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कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस ने उड़ाए होश:एमडीएम अस्पताल में अलग से वार्ड तैयार, 16 मरीजों का हुआ ऑपरेशन, बाजार में गायब हुई दवा, भटक रहे है मरीज के परिजन

जोधपुरएक वर्ष पहले
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जोधपुर का मथुरादास माथुर अस्पताल। यहां ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए आज से नया वार्ड बनाया गया है। - Dainik Bhaskar
जोधपुर का मथुरादास माथुर अस्पताल। यहां ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए आज से नया वार्ड बनाया गया है।
  • एम्स में 50 से अधिक मरीज भर्ती
  • लिखवा कर ले रहे है दवा आने पर शुरू होगा इलाज

जोधपुर के लोग अभी तक कोरोना की सुनामी से उबर ही नहीं पाए है कि ब्लैक फंगस ने उनके होश उड़ा कर रख दिए है। ब्लैक फंगस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। बढ़ते मामले देख एम्स में पहले से दो वार्ड ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए आरक्षित कर दिए गए है। वहीं आज इसी तर्ज पर एमडीएम अस्पताल में भी एक वार्ड अलग से गठित कर दिया गया। एम्स में पचास से अधिक मरीज भर्ती है, लेकिन ब्लैक फंगस के इलाज में आवश्यक दवा नहीं मिल पा रही है। जबकि एमडीएम अस्पताल में 17 मरीज भर्ती है। इनमें से 16 के ऑपरेशन हो चुके है। इन मरीजों के लिए आवश्यक दवा अस्पताल में उपलब्ध है, लेकिन बहुत सीमित संख्या में।

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एसएस राठौड़ ने बताया कि ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले ध्यान में रख एमडीएम अस्पताल में अलग से वार्ड तैयार करवा दिया गया है। इस वार्ड का नाम म्यूकर वार्ड रखा गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक हमारे यहां 17 मरीज भर्ती है। इनमें से सोलह में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है। एक की रिपोर्ट मिलना शेष है। आज छह मरीजों के ऑपरेशन किए गए। शेष दस के ऑपरेशन पहले ही किए जा चुके है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एमके आसेरी ने बताया कि ब्लैक फंगस से निपटने के लिए डॉ. पुनीत नाग की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स बनाई गई है जिसमें डॉ महेंद्र चौहान, डॉ. रेनू चौधरी, डॉ पुनीत सिंह व डॉ मुकेश कुमार को शामिल किया गया है। ताकि मरीज को किसी भी प्रकार का इलाज तुरंत मिल सके। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. भारती सोलंकी ने बताया कि आज छह ऑपरेशन किए गए है। हमारी टीम लगातार ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज करने में जुटी है। अस्पताल में हमें अब तक तीन मरीजों की आंख को निकालना पड़ा।

बाजार में नहीं मिल रही दवा

ब्लैक फंगस प्रदेश में महामारी घोषित हो चुकी है, लेकिन इसके उपचार के लिए भी हालात तकरीबन कोरोना जैसे ही हैं। कुछ दिन पूर्व तक कोरोना के गंभीर मरीजों के परिजन रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए भागदौड़ कर रहे थे। अब वैसे ही पूरे जिले में ब्लैक फंगस मरीजों के परिजन जरूरी इंजेक्शन एम्फोटेरिसिन बी और दवाओं के लिए दर-दर भटक रहे हैं। हाल यह है कि एम्स जैसे बड़े संस्थान में जोधपुर और दूसरे जिलों से आए सबसे अधिक मरीज ब्लैक फंगस के भर्ती हैं। इन मरीजों के लिए जरूरी दवाएं और इंजेक्शन ही नहीं मिल रहे हैं। परेशान और बेबस परिजन पहचान के लोगों और सोशल मीडिया में एक जिले से दूसरे जिले और दूसरे राज्यों में ब्लैक फंगस की दवाओं के लिए गुहार लगा रहे हैं। एम्स में ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज पिछले कई माह से किया जा रहा है। धीरे-धीरे मरीज बढ़ते गए, लेकिन प्रशासन डिमांड के अनुसार जरूरी दवाओं की व्यवस्था नहीं कर पाया। अब तो हालात यह हैं कि एम्स में आ रहे मरीजों को पहले ही कहा जा रहा है कि दवाएं नहीं हैं, दवा आने पर ही इलाज होगा।

दो वार्ड में सिर्फ ब्लैक फंगस के मरीज

ब्लैक फंगस के 50 से अधिक मरीज एम्स के 2 वार्ड में भर्ती हैं। इनके लिए जरूरी इंजेक्शन एम्फोटेरिसिन-बी नहीं है। एम्स में कार्यरत चिकित्साकर्मी ने बताया कि यदि एम्स में कोई यहीं का डॉक्टर भी भर्ती हो जाए, तो भी लगाने के लिए दवाएं नहीं हैं। इसलिए मरीज को भर्ती के समय ही यह बात बता रहे हैं। इससे कि मरीज यदि कहीं दूसरे संस्थान में जाकर इलाज लेना चाहे तो उसमें देरी ना हो।

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