2 करोड़ लोगों तक पहुंचेगा साफ पानी:क्लोजर के बाद दूषित पानी से निजात पाने को बनेगी विशेष योजना

जोधपुर7 महीने पहले
इंदिरा गांधी नहर।

इंदिरा गांधी नहर में क्लोजर के बाद पानी की आवक शुरू होने के साथ आने वाले दूषित पानी की समस्या से निपटने के लिए इस बार विशेष योजना बनाई गई है, ताकि विभिन्न शहरों की जलापूर्ति में यह पानी शामिल नहीं हो सके। प्रदेश के दस जिलों के करीब दो करोड़ इस पानी पर निर्भर है। इंदिरा गांधी नहर में क्लोजर के बाद 21 मई से पानी छोड़ने की योजना है। इस बार पानी 20 मई को ही छोड़ दिया जाएगा। पहले दिन का पानी नहर में उपलब्ध दूषित पानी को लेकर आगे बढ़ेगा। इसके बाद इसे खुले में छोड़ दिया जाएगा। इसके अगले दिन से साफ पानी की आवक नहर में शुरू हो जाएगी।

जलदाय विभाग के चीफ इंजीनियर नीरज माथुर का कहना है कि दूषित पानी की आवक से निपटने के लिए इस बार विशेष योजना तैयार की गई है। नहर में साठ दिन तक चले मरम्मत के बाद 21 मई को हरिके बैराज से पानी छोड़ने की योजना है। अब एक दिन पहले ही पानी छोड़ दिया जाएगा। पहले दिन आने वाला पानी अपने साथ दूषित पानी को लेकर आगे बढ़ेगा। इसके बाद इस पानी को रेगिस्तानी क्षेत्र में खुले में छोड़ दिया जाएगा। ताकि दूषित जल की जलापूर्ति नहीं हो। 21 मई से आने वाले पानी को जलापूर्ति में काम लिया जाएगा। 21 मई से आने वाले पानी को डिग्गियों में भरा जाएगा।

पंजाब में छोड़ा जाता है दूषित पानी
पंजाब के हरिके बैराज से निकलने वाली आईजीएनपी प्रवाहित होने के बाद जब राजस्थान में प्रवेश करती है। यही वह क्षेत्र है, जहां से ये सारी गंदगी और औद्योगिक केमिकलयुक्त अपशिष्ट नहर में बहा दिए जाते हैं। हर साल नहर बंदी के बाद जब पानी की आपूर्ति शुरू होती है, तो कई दिनों तक काला पानी ही प्रवाहित होता है। पंजाब के काला सिंधिया नाले से फैक्ट्रियों का दूषित व केमिकल युक्त पानी नहर में छोड़ा जा रहा है। हरिके हैड पर पोंग बांध के अलावा थोड़ा बहुत भाखड़ा और रोपड़ से भी पानी आता है। नदियों के बहाव क्षेत्र के किनारे पंजाब के कई शहर आते हैं। वहां लगी फैक्ट्रियों का केमिकल और सीवरेज का पानी नदी के बहाव एरिया में डाला जाता है।

गत वर्ष परेशानी का सबब बना था दूषित पान
गत वर्ष इंदिरा गांधी नहर में क्लोजर के बाद पानी की आवक शुरू होने के साथ दूषित पानी आ गया था। इस पानी को सैटल करने में दो दिन का समय लग गया था। ताकि इसमें आई गंदगी नीचे बैठ सके। हालांकि जलदाय विभाग का दावा था कि जोधपुर तक दूषित पानी नहीं पहुंचा है। लेकिन शुरुआती पानी के साथ हमेशा से यह दिक्कत रही है।

सात से दस दिन में जोधपुर पहुंचता है पानी
हरिके बैराज से इंदिरा गांधी नहर में पानी छोड़े जाने के सात से दस दिन में यह पानी जोधपुर पहुंचता है। यदि रास्ते में सारी डिग्गियों को पहले भरा जाता है तो इसे राजीव गांधी लिफ्ट नहर के मुहाने पर पहुंचने में सात दिन लग जाते है। यदि पानी को बीच में नहीं रोका जाए तो यह चार दिन में पहुंच जाता है। वहीं लिफ्ट नहर से पानी को जोधपुर पहुंचने में तीन दिन का समय लगता है। इंजीनियरों का कहना है कि सात से दस दिन तक लगातार प्रवाहित होने से यह पानी स्वत: ही साफ हो जाता है। ऐसे में जोधपुर तक दूषित पानी नहीं पहुंच पाता है।

खुले में बहाना पड़ा था दूषित जल
दस वर्ष पूर्व इंदिरा गांधी नहर में क्लोजर के बाद दूषित जल लिफ्ट नहर के जरिये जोधपुर तक आ पहुंचा था। तब इस पानी को खुले में बहाना पड़ा था। चीफ इंजीनियर माथुर का कहना है कि जोधपुर तक पानी पहुंचने से पहले इसके सैंपल लेकर पूरी जांच की जाएगी। सभी मानक पर खरा उतरने पर ही इसका पेयजल के लिए रूप में वितरण किया जाएगा।

दो करोड़ लोग पीते है पानी
इंदिरा गांधी नहर राजस्थान के दस जिलों के लोगों को लिए लाइफ लाइन बनी हुई है। करीब दो करोड़ लोग जलापूर्ति के लिए इस नहर पर निर्भर है। ऐसे में जलदाय विभाग इस बार दूषित पानी से निपटने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है।