच्चीस फीसदी कम यानि 125.3 एमएम बारिश ही हो पाई है। कुछ दिन से बारिश का मौसम बना हुआ अवश्य है, लेकिन बादल है कि बरसने का नाम ही नहीं ले रहे है। अरावली पर्वतमाला के उस तरफ बादल जमकर बरस रहे है, लेकिन बरसने वाले बादल इस पर्वतमाला को पार कर मारवाड़ तक नहीं पहुंच पा रहे है। ऐसे में यहां बारिश नहीं हो रही है।

बेहद कम बारिश

समूचे मारवाड़ में इस बार बारिश बेहद कम हुई है। कुछ स्थान पर रिकॉर्ड में अच्छी बारिश अवश्य दर्ज हुई, लेकिन अधिकांश पानी एक ही दिन में बरस गया। ऐसे में रिकॉर्ड को दुरस्त हो गया, लेकिन किसानों की उम्मीदों पर मानसून खरा नहीं उतर पाया। पूरे मारवाड़ के किसानों को मानसून के सक्रिय होने का बेसब्री से इंतजार है। कई स्थान पर किसान बुवाई कर चुके है। अब यदि समय रहते बारिश नहीं हुई तो अंकुरित हो चुकी फसलों के जलने का खतरा खड़ा हो जाएगा।

मारवाड़ की कहावतों में अकाल का संकेत

मारवाड़ में अकला को लेकर कई कहावतें प्रचलित है। यदि उन्हें देखा जाए तो लग रहा है कि अकाल के आसार बन रहे है। कहावत है कि

जेठ मास चाले पुरवाई, ते दिन सावण धूड़ उड़ाई

यानि जेठ मास में पुरवाई हवा चले तो सावन मास में रेत के गुबार उड़ेंगे। इस बार यह कहावत चरितार्थ होती नजर आ रही है। सावन सूखा ही निकलता नजर आ रहा है। अकाल के बारे में एक अन्य कहावत है कि

सावण पेली पंचमी, मेह न मांडै आळ

पिव पधारों माळवे, मैं जाऊं मौसाळ…

अर्थात पत्नी अपने पति से कहती है कि सावण मास की वदी पंचमी के बावजूद बारिश के आसार नजर नहीं आ रहे है। इसका मतलब है कि अकला पड़ना निश्चित है। आप मालवे जाकर कमाई करो और तब तक मैं अपने पीहर चली जाती हूं।

एक अन्य कहावत भी प्रचलित है कि...

सावण पैली पंचमी, वीज गाज नहीं मेह

क्यूं हळ जोते बावळा, निहचै उड़ै खेह

यानि सावण मास की पहली पंचमी को बादलों व बिजली की गर्जना तक सुनाई नहीं दे और बारिश नहीं हो रही है तो हल जोतने की आवश्यकता नहीं है। अवश्य ही अकाल पड़ेगा और रेत उड़ेगी। कमोबेस ऐसे ही हालात बने हुए है।

क्या कहना है मौसम विभाग का

मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 7 से 10 अगस्त तक पश्चिमी राजस्थान में छुटपुट स्थानों पर हल्के से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं 13 से 19 अगस्त तक के सप्ताह के दौरान राज्य के अधिकांश भागों में बारिश की कमी रहने तथा सामान्य से कम वर्षा दर्ज होने की संभावना है। 20 अगस्त के आसपास राज्य में बारिश की गतिविधियों में पुनः बढ़ोतरी होने की संभावना है।