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सिस्टम सांसें बचा रहा:ऑक्सीजन की इमरजेंसी स्टॉक रख अस्पतालों को कई किस्तों में सप्लाई

जोधपुरएक महीने पहले
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एमजीएच इमरजेंसी में हालात यह है कि मरीजों को बेड नहीं मिलने पर जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
एमजीएच इमरजेंसी में हालात यह है कि मरीजों को बेड नहीं मिलने पर जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है।
  • जरूरत की 75% ऑक्सीजन मिलने के बावजूद ऑक्सीजन संकट से बचा रहे
  • राेज 48 मैट्रिक टन O2 की जरूरत, 37 एमटी ही आ रही

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में अस्पतालों में ऑक्सीजन की जरूरत लगातार बनी हुई है। लगभग रोज लिक्विड ऑक्सीजन के टैंकर मंगवाने के बावजूद अस्पतालों की डिमांड को पूरी नहीं हो पा रही है। हालांकि बीते कुछ दिनों से ऑक्सीजन को लेकर सिस्टम में सुधार हुआ है। अगर किसी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी हो रही है प्रशासन के सहयोग से सिलेंडर पहुंचा दिए जाते हैं।

इससे मरीजों को किल्लत का पता नहीं पड़ता। प्रशासन का पूरा फोकस यही है कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मरीज दम ना तोड़े। दरअसल अप्रैल में बेहद तेजी से बढ़े कोरोना मरीजों से अस्पतालों में बेड, इंजेक्शन और ऑक्सीजन की जबरदस्त कमी हो गई थी। इससे हालात काफी गंभीर हो गए। अब प्रशासन ने दूसरे स्थानों से ऑक्सीजन मंगवाकर स्थिति को थोड़ा संभालने का प्रयास किया है। रोज जामनगर और भिवाड़ी़ से लिक्विड ऑक्सीजन लेकर 3 टैंकर आ रहे हैं।

शहर में ऑक्सीजन की कमी के बाद कई भामाशाह आगे आए और उन्होंने अपने-अपने स्तर पर प्लांट लगाने की घोषणा की है। शहर में करीब 6 भामाशाहों के सहयोग से ऑक्सीजन के प्लांट लगेंगे। विधायक कोटे से करीब 10 ऑक्सीजन प्लांट की घोषणा हो चुकी है।

इसमें 5 के वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं। इसके अलावा कुछ अस्पताल भी अपने स्तर पर प्लांट लगा रहे हैं। केंद्र सरकार का भी एक प्लांट लग रही है। भामाशाहों की ओर से लगने वाले प्लांट एक माह मे लग जाएं तो भी स्थिति ओर बेहतर हो सकती है।

किस्तों में सप्लाई व माइक्रो मैनेजमेंट से किल्लत टाल रहे

  • प्रशासन तय करता है कहां कितनी ऑक्सीजन दी जाए।
  • एक अस्पताल में एक साथ पूरी ऑक्सीजन कि बजाय किस्तों में देते हैं।
  • जहां जैसी जरूरत हो उस हिसाब से किश्तों में सप्लाई करते जाते हैं।
  • निजी अस्पताल में इमरजेंसी में ऑक्सीजन की कमी न हो, इसके लिए निजी प्लांट में O2 स्टोर रखते हैं।
  • हर प्लांट पर सरकारी अफसर लगाए जो कि पूरी मॉनीटरिंग करते हैं।
  • एक कंट्रोल रूम से पूरे माइक्रो मैनेजमेंट सिस्टम संचालित करते हैं।

अभी शहर में रोजाना इतनी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही

  • शहर में एक दिन में करीब 48 मैट्रिक टन की आवश्यकता है।
  • इसके मुकाबले 35 से 37 मैट्रिक टन ऑक्सीजन आ रही है।
  • एमडीएमएच में रोजाना 9.50 मीट्रिक टन यानि करीब 2500 सिलेंडर की आवश्यकता।
  • एम्स में 8.50 एमटी की जरूरत रहती है।
  • एमजीएच में 12.00 एमटी लिक्विड O2 चाहिए।
  • 1600-1700 सिलेंडर निजी अस्पताल की जरूरत होते हैं। इतने ही सरकारी में व शेष संभाग के अस्पताल में।
  • हालांकि पूरे संभाग के लिए करीब 4500 सिलेंडर सरकारी व प्राइवेट अस्पताल में पहुंच रहे हैं।

अस्पतालों में डिमांड और सप्लाई का अनुपात

प्रशासन अस्पतालों को डिमांड के अनुपात में कम सिलेंडर लेकिन समय पर सप्लाई कर रहा है। इससे दिल्ली और महाराष्ट्र के अस्पतालों जैसे हालात यहां नहीं बने। प्रशासन की ओर से हर दिन निजी और सरकारी अस्पतालों में सप्लाई दी जा रही है। ऑक्सीजन बेड पर मरीजों की स्थिति को देखते हुए संख्या में जोड़-बाकी होती रहती है।

प्रशासन का पूरा प्रयास है कि कहीं पर ऑक्सीजन वेस्ट ना हो
उसके लिए पूरा मैकेनिज्म बनाया हुआ है। टैंकर के अलावा लोकल स्तर पर प्लांट लग रहे है। जिससे स्थिति में ओर सुधार आ जाएगा। एक टैंकर आता है तो अस्पताल की स्थिति को देखते हुए वितरण
करते है। -रोहिताश्वर सिंह तोमर, आयुक्त निगम उत्तर

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