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बिलाड़ा स्थित आई माता मंदिर:अब तक कोई विद्वान नहीं बता पाया- आई माता ने किस भाषा में लिखी थी पुस्तक

बिलाड़ाएक महीने पहले
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  • चमत्कारिक केशर ज्योति के लिए विश्वविख्यात है बिलाड़ा का आई माता मंदिर, कोरोना के कारण बंद
  • साढ़े पांच सौ साल पहले आईमाता द्वारा मंदिर में रखे 5 नारियल आज भी वैसी ही स्थिति में

बिलाड़ा स्थित आई माता मंदिर चमत्कारिक केशर ज्योति के लिए विश्वविख्यात है। साढ़े पांच सौ साल पुराना ये आईमाता का मंदिर वर्तमान में प्राचीन व आधुनिक स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण है। जहां पर केशर ज्योति ही आई माता की उपस्थिति का प्रमाण है। मंदिर का निर्माण सर्वप्रथम दीवान करमसिंह ने करवाया था। केशर ज्योत के रूप में विद्यमान आई माता के दर्शनार्थ देश के कौने कौने से भक्तगण आते हैं।

लेकिन साढ़े पांच सौ सालों में पहली बार कोरोना संक्रमण के कारण मंदिर बंद है। आईपंथ के धर्मगुरु दीवान माधवसिंह ने बताया कि मंदिर में माताजी द्वारा रखे गए पांच नारियल वैसी ही स्थिति में है, यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। पुजारी भंवर महाराज ने बताया कि नवरात्रा व विशेष दिनों में भक्तगण सुबह आरती के समय नारियल के दर्शन लाभ ले सकते हैं।

आईमाता द्वारा लिखित किताब इतने सालों बाद भी पहेली बनी हुई है। उसमें लिखी भाषा को कोई नहीं समझ पाया है। दीवान ने बताया कि ये किताब किस लिपि में लिखी गई, अभी तक कोई नहीं जान पाया है। इसके लिए यूनिवसिटी में उसकी छाया प्रति भेजी गई और कई लोग भी लेकर गए लेकिन अभी तक ये पहेली बनी हुई।

मान्यता: मनाही के बाद भक्तों के दरवाजा खोलते ही विलोप हो गईं थीं माता

मान्यता है कि संवत् 1561 के चैत सुद बीज को आईमाता ने अपने भक्तों को इकट्ठा किया। प्रथम दीवान गोविंददासजी को बिठाकर कहा कि मैं 7 दिनों तक गुप्त तपस्या करना चाहती हूं। तब तक मंदिर के किंवाड़ मत खोलना। तब लोग बोले कि 7 दिन तक बिना दर्शन कैसे रहेंगे। भक्तों की बात सुनकर आईमाता ने कहा कि मैं तुम्हारी भक्ति से खुश हूं। आप लोग दीवान गोविंददास को मेरा रूप समझकर दर्शन करना, मैं मेरी ज्योति प्रकट करूंगी।

इतना समझाकर आईमाता मंदिर में किंवाड बंद कर तपस्या पर बैठ गईं। तीन चार दिन तक भक्तों ने संयम रखा लेकिन इसके बाद भक्तों ने माताजी को देखने दरवाजे खोल दिए। इसके साथ ही जहां आईमाता विराजमान थीं वहां से विलोप हो गए। उनकी जगह मोजड़ी, माला, नारियल, वस्त्र और एक किताब मिली। केशर ज्योति से मंदिर प्रकाशमान हो रहा था।

एक साल में चार मेले

आईमाता मंदिर में चैत सुद बीज, वैशाख सुद बीज, भादवा सुद बीज, माघ सुद बीज के अवसर पर 4 मेले भरे जाते हैं। पूर्व उपराष्ट्रपति भैरूसिंह शेखावत, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित कई बडे नेता, अधिकारी दर्शन कर चुके हैं। आई माता की बैल का बधावणा होता है। ये गांव गांव जाकर धर्म का प्रचार करती है।

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