ग्राउंड रिपोर्टलाशों का ढेर...दफनाने की जगह नहीं:लंपी का डर, घर छोड़ रहे परिवार; गाय के दूध की नहीं डिमांड

जोधपुर12 दिन पहलेलेखक: पूर्णिमा बोहरा

ये हैं केवलराम...। जोधपुर शहर से 50 किलोमीटर दूर तिंवरी के पास घेवड़ा गांव के रहने वाले। इस गांव के सरपंच भी। खुद का मकान है। लेकिन, इनका परिवार खुद का घर छोड़ खेत में जाकर रहने लगा है। कारण है, लंपी से हो रही गायों की मौत। लाशों का ढेर इतना बढ़ चुका है कि बदबू में रह पाना मुश्किल हो गया है।

ऐसे अकेले केवलराम नहीं है। इस गांव में रहने वाले 5 से 7 परिवार और भी है जो अपना घर छोड़ या तो खेतों में शिफ्ट हो गए है या फिर कहीं और। क्योंकि, लंपी से गायों की मौतों का आंकड़ा इतना हो चुका है कि दफनाने के लिए जगह नहीं बची है।

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केवलराम ने बताया कि उनकी कॉलोनी में करीब 150 परिवार रहते हैं। लेकिन, लंपी से मौतों का आंकड़ा इतना बढ़ चुका है कि मृत गायों को कॉलोनी के पास ही फेंक कर जा रहे हैं। बदबू इतनी ज्यादा है कि सांस भी लेना मुश्किल हो गया है।

वे बताते हैं कि उनके पड़ोसी अर्जुनराम और शंकरराम भी अपना घर छोड़कर जा चुके हैं। अभी बारिश का मौसम है। खेतों में बुवाई का समय चल रहा है। खेती के लिए मजदूर तक नहीं मिल रहे। तिंवरी से बबलाराम और शिवराम नाम के दो युवकों को बुलाया था। लेकिन, यहां के हालात देख उन्होंने काम करने से मना कर दिया। कहते हैं, हमें बीमारी लग गई तो हम भी मारे जाएंगे।

गांव वालों का कहना है कि इस बीमारी का खौफ कोरोना जैसा हो गया है। डर है कि कहीं बच्चों को कुछ न हो जाए। इसलिए कई ग्रामीणों ने खुद की गाय का दूध भी पीना छोड़ दिया है। गांवों में पैक्ड और पाउडर दूध की डिमांड अचानक से बढ़ गई।
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जोधपुर में लंपी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। संक्रमित गायों को इस तरह से अलग से रखा जा रहा है ताकि दूसरी गायों में संक्रमण न फैले।
जोधपुर में लंपी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। संक्रमित गायों को इस तरह से अलग से रखा जा रहा है ताकि दूसरी गायों में संक्रमण न फैले।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जोधपुर जिले में 11 हजार 855 गाय संक्रमित बताई जा रही हैं। इनमें 10 हजार से ज्यादा का इलाज चल रहा है। मौत के सरकारी आंकड़े महज 822 हैं। लेकिन हकीकत यह संख्या कई गुना अधिक है।

5 लाख की आबादी वाली पंचायत में दफनाने की जगह नहीं
जोधपुर के तिंवरी पंचायत समिति में कुल 33 ग्राम पंचायत व 77 गांव हैं। यहां करीब 5 लाख की आबादी है, जिसमें अधिकांश किसान है। इनमें भी करीब 1 लाख किसान पशुपालक हैं। जोधपुर शहर से 40 किलोमीटर दूर तिंवरी पंचायत समिति के ग्राम पंचायत घेवड़ा, जेलू गगाडी, उम्मेद नगर, मथानिया, बालरवा, बिंजवाडियां, मालूंगन, चेराई, जुड़, रामपुरा चौपासनी आदि क्षेत्रों में सड़क किनारे और खुले खेतों में शवों को डंप किया जा रहा है।

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जोधपुर जिले में 11 हजार से ज्यादा गाय संक्रमित हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मौत 822 की हो चुकी है। लेकिन, मौतों का आंकड़ा इससे भी ज्यादा है।
जोधपुर जिले में 11 हजार से ज्यादा गाय संक्रमित हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मौत 822 की हो चुकी है। लेकिन, मौतों का आंकड़ा इससे भी ज्यादा है।

बाड़ों व गौशाला के अलावा सड़क पर चलती हर दूसरी गाय में लंपी के लक्षण नजर आ रहे हैं। घेवड़ा गौशाला में 12 सौ में से 200 गाय प्रभावित हैं। इनमें से 50 मरने के कगार पर हैं, इन्हें दूसरी गायों से दूर रखा गया है। पशुपालकों का कहना है कि यह भी दो-तीन दिन से ज्यादा नहीं रहेगी।

घेवड़ा गौशाला से एक किलोमीटर आए खुले मैदान में गाय के शवों का ढेर लगा था। घेवड़ा सरपंच केवल राम मेघवाल ने बताया कि दफनाने को जगह ही नहीं बची है। कई किलोमीटर तक बदबू फैल चुकी है। बदबू की वजह से लोग घरों में रुक भी नहीं पा रहे हैं।

इस बीमारी के बाद पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। इलाज के बाद भी गौवंश को बचा नहीं पा रहे हैं।
इस बीमारी के बाद पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। इलाज के बाद भी गौवंश को बचा नहीं पा रहे हैं।

गायों का दूध गिरा रहे हैं, थैलियों और पाउडर का पी रहे हैं
तिंवरी पंचायत क्षेत्र में करीब 1 लाख पशुपालक है। लेकिन, इस बीमारी के डर से वे खुद की गाय का दूध गिराने को मजबूर है। ये वे परिवार हैं, जो खुद की गाय का दूध काम में लेते थे। इन्फेक्शन फैलने का खौफ ऐसा हो गया कि गाय का दूध पीना छोड़ दिया है।

20 हजार लीटर बढ़ी दूध की डिमांड
तिंवरी में डेयरी प्रोडक्ट की दुकान संचालित करने वाले व्यापारी भगवान सिंह राजपुरोहित का कहना है कि पहले यहां की 33 ग्राम पंचायत में पहले 8 हजार लीटर पैकिंग दूध की खपत होती थी। पिछले पांच-सात दिनों में यह बढ़कर 20 हजार लीटर हो चुकी है।

गांव के लोगों ने बच्चों को पाउडर से बना दूध पिलाना शुरू कर दिया है। पहले न के बराबर इसकी सप्लाई होती थी। लेकिन, अब दो कार्टन पाउडर (48 डिब्बे) दूध की सप्लाई हो रही है। एक कार्टन में 24 डिब्बे आते हैं और 1 डिब्बे से 5 लीटर दूध तैयार होता है। ऐसे में एक दुकान से 240 लीटर पाउडर दूध खपत होने लगा है।

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आंखों के सामने तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही लाखों रुपए की गाय
तिंवरी क्षेत्र के पशुपालक पारसमल परिहार ने बताया कि उनके पास राठी और थारपारकर गाय ज्यादा हैं। थारपारकर गायों की कीमत 1 लाख के करीब है। वहीं राठी गाय 45 से 50 हजार रुपए की है। एक महीने पहले 1-1 लाख रुपए देकर दो थारपारकर और एक राठी गाय लाए थे। लेकिन, तीन दिन पहले उसकी तीनों ने दम तोड़ दिया। इलाज पर 20 हजार रुपए भी खर्च किए लेकिन बचा नहीं सका।

सहयोगी: जेठमल जैन, तिंवरी

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