डाॅक्टर्स डे विशेष / जान जाेखिम में डाल काेराेना मरीजाें की जिंदगी बचाने में जुटे वरिष्ठ डाॅक्टर

Senior doctors engaged in saving lives of Kareena patients in danger
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Senior doctors engaged in saving lives of Kareena patients in danger

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 07:14 AM IST

जोधपुर. कोरोना के इस काल मे सरकार ने जहां 60 साल और अधिक उम्रवालों को सुरक्षित रहने की हिदायत दी, वहीं अधिक उम्र के डॉक्टर हमारे शहरवासियों के स्वास्थ्य और कोरोना के प्रबंधन में जुटे रहे। पिछले तीन माह में कोरोना से जुड़ी केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार शहरवासियों के लिए अस्पताल ओर कोविड केयर सेंटर में बेहतर मैनेजमेंट करने में घर परिवार से दूर रहकर मरीजों के प्रति अपने धर्म को निभाया।
डॉ. पीसी व्यास (64): कोरोना पॉजिटिव शवों के निस्तारण की जिम्मेदारी निभाई

फोरेंसिक मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. पीसी व्यास ने बताया कि 1975 में जब मैं बीएससी द्वितीय वर्ष की परीक्षा देकर पीएमटी की तैयारी कर रहा था। उस काल में जीवन गतिमान था। पूरे देश में अनुशासन महसूस किया जा रहा था। ऑफिस और रेल सभी समय पर चल रहे थे। लेकिन कोरोनाकाल में जीवन ठहर सा गया था। अस्पताल में भी भीड़ कम हो गई। व्यक्ति भौतिकवाद से प्रकृति की तरफ लौट आया।

अस्पताल में स्वयं का ध्यान रखते हुए स्टाफ के साथ काे-ऑर्डिनेशन बनाकर काम किया। मोर्चरी में आने वाले शवों का कोरोना रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार निस्तारण करने की पूरी जिम्मेदारी निभाई। इसके साथ विभाग में आने वाले दूसरे एमएलसी प्रकरणों को पूर्व की ही भांति जांच जारी रही जो पूर्ण सावधानी से की। कई बार परिजनों का विरोध होने पर उनकी समझाइश कर मामलों काे निपटाया।

डॉ. सुनील कुमार बिष्ट (57) : घर-परिवार छोड़ सर्किट हाउस में रह काम किया

जोन उपनिदेशक चिकित्सा विभाग और जिला प्रभारी कोविड डाॅ. बिष्ट काे स्वाइन फ्लू में अच्छा काम करने के चलते विभाग ने 14 अप्रैल को काेराेना का चार्ज दिया। तब से लगातार फील्ड विजिट, शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण कहीं भी पॉजिटिव मरीज आने पर वहां व्यवस्था, परिजनों को क्वारेंटाइन की व्यवस्था देखना आदि किया।

घर परिवार को छोड़कर सर्किट हाउस में रहे। देर रात तक पॉजिटिव आने पर मरीजों को कोविड केयर सेंटर में व्यवस्था कराने का पूरा काम किया। यहां तक की चिकित्सा विभाग के कोई अधिकारी साथ में नहीं होने पर भी अकेले ही पॉजिटिव मरीजों की व्यवस्था देखने पहुंचे। इसके साथ विभाग का रूटीन काम भी बखूबी निभाया।

 डॉ. श्याम माथुर (62)
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम माथुर का कहना है जब स्वाइन फ्लू आया तब भी टीमवर्क काम आया। अब कोरोना में भी वहीं टीमवर्क, मेरे विभाग के प्रत्येक डॉक्टर, दूसरे विभाग, नर्सिंग स्टाफ की मदद से ही कोरोना की जंग हम पाए हैं। अप्रैल, मई तक मरीजों का लोड एमडीएम और एमजीएच पर था। इसके लिए टीम तैयार कर केंद्र और राज्य सरकार की कोरोना को लेकर आ रही गाइडलाइन के अनुसार बेहतर मैनेजमेंट का काम किया। 2008-09 में स्वाइन फ्लू के समय में किया काम का अनुभव काम आया।

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