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जोधपुर में जेल ब्रेक, सुनियोजित साजिश:सिपाहियों की आंखों में मिर्ची और सब्जी का घोल फेंका, महिला गार्ड व इंचार्ज को धक्का दे फलोदी जेल से भागे 16 बंदी, बाहर स्कॉर्पियो कर रही थी इंतजार

जोधपुर2 महीने पहले
  • रात 8 बजे की घटना, जेलकर्मी ना चिल्लाए, ना बंदियों का पीछा किया
  • जिलेभर में ए-ग्रेड नाकाबंदी, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर व नागौर सीमाएं सील, कोई सुराग नहीं

फलोदी में कचहरी परिसर स्थित उप कारागृह से सोमवार रात 8 बजे एक साथ 16 बंदी फरार हो गए। दिन में बंदी बैरकों के आगे खुली जगह में थे। शाम बाद इन्हें बैरक में डाला जा रहा था। इसी दौरान अंदर से बंदियों ने गेट का ताला खोल रहे कांस्टेबल, पास खड़े कार्यवाहक जेलर व एक सिपाही को धक्का दिया और बाहर भाग वहां खड़े सिपाही की आंखों में मिर्ची और सब्जी का घोल फेंक दिया। फिर आगे तैनात महिला गार्ड को उठाकर दूसरी ओर फेंक फरार हो गए।

इस तरह जेल से भागकर बाहर आते सभी कैदी।
इस तरह जेल से भागकर बाहर आते सभी कैदी।

यह कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि पूरी तरह सुनियोजित साजिश थी, क्योंकि भागने के बाद जेल के बाहर पहले से एक स्कॉर्पियो खड़ी थी, जिसमें बैठकर सभी एक साथ फरार हो गए। अधिकतर बंदी तस्करी और हत्या के आरोपी हैं। एडीएम हाकम खान, एसडीएम यशपाल आहुजा, डीएसपी पारस सोनी, फलोदी थानाधिकारी राकेश ख्यालिया मौके पर पहुंचे।

बंदियों की तलाश में जिले और आसपास ए-ग्रेड की नाकाबंदी की गई है। साथ ही पड़ोसी जिलों बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर व नागौर की सीमाएं सील कर दी गई, लेकिन देर रात तक एक भी बंदी का सुराग नहीं लग पाया। इसे प्रदेश का अब तक का दूसरा सबसे बड़ा फरारी कांड बताया जा रहा है। इससे पहले फरवरी, 2010 में चित्तौड़गढ़ की जिला जेल से एक साथ 23 कैदी फरार हो गए थे।

जेल के बाहर स्कॉर्पियो पहले से ही कर रही थी इंतजार

जेल से निकलने के बाद सभी बंदी सड़क पर एक साथ भागे। कुछ दूरी पर ही एक स्कॉर्पियो पहले से उनके इंतजार में खड़ी थी। एक के बाद एक सभी 16 बंदी उसमें बैठकर भाग निकले। यह पूरा घटनाक्रम रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। फुटेज से शंका पैदा होती है कि यह सब संयोगवश नहीं, बल्कि साजिश के तहत हुआ है। जेलकर्मियों की मिलीभगत की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

संदेह इसलिए भी: वारदात के आधे घंटे बाद सिपाहियों की ड्रेस फटी कैसे?

मामले में मिलीभगत का पूरा संदेह है। घटना के तुरंत बाद सिपाही मदनपाल (वर्दी में) और राजेंद्र गोदारा (हरे टी शर्ट में) चोटिल महिला सिपाही के पास खड़े थे तब दोनों के कपड़े सही थे, लेकिन आधे घंटे बाद जब ये दोनों जब अफसरों को बयान दे रहे थे, तब इनके कपड़े फटे हुए थे। इन्होंने बंदियों के साथ धक्का-मुक्की होने की बात कही।

अंदर का गेट खोला, बाहर के गेट में ताला नहीं थी
जेल के दो गेट हैं। बंदियों को बैरकों में डालने व निकालने के वक्त दोनों में से एक पर ताला होना चाहिए, लेकिन सोमवार को घटना के वक्त बाहरी गेट पर ताला नहीं था और अंदर का गेट वैसे ही खोला गया था। ऐसे में बंदियों के सामने न दीवार फांदने की नौबत आई और न ही कोई हथियार चलाने की। कचहरी परिसर में उप कारागृह सिर्फ विचाराधीन बंदियों को रखने के लिए है। 40 गुणा 60 फीट के एरिया में ही यह जेल बनी हुई। यहीं एसडीएम कोर्ट है। इतनी छोटी सी जगह में तीन बैरक हैं। साथ ही जेल का ऑफिस व कर्मचारियों के रहने के क्वार्टर हैं।

17 की क्षमता, बंदी 60 थे, स्टाफ 16 में से सिर्फ 4
जेल में बंदी क्षमता 17 की है लेकिन जेल में हमेशा ही बंदी ज्यादा रहते हैं, सोमवार को जेल में 60 बंदी थे। जेल के लिए जेलर सहित 16 का स्वीकृत स्टाफ है, लेकिन नियुक्त 9 ही हैं। 3 मार्च काे जेलर निलंबित होने से यह पद भी रिक्त है। वारदात के समय 4 कर्मचारी ही थे जबकि 5 अवकाश पर बताए गए हैं। जेल की सुरक्षा के लिए अलग से स्टाफ की व्यवस्था नहीं है।

एसडीएम ऑफिस में थे लेकिन सूचना नहीं दी: जेल एसडीएम ऑफिस से 20 फीट दूर सामने है। उस वक्त एसडीएम यशपाल आहुजा ऑफिस में ही थे, लेकिन कर्मचारियों ने उन्हें वारदात की सूचना नहीं दी। न शोर मचाया और न ही बंदियों का पीछा करने की कोशिश की।

फलौदी जेल से भागे बंदियों को पकड़ने के लिए बीकानेर के खाजूवाला सहित अन्य जगह देर रात नाकाबंदी की गई।
फलौदी जेल से भागे बंदियों को पकड़ने के लिए बीकानेर के खाजूवाला सहित अन्य जगह देर रात नाकाबंदी की गई।

पुराने जेलर सस्पेंड, नए डिप्टी जेलर ने अभी ज्वॉइन नहीं किया
जेल में अनियमितताएं मिलने पर DG जेल ने हाल ही में यहां के एक जेलर और दो डिप्टी जेलर को सस्पेंड किया था। आज (मंगलवार) को एक डिप्टी जेलर को यहां ज्वॉइन करने वाले हैं। अचानक इतनी बड़ी संख्या में कैदियों के भागने से जेल प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है। ज्यादातर कैदी NDPS एक्ट में बंद हैं। कुछ पर हत्या और हत्या की कोशिश के भी केस दर्ज हैं। SP जोधपुर ग्रामीण अनिल कयाल ने क्षेत्र के सभी थाना प्रभारियों को तलाशी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

सांसद शेखावत ने कहा- जेल व्यवस्था नाजुक
सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि कांग्रेस शासन काल में राज्य की कानून-व्यवस्था को सूली पर चढ़ाने के बाद अब कारागृह व्यवस्था की भी हालत नाजुक है। उन्होंने तंज कसा कि शुक्र है राज्य के पड़ोसी देश से लगे बॉर्डर की व्यवस्था इनके पास नहीं है, अन्यथा सरकार अपनी विफलताओं में विश्व में अव्वल आती।

जेलर की जुबानी: इंचार्ज को धक्का, बाहर बैठी महिला प्रहरी को पटका
सोमवार को जेल में 60 बंदी थे। रात 8 बजे कुछ बंदियों को बैरक में डाला जा रहा था। मैं खुद सिपाही राजेंद्र के साथ अंदर जाने के लिए गेट पर पहुंचा था। गेट पर तैनात कांस्टेबल सुनील कुमार ने जैसे ही ताला खोलकर कुंडी को सरकाया तभी बंदियों ने अंदर की ओर से दरवाजे को जोर का धक्का दिया और बाहर निकल आए। हमने उन्हें रोकना चाहा, लेकिन वे 15-16 की संख्या में थे, हम नीचे गिर गए। सभी बंदी बाहरी गेट की ओर भाग गए।

वहां तैनात सिपाहियों से उनका सामना हुआ तो उन्होंने मिर्ची व सब्जी का घोल उनकी आंखों में फेंक दिया। आगे कोर्ट की गार्ड मधु देवी तैनात थीं, बंदियों ने उसे उठाकर दूसरी ओर फेंक दिया, फिर फरार हो गए। (जैसा कार्यवाहक जेलर रवि बक्श ने बताया)

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